xnxx Village Outdoor Chudai Story – 2 देहाती भाभियों को खेत में चोदा
sex story Village Outdoor Chudai Story – 2 देहाती भाभियों को खेत में चोदा
Village Outdoor Chudai Story
गाँव में दोस्त ने दिलाई दो भाभियों की चूत दोस्तों आज की मेरी और दोस्तों के बीच में क्या गुल खिला इस कहानी में जरुर पढ़े और जाने की फिर हमारे बीच क्या हुआ. मेरा नाम गौरव और गाँव का रहने वाला लड़का हूँ. मेरा 25 साल और कद 5 फुट 4 इंच का है. मेरा रंग एकदम साफ है. Village Outdoor Chudai Story
गाँव में मेरे पाँच दोस्त है जो इस प्रकार से है. सुधीर, नामित रवि और अमर थे. मैंने दो लड़कियों के साथ संबंध बनाए हैं. दोस्तो मेरे गाँव में औरते ज्यादा और मर्द काफी कम है क्युकी कई सारे भाभियों के पति सहर में कमाने के लिए जाते थे. दोस्तो मेरे गाँव में सारी औरते शौच के लिए सुबह-शाम खेत में जाया करती हैं.
मेरे गाँव के कुछ दोस्त उधर ही डेरा जमाएं हुए बैठेंते थे और उनलोगों ने मुझे भी बुला लिया था. उनके साथ साथ रहते हुए मेरी संगत भी काफी बदल चुकी हुई थी. अब उनके साथ साथ सुबह शौच के लिए जाता था तो लौटते- लौटते सब मिलकर छुप छुपकर औरतों को शौच करते देखता था और अनुमान लगाता की किसने क्या खाया था.
गन्ने की खेती में छुप छुपकर के सबकी गांड से निकालती हुई टट्टी को देखता और सबके जाने के बाद उस जगह जाता जहाँ सारी औरतों ने मिलकर एकसाथ शौच करके टट्टी निकाली हुई थी. सबकी टट्टी को देखता और उस पर विचार विमर्श होने लगता रवि बोला यह देख मेरे बगल की शिल्पा आंटी ने यहाँ टट्टी किया है और हम सब ह्म्म्म्म कहने लगे और रवि ने उस पर पेशाब कर दिया.
नामित बोला देखा मेरे पड़ोसी तुषार की मम्मी ने यहाँ टट्टी किया. उसने वहाँ पर मूत्र विसर्जन चालू किया. सुधीर बोला मेरी माँ ने यहाँ किया है और पेशाब करने लगा. मैंने भी अधीर की माँ के ऊपर सोचकर पेशाब करने लगा. हमारे गाँव के खेत में सुबह सुबह खुलेआम चुदाई होती हैं और कई औरतों तो शौच के तुरंत बाद चूदवाकर जाती हैं.
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मैंने भी कई बार कई सारी औरतों को चुदवाते हुए देखा था. गाँव की औरतों के चुतड़ काफी बड़े और फैले हुए दिखते थे जिसके कारण धीरे-धीरे मुझे देसी औरतों के चुतड़ पसंद आने लगे, हमें कई साल बीत चुके थे लेकिन किसी चूत पर हमारा निशान नजर नहीं आया बस चुदाई देखने के लिए सुबह सुबह सारे दोस्त आते थे.
मानसून के समय सारे दोस्त सम्मिलित हुए तो हमने सब की सहमति के आधार पर विचार किया कि सब अपने घर और आस पड़ोस की चुदाई का वर्णन करेगा. कुछ समय के बाद सब अपने अपने घर की कहानी सुनाने लगे. सुधीर बोला यार मैं कई दिनों से अपनी माँ की चुदाई देख रहा हूँ और मूठ मार रहा हूँ.
मैंने पूछा किसके साथ देखा. सुधीर बोला वो माली नहीं है. रवि बोला कौन माली. सुधीर बोला वह बृजेश माली नहीं है उसके साथ मैंने अपनी माँ की चुदाई कई महीनों से देख रहा हूँ. इस बार रवि बोला हाँ यार मेरी माँ और कोमल दीदी भी किसी और से चुदवा रहीं थीं. नामित बोला यार मैंने अपनी चाची और पापा की चुदाई देखी है.
