xnxx Hindi Sexy Regret Story – वाइफ स्वैपिंग का नाजायज गुनाह किया
sex story Hindi Sexy Regret Story – वाइफ स्वैपिंग का नाजायज गुनाह किया
Hindi Sexy Regret Story
मैं इस काबिल तो नहीं कि अपना तअरुफ़ आपको करवाऊँ लेकिन मेरी कहानी के लिए ज़रूरी है इसलिए मजबूरी है। मेरा नाम परमजीत है। मैं यूएई में काफी अरसे से रहाइश पज़ीर हूँ। आया तो काम के लिए था, यह मुल्क कुछ ऐसा भाया कि वापसी का ख़याल ही नहीं आया। अब सोचता हूँ काश अपने मुल्क वापस ही चला जाता तो कितना अच्छा होता। Hindi Sexy Regret Story
आज यह शर्मनाक कहानी मेरी तो न होती, मैं इसका एक किरदार तो न होता। अपने ज़मीर की नाक़ाबिल-ए-बरदाश्त तकलीफ़ तो झेलता। ख़ैर मेरे साथ जो कुछ हुआ, जो मैंने महसूस किया, जो मैंने देखा, वो मैं नहीं चाहता कि कोई और देखे इसलिए अपनी कहानी आप सब तक बग़ैर किसी भी हिस्से को छुपाए पहुँचा रहा हूँ।
जैसा कि मैं कह रहा था मैं एक अरसे से यूएई में ही मुक़ीम हूँ। जब काफी अरसे मेरे लौटने की ख़बर न आई तो मेरे माँ-बाप को मेरी शादी की फ़िक्र सताई और उन्होंने वहाँ इंडिया में ही एक अच्छी सी प्यारी सी लड़की देख ली मेरे लिए। मुझे उसकी तस्वीर देखने को भेजी गई। काफी सुंदर थी, कम उम्र भी थी और ख़ूबसूरती में अपना जवाब आप थी।
मैंने हाँ कर दी। आप जानें मुझे शादी की कोई ख़ास जल्दी न थी क्योंकि यहाँ एक से एक लड़की मौजूद थी जो एक रात मेरा बिस्तर गर्म करती और फिर कभी नहीं दिखती। मैं इन ही औरतों का आदी था। शराब और शबाब मेरी कमज़ोरी थी। कौन से मुल्क और कौन सी कौम की औरत नहीं चखी मैंने। लेकिन एक बात मैं ज़रूर यहाँ कहना चाहूँगा जो बात जो नमक इंडियन्स में है वो आपको सारे जहाँ की लड़कियों में नहीं मिलता।
मेरी शादी वहाँ इंडिया में बहुत धूम-धड़ाम से हुई और शादी के एक ही महीने के बाद मैं अपनी पत्नी “मालिनी कौर” को लेकर वापस यूएई चला आया। हमारा ठिकाना अजमान था। यहाँ ही एक अच्छी फ़र्म में काम किया करता था। अपना एक अपार्टमेंट था, गाड़ी भी ले रहा था। मानो हर आसाइश हमारे पास थी।
शुरू के दिन तो मैं अपनी पत्नी मालिनी में मगन रहा। नया नया जिस्म था, नई जवानी थी, वो भी भरपूर जवां थी मैं भी। उसमें भी आग थी और मैं तो घाट-घाट का पानी पिए हुए था। जानता था औरत को किस तरह इस्तेमाल किया जाता है, किस तरह उसके जिस्म को अपने पूरे मज़े के लिए इस्तेमाल किया जाता है, कैसे उसके जिस्म की ऊँचाइयों और गहराइयों से खेलते हुए उससे अपना मतलब पूरा किया जाता है।
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एक छोटे से अरसे में ही मेरी बीवी की चूत काफी खुल गई। हर तरह मैंने उसे चोदा था, खूब चोदा था, हर रात चोदा था। वो भी आदी थी। उसकी रातें भी अब मेरे लंड के बग़ैर न गुज़रती थीं। सिवाए मख़सूस ऐयाम के कोई दिन ऐसा न गुज़रा जब रात उसने मेरे लंड से न खेला हो, जब उसकी चूत वीरान रही हो।