मैंने कहा तेरी चाची भी तो काफी खूबसूरत हैं किसी को भी फँसा सकती हैं. उसने कहा तभी तो पिछले कुछ सालों से चुदाई करवा रहीं हैं. अमर बोला यार मैंने अपने पापा को पडोसी आंटी को चोदते हुए देखा देख कर के मज़ा आ गया. उसके बाद अंतिम बारी मेरी थी मैंने कहा यार मैंने भी अपने चाचा को मेरी माँ चोदते देखा है.
सबने अपना घर का हाल सुनाया और सबने एक बार मूठ मारी और शांत होकर घर चले गए, इसी बीच बड़ी दुःखद घटना हुई नामित के चाचा की दुर्घटना और रवि के छोटे भाई की करंट लगने से मौत हो गई. उसके बाद कई दिनों बाद दोनों मिले और अपना दुःखद घटना सुनाया. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वह काफी दुखी ,उसने कहा कि कोई रास्ता बताओ मैं अपनी चाची को ऐसे नहीं देख सकता. किसी की बुद्धी नहीं चल रही थी लेकिन मेरे मन में अजीब सा भाव उमर आया. मैंने कहा मेरे पास एक विचार है अगर तू कहे तो बताऊँगा. मैंने कहा कि देख तेरी चाची तो विधवा हो गई एक काम तू कभी उनकी चुदाई कर दे इसी बहाने वह खुश भी रहा करेगी.
सबने मेरी तरफ देखा लेकिन सुधीर ने इसपे सहमति जताई. उसने कहा देख सिद्घार्थ ने जो कहा वह सही कहा देख तेरी चाची भी शौच के लिए सुबह आएगी, वह अपने बगल में बैठी हुई औरत को हर बार किसी न किसी से चुदवाते हुए देखेगी तो उसे भी चुदवाने का शौक आ जाएगा और किसी का भी पकड़ लेगी.
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उसके आँखों में मैंने उसकी चाची के लिए चमक देखा. उसके बाद वह अपनी चाची को खूब चोदने लगा था. मेरे सारे दोस्त किसी ना किसी औरतों को चोदने लगे, उनके साथ मैं भी गाँव की कुछ भाभियों की बुर मारना चालू किया. अधिकतर भाभियों के पति बाहर रहने से कई सारी भाभियों दूसरे मर्दों से चुदवाती थी.
मेरे घर के तीन घर बाद जिस आंटी का घर है आंटी तो नहीं रही लेकिन उनकी दो दो बहुओं घर में रहती थी.मैंने कई बार पीछा करते हुए देखा सुबह के समय दोनों भाभी खेत में जाकर किसी से चुदवा कर आती थी. उसी समय मैंने भी दोनों भाभियों को खूब जमकर चुदाई की थी.
एक बात उपर बताना भूल गया मेरे गाँव में मुस्लिम समुदाय की कई सारे औरते रहती थी जिनके कई कई सारे बच्चे होते थे. मैंने अपने गाँव में सुना कि मुस्लिम महिलाएं कई कई सारे लोग से चुदवा चुदवा कर बहुत ज्यादा बच्चा पैदा करते थे. गाँव में कई मुस्लिम भाभी भी सलवार पहन कर शौच करते हुए देखा, जब शौच करती सलवार को ऊपर उठा देती थी.
उनकी बड़ी बड़ी झांट देखकर के कई बार पानी निकाल चुका था. मुस्लिम भाभियों से बातचीत होती लेकिन कुछ नहीं मिलता. इसका गवाही मैं दे सकता हूँ मेरे घर में जो पड़ोसी अंकल है उनकी बहु भी मुस्लिम है. उनके छह बच्चे थे. उनके बेटे को अपने गाँव की कई महिलाएं और कुंवारी लड़कियों को चोदते हुए बहुत महीने पहले भी देख चुका था.
मैंने भी गाँव में दो लड़कियों की सील तोड़ी थी बाकी सब चुदी चुदाई मिली हुई थी. मैंने अपनी समुदाय की कई सारी भाभी, उनकी बेटी और अधेड़ उम्र की औरतों के साथ चुदाई कर चुका हुआ था. मैंने अपने समुदाय की जितनी भी भाभी के चूत चोदी, उन सबके चूत के आसपास चुदवा चुदवा कर पूरी ही काली हो चुकी थी.
मुझे इंतजार था तो अब सिर्फ मुस्लिम भाभीयो के चुतड़ का. अब आगे मिले या नहीं इसलिए किसी किसी को चोद लेता था . हर वक़्त यह सोचता रहता था कि कब मौका मिले और कब मेरी किस्मत खुलेगी. मेरे हाथ कुछ नहीं लगा इससे चिंतित हो गया था लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि जिसने मेरे अरमान बदल दिए थे.
मैं मैख़ाने में बैठा हुआ था तब किसी के आने की आशंका हुई. मैंने देखा एक लड़का आ रहा था और उसके साथ दो औरते थी जो मुँह छुपाछुपा कर ठीक उसके पीछे पीछे चल रही थी. जब थोड़ा समीप आया तो देखा वह तो मेरा दोस्त अमर था. अमर मेरे पास दो भाभी को लेकर आया और पूरा व्याख्या करने लगा और बोला दोनों पड़ोसी भाभी की मदद कर दो.
उनके साथ में जो भाभी थी वो कई सालों पहले विधवा थी. नज़मा हरे कलर का टाइट सूट पहना था और खुले बाल रखे थे. उनके बगल में रजिया भाभी नाइटी पहनी हुई खड़ी थी. मैंने ठीक से देखने लगा. रजिया भाभी मस्त फ़िगर वाली, बड़े मम्मे और बड़ी गांड वाली बहुत ही सेक्सी औरत हैं.
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फिर दूसरी ओर नज़मा जो कि उनका फ़िगर रजिया भाभी से ज्यादा था. नज़मा बाल बच्चे वाली और रजिया भाभी विधवा थी. नज़मा के चार बच्चे थे जिसमें तीन बेटी और एक बेटा था. उसकी सास काफी ज्यादा बदमाश किस्म की औरत थी चार बच्चे होने के बाद भी नजमा को खूब ताने देती थी.
उसका पति पैसे कमाने के लिए दिल्ली जाकर वहां कुछ काम करता था. उसके सास ससुर और बच्चे पैदा करने के लिए जोर दे रही थी और बोली किसी से भी चुदवाले लेकिन दो बेटे मुझे और दे दे. तब अमर बोला मैंने नज़मा भाभी को कई बार चोदा लेकिन उनका गर्भ धारण करने ही कुछ दिनों के भीतर ही गिर गया. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
अमर ने दुबारा कोशिश की लेकिन दुबारा भी गिर गया. वह जानकारी मुझे अमर ने दी क्युकी नज़मा उसकी पड़ोसी थी. एक तो गाँव की उनकी पसीने से गीले ब्लाऊज़ से और दूसरी तरफ भाभी की मांसल और मोटी गांड देख कर मुझसे रहा नहीं गया. मैंने बिना वक़्त गंवाए अपने कपड़े भी उतार दिए.
एक हाथ से मैं उसके चूचे मसल रहा था. उसके निप्पलों को मसलने में बड़ा मज़ा आ रहा था. पर जोर जोर की आवाजें निकाल रही थी. कुछ देर के बाद उनकी नाइटी को उठाया. उसको देखकर लग रहा था कि कई दिनों से झाँटें नहीं बनाई हुई थी जिसे देखकर के मेरी आँखों में चमक आने लगी थी. “Village Outdoor Chudai Story”
नजमा तुरंत उठकर मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगीं. इधर अब मेरी सिसकारियां निकलने लगीं हुई थी. नजमा पूरी मस्ती में मेरा लन्ड मुंह में ले रही थी. मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर काफी देर तक चूसी और फिर टाइट किया. उसकी चूत के पास बड़े बड़े बाल थे, मैं चूत पर ऊँगली फेरने लगा.