लेकिन न जाने क्यों अब तक वो उम्मीद से न हुई थी। मुझे मोहब्बत थी उससे। उसका जिस्म कोरा था, मैंने ही उसके कंवारेपन को ख़त्म किया था। उसके बदन पर मेरा ही नाम लिखा था। मैं ही वो पहला मर्द था जिसने उसके जिस्म की आग को सर्द किया था। वो भी मुझे बहुत चाहती थी। क्या ख़ूबसूरत दिन थे, क्या ख़ूबसूरत रातें थीं। अब याद करता हूँ तो दिल कट सा जाता है।
मैंने और मालिनी ने एक दूसरे को बहुत प्यार दिया। वो भी बहुत गर्म थी। उसकी गर्मी निकालते समय कई दफ़ा तो मुझे भी पसीने आ जाते थे। बेहद जज़्बाती लड़की थी। जब बिस्तर पर होती तो बहुत बेरहमी से पेश क़दमी करती। अपनी टांगें खोलकर बस मज़े लेती। उसकी कोशिश होती मेरा पूरा लंड अपनी चूत में समाकर मेरे वजूद से अपनी प्यास पूरी तरह बुझा ले, मेरे जिस्म से मस्ती की एक-एक बूँद निचोड़ ले।
और इसी कोशिश में उसके अपने जिस्म से चूत के रास्ते गर्मागर्म मनी बहने लगती। मेरा लंड ६ इंच था। मुझे कई दफ़ा लगता कि उसको मेरा लंड अपनी प्यास बुझाने के लिए काफी छोटा लगता है। मैं ये नहीं कहता कि उसने कभी बड़ा लंड लिया था लेकिन उसकी ख़्वाहिश ये ज़रूर थी कि उसके शौहर का लंड और बड़ा हो।
वो कभी ऑलिव ऑयल की मालिश करती तो कभी कुछ और लेकिन जैसा वो चाहती थी शायद उसको वो नतीजे नहीं मिले। बाद के वाक़ियात ने ये बात साबित कर दी मेरी बात सही थी। वो अपनी चूत में बड़ा लंड ही लेना चाहती थी। अपने जिस्म की पूरी गर्मी निकालना चाहती थी।
मुझे बड़ी शर्म आ रही है लेकिन ये हक़ीक़त है कि मेरी चाहती बीवी मालिनी को मेरे जिस्म से अपना मतलब का मज़ा नहीं मिल रहा था। मैं कोई पाकबाज़ इंसान नहीं था। शादी से पहले हर तरह की रंडियों को चोद चुका था लेकिन उनको मेरे लंड से कोई शिकायत नहीं थी।
लेकिन मैं उस वक़्त इतनी सी बात नहीं समझ पा रहा था कि वो तो कॉल गर्ल्स थीं, उनका तो काम ही अपनी चूत से पैसा कमाना है। उनकी चूत को तो मेरे लंड के छोटे होने से आनंद मिलता होगा वो भला क्यों शिकायत करतीं। और ये मेरी बीवी थी जिसकी चूत को एक ही लंड मिलता था तो अगर वो उसको छोटा लगता था तो उसकी शिकायत बिल्कुल ठीक थी।
हाँ ये बात और थी उसने अपनी रिवायती बीवी होने का सबूत देते हुए मुझसे कभी कोई शिकवा नहीं किया। जब शादी को दो साल गुज़र गए तो मेरी बीवी लाख हसीन सही कब तक एक ही चूत को चोदता। इसी दौरान रंडियाँ भी चोदता रहा और मेरी बीवी यही समझती रही कि उसके शौहर के जिस्म को कभी किसी औरत ने नहीं छुआ था अब तक।
मेरी बीवी और मैं हर तरह एक दूसरे को प्यार करते लेकिन मालिनी में बस कमी थी तो एक वो ये कि वो न अपनी रसीली चूत मुझे चूसने देती और न मेरा लंड अपने मुँह में लेती। मैंने कई बार उसकी चूत को चूसने की कोशिश की लेकिन वो मेरा मुँह हटा दिया करती थी और अगर कभी मैं जज़्बात में आकर अपना लंड उसके मुँह तक ले जाता तो वो मना कर देती।
न जाने वो ऐसा क्यों करती थी। और कोई कमी न थी। बहुत ही हसीन थी वो। अब तक कोई बच्चा न होने की बिना पर उसका फ़िगर लाजवाब था। हाँ गाँड थोड़ी बड़ी हो चुकी थी क्योंकि शादी के कुछ दिनों बाद ही से मैं मालिनी की गाँड चोदता रहा था लेकिन मम्मे अब तक न लटके थे।