वो गरम होने लगी धीरे धीरे उसकी चूत गीली और चिप चिपि हो गई, जैसे ही ऊँगली छेद पे लगाई कुसमसाने लगी. उसकी नंगी गीली चूत देखकर उसकी चूत पे जीभ फेरने लगा. उसकी काली चूत चाट कर उसके बड़े मम्मे मसलते लगा था. खाजा साले मादरचोद अम्मी ईईई कुत्ते की तरह चाट रहा है तू उसकी महकती चूत चाट कर बाहर से पूरी गीली कर दिया.
मैंने पीछे से नज़मा की चूत में लंड घुसेड़कर चुदाई करने लगा. नजमा की चूत ढीली हो गई थी क्यूंकि चीखना चिल्लाना बंद हो चुका था और वे भी अपनी गांड उछालने लगी थी. जब जब भी मैं चूत में लन्ड डालता तो नज़मा अपनी गांड ऊपर उठा देती. इस तरह से चूत में पूरा लन्ड अंदर बाहर हो रहा था.
मैं: साली बहन की लोड़ी, तेरी चूत में बहुत ज्यादा गर्मी भरी है. आज तेरी सारी गर्मी निकाल दूंगा मादरचोद आह आह आ.
मुझे मोटी मुस्लिम भाभी को चोदने में बहुत मजा आ रहा था. अब उसे भी मज़ा आने लग रहा था, अब वह भी अपने कूल्हे उछाल-उछालकर मुझसे चुदवा रही थी. अब मैंने उसे और बड़े ज़ोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया था. मैं पूरी तेज़ी से नजमा को चोदने में लगा हुआ था. उसके 36 के बूब्स भी हिलने लगे.
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इस धकापेल चुदाई के बीच में ही पांच मिनट बाद ही झड़ गईं. उसके चूत से भीतर पचपच की पनीली आवाज आने लगी. मेरे लंड की जोर की पिचकारियां बुर में तर करने लगीं हुई थी. वो बिल्कुल निढ़ाल सी होने लगी और चूत का रस बहकर मेरे अंडकोषों को भिगोने लगा. “Village Outdoor Chudai Story”
तभी मैंने स्पीड तेज़ की और फुल स्पीड में चोदने लगा. उसके मुँह से काफ़ी आहें निकलने लगीं. उसके चूत में जोर से धक्के मारने लगा, मैं अब झड़ने वाला था.मैं जोर-जोर से चूत चोदने लगा और उसी समय में झड़ गया.तभी मेरा पानी निकलने को हुआ और मैंने अपना लंड का सारा पानी उसकी चूत में निकालते हुए ढीला पड़ गया था.
मेरा गाढ़ा वीर्य उसके चूत के मुँह के आसपास भी फैल गया. मेरी आंखों में अभी भी काफी ज्यादा भूख बाकी थी.इस खुले हुए आसमान के नीचे नहीं बल्कि दो दो चुदक्कड औरत खड़ी थी. इधर मेरा दोस्त जा चुका था इसलिए डबल जिम्मेदारी थी. रजिया पहले से खेत के बीचोबीच अपनी सलवार उतार चुकी थी, उसके 38 के बड़े बड़े बूब्स और चूतर देखकर दंग रह गया.
मैंने उसके मोटे मोटे होंठो को चूसने लगा. मैंने एक हाथ से में उनकी चूचियां दबा रहा था और दूसरा हाथ ले जाकर उनके साड़ी के ऊपर से ही धीरे-धीरे उनकी चूत को मसलने लगा. नजमा की गांड का मुंह कभी खुल जाता कभी बंद हो जाता. मैंने नज़मा को घोड़ी बनाया, बाल पकड़े और ज़ोर-ज़ोर से गांड मारने लगा.
पहले तो खेत के बीच में खूब ज्यादा रो पड़ीं. दोस्तो सबसे ज्यादा चुदाई गाँव में ही होती हैं एक तो खुलापन और दूसरा की जगह ही जगह होता है चुदाई करने के लिए. मैंने धीरे धीरे अपना लंड गांड में अन्दर बाहर करने लगा.थोड़ी देर बाद उसका का दर्द सिसकारियों में बदलने लगा.
धीरे-धीरे मज़ा आने लगा और वह खुद कमर हिलाकर चुदवाने लगीं. मैं समझ चुकी थी कि अब वो भी चुदाई के मजे लेने लगी हैं. करीब दस मिनट के भीतर ही अंदर ही शहीद हो गया. जिससे मैं काफी हाँफ रहा था और नजमा की आँखें अभी भी बंद थी. मैंने अपने मुरझाए हुए लंड को फिर रजिया भाभी के हाथ में दे दिया. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वह उसे पकड़कर अपनी मुट्ठी में भरने लगीं. वह उठी फ़िर भूखी शेरनी की तरह लन्ड पर टूट पड़ी और पूरा लन्ड मुँह में भरकर अंदर बाहर करने लगी और एक हाथ से अंडकोष सहला रही थी. मैंने धीरे धीरे चूत में एक उंगली डाल दी और सिसकारियां बढ़ने लगीं. “Village Outdoor Chudai Story”
उसके बड़े बड़े बूब्स को चूसने लगा. रजिया की चूत का छेद काफी हद तक खुला और चौड़ा था. मैंने लंड थूक से चिकना करवा कर उनकी दोनों टांगों के बीच में आ गया. उसकी टांगें उठा कर मैंने अपना लंड चुत के छेद पर टिकाया और एक बड़े से झटके में अन्दर घुसेड़ दिया था.
तो रजिया बदचलन की तरह मुँह खोलते हुए मुझे जैसी औरत को रंडी बोल,जो गाँव के कई मर्दों से पकड़ कर चुदवा रही हूँ. मैंने पोज चेंज किया और रजिया पेड़ को पकड़ के खड़ी थी फिर पीछे से अपना लन्ड डाल कर पेलने लगा जितना जोर लगा के पेल रहा था उतनी ही चूचियों बार बार हिल रहीं थीं.
मैं इतनी ताकत से उनको चोदे जा रहा था जिससे कुछ ज्यादा ही हलचल होने लगी. इसी बीच जब झड़ गई ऐसा लगा जैसे उसके चूत से किसी सूखी नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी. मैंने अपनी स्पीड तेज़ की चट चट चट चट की आवाज सुनाई देते हुए 10-12 झटकों के बाद पिचकारी चूत के अंदर छोड़ीं.
रजिया भाभी के 40 की बड़ी और खुरदरी गांड मेरे सामने थी. इतनी बड़ी गांड में बड़ी छेद देखकर लंड एकदम खड़ा हो गया. मैं अपनी उम्र के हिसाब से काफ़ी फुर्तीला और जोशीला था. मैं दो दो चुदक्कड औरत को चोद कर पसीना पसीना हो गया था. फिर भी मैंने उनके आंसू को नजरअंदाज किया और गांड में जोरदार धक्के देने लगा. “Village Outdoor Chudai Story”
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साथ ही उसके उठे हुए पिछवाड़े पर जोर जोर से चांटे मार रहा था. कुछ समय बाद वो धीरे-धीरे करके गांड आगे पीछे करने लगी. उसकी खुरदरी गांड और काफी ज्यादा दागों से भरी गांड काफी ही ज्यादा हिल रहीं थीं झड़ने से ठीक पहले नजमा की चूत में घुसेड़ कर चुदाई करते हुए पानी निकाला.
मैं इस बार काफी जोर से हाँफ रहा था. फिर से मैं दूसरी बार निढाल सा उनकी और देखने लगा था. उसके बाद लगातार एक हफ्ते तक गन्ने के खेते के बीचोबीच चुदाई कार्य करता और हर बार पानी अंदर ही गिरा देता था. कुछ ही दिनों में गाँव की दोनो भाभी मुझसे प्रेगनेंट हो गई थी.
और बिना शादी किए ही मैं उनदोनों बच्चों का बाप बन चुका था. इसके बाद कई सारी अलग अलग मुस्लिम भाभी को भी मैंने शौच करते करते हुए ही चोदा और दोस्तों से चुदवाया था. मेरे दोस्त ने ही मुझे अपनी दोनों भाभी जी की चूत दिलवाई. इसी प्रकार मेरी गाँव की कहानी और गाँव की बात खत्म हुई.