पहले रोज़ जैसे ही तने हुए और निप्पल्स तने हुए। ख़ूबसूरत गर्मागर्म और गुलाबी चूत जिससे रस फौरन ही टपकना शुरू हो जाता। अफ़सोस मैं अब तक अपनी हसीन बीवी की चूत का रस नहीं चख सका था। ये वाक़ियात जो अब मैं बताने जा रहा हूँ वो कम-ओ-बेश हमारी शादी के दो साल बाद पेश आए।
एक दिन मैं ऑफ़िस से वापस आया तो मालिनी ने बताया कि हमारे पड़ोस में एक फैमिली नई शिफ़्ट हुई है। वो दोनों भी कपल थे। अगले दिन मेरी उनसे मुलाक़ात भी हो गई। मर्द का नाम दिनेश था। उसका ताल्लुक़ दिल्ली से था। अच्छा मिलनसार आदमी था। मैंने उन दोनों मिया-बीवी को रात के डिनर पर इनवाइट कर लिया।
रात को हमारी मुलाक़ात हुई। दोनों मिया-बीवी ख़ूबसूरत थे। उसकी बीवी का नाम रागिनी था। काफी हसीन औरत थी, रस भरा गिदराया हुआ जिस्म साड़ी में लिपटा हुआ था और अपनी तरफ़ खींचता था। भारी और ख़ूबसूरत सीना अपनी तरफ़ दावत देता था कि आओ और उनको प्यार से चूम लो।
उधर दिनेश मेरी बीवी से काफी मुतास्सिर नज़र आ रहा था। मालिनी के काफी रिलेटिव दिल्ली में रहते थे और इत्तेफ़ाक़ की बात थी दिनेश उनमें से कुछ को जानता था तो वो दोनों काफी हँस-बोल रहे थे। दिल्ली की बातें हो रही थीं। मालिनी को दिल्ली पसंद था। मैं किचन में था। दिनेश की बीवी वहीं चली आई “आए भाई मैं आपका हाथ बता देती हूँ।”
मैंने बोला “अरे नहीं आप आराम से बैठिए आप हमारी मेहमान हैं हमें ख़िदमत करने दीजिए।” लेकिन वो न मानी और खाना लगाने में मेरी मदद करने लगी। बर्तन उठाने लगी और मेरा हाथ एक-दो बार उसके जिस्म से टकरा गया। यक़ीन करें इसमें मेरा कोई क़सूर नहीं था लेकिन मेरे जिस्म में गर्मी की लहरें दौड़ने लगीं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
बहुत ही नाज़ुक और नरम था उसका जिस्म। और उसने भी बुरा नहीं माना था। वो वैसे ही भाई-भाई कहकर मुझे मुख़ातिब करती रही और हम इधर-उधर की बातें करते रहे। उधर दिनेश और मेरी बीवी मालिनी अपनी बातों में मगन थे। मैंने और रागिनी ने खाना लगाया। हम सब टेबल पर आ बैठे।
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डिनर टेबल पर भी दिनेश और मालिनी ज़्यादा बातें करते रहे। हम तो बस यूँ ही कभी उनकी बातों में शामिल हो जाते। ख़ैर बहुत अच्छा लगा साथ डिनर करके। खाने के बाद ड्रिंक का एक दौर चला। मैंने और दिनेश ने व्हिस्की पी जबकि दोनों औरतों ने बियर पीकर हमारा साथ दिया। आख़िर रात १ बजे दोनों मिया-बीवी डिनर का शुक्रिया अदा करते हुए घर चले गए।
कुछ ही दिनों में हम लोग एक दूसरे के बहुत क़रीब हो गए। अक्सर वीकेंड्स हम साथ गुज़ारते। पिकनिक्स, क्लब्स और डिनर्स बस यही सब जारी रहता। ज़िंदगी ख़ूबसूरत थी, पुरसुकून थी लेकिन ये सुकून आर्ज़ी था। ये खूबसूरती मसनूई थी क्योंकि मैं महसूस कर रहा था जैसे-जैसे दिन गुज़र रहे हैं मैं रागिनी के इश्क़ में गिरफ़्तार होता जा रहा हूँ।
आपको अजीब लगे ये बात शायद आप सोचें कि बीवी के होते भी मेरी सोच कितनी आवारा थी लेकिन दोस्तों वो कहते हैं न अपनी बीवी चाहे कितनी ही ख़ूबसूरत हो दूसरी ही की अच्छी लगती है तो वो सही कहते हैं। यही कुछ मेरा हाल था। मेरी नज़रें रागिनी के जिस्म का ही तवाफ़ करतीं जब भी हम लोग कहीं बाहर गए हों।
उसको कपड़े पहनने का ढंग था, बेहद दिलकश लगता था उसका जिस्म। मैं तो मशहूर हो जाता था। उसकी ज़्यादा से ज़्यादा क़रीब होने की कोशिश करता। उसका शौहर दिनेश तो मेरी बीवी में मगन होता। दोनों खूब बातें करते लेकिन आप कुछ भी समझें लेकिन मैं आपके सामने इक़रार करता हूँ कि मुझे दोनों की परवाह ही नहीं हुआ करती थी।
मैं तो बस रागिनी के हसीन जिस्म के नशेब-ओ-फ़राज़ को सोचता और उसके महकते जिस्म की ख़ुशबू में खोया रहता। मेरे दिल के आवारापन मुझे बस रागिनी को दिखाता। मैं अपनी बीवी की तरफ़ से बेपरवाह हो चुका था। मेरी शदीद ख़्वाहिश हो चुकी थी कि रागिनी का हसीन जिस्म मुझे मिल जाए।
ज़ाहिर है उसका शौहर मेरी बीवी से बातें करता तो वो मुझसे बातें क्या करती। हम जो बातें करते वो बस इधर-उधर की होतीं। हम बस टाइम पास किया करते जबकि मालिनी और दिनेश अपना वक़्त बहुत अच्छा गुज़ारते। रागिनी भी ये बात महसूस कर चुकी थी कि मैं उसके जिस्म में दिलचस्पी रखता हूँ।
शुरू में तो उसने अपना बदन छुराया लेकिन फिर वो भी बेपरवाह होती गई। उसके बड़े से गले से झाँकती उसके भारी मम्मों की नाज़ुक सी लकीर जैसे मेरी आँखों से होती दिल में उतर जाती। उसकी ख़ूबसूरत गाँड को बग़ैर कपड़ों के मैं अपने तसव्वुर में देखता। और आप जानें औरत की सबसे बड़ी कमज़ोरी यही होती है कि मर्द उसकी ख़ूबसूरती उसकी हुस्न की तारीफ़ करे।
वो शादीशुदा थी लेकिन उसका शौहर जब तक हमारे साथ होता मेरी बीवी मालिनी से ही बातें क्या करता। वो उसे अपनी छोटी बहन कहता था लेकिन मेरी नज़रों में अपनी पसंद-दिदगी देखकर रागिनी का नफ्स ज़रूर मुतमइन होता था। वो अब मेरे सामने खूब बन-संवरकर आती और मैं कुछ दिनों से देख रहा था कि वो बिला-ज़रूरत अपने बदन की नुमाइश करके मेरे सामने ख़ुश होती।
उसके दिल में चोर था। आप जानें इस बात का अंदाज़ा आप भी कर सकते हैं एक छोटे से वाक़िए से। हुँ कुछ यूँ कि एक रोज़ हम एक क़रीबी रेस्तराँ में डिनर के लिए गए हुए थे। हस्ब-ए-मामूल दिनेश और मालिनी दिल्ली की बातें कर रहे थे। मालिनी के एक चाचा के बारे में बात हो रही थी जो इत्तेफ़ाक़ से दिनेश के भी अज़ीज़ थे।
मैं और रागिनी उनकी बातें बेदिली से सुन रहे थे। मैंने देखा रागिनी थोड़ी सी झुकी कोई चीज़ ज़मीन से उठाने के लिए। उसके आधे से ज़्यादा मम्मे बाहर निकल आए। उसने झुकते-झुकते अपने शौहर दिनेश की तरफ़ देखा जो मेरी बीवी से बातें कर रहा था उसकी नज़रें अपनी बीवी की तरफ़ नहीं थीं।
मेरी नज़रें रागिनी के अध-छुपे मम्मों की नज़ाकत पर चिपकी हुई थीं। उसने ज़मीन से अपना रुमाल उठाया और एक हाथ से अपना गला थोड़ा खींच लिया। आप यक़ीन करें निप्पल्स के गिर्द जो दायरा सा होता है वहाँ तक उसके मम्मे मेरी नज़रों के सामने आ गए। ब्राउन कलर का एक सर्कल। मेरा लंड एक झटका लेकर खड़ा हो गया।
अब वो सीधी हो चुकी थी लेकिन क्योंकि उसने अपना गला आगे की तरफ़ खींच लिया था इसलिए मम्मे काफी बाहर को उभरे थे। उसने अपना पल्लू ढीला रखा था जिसकी वजह से मेरी नज़रें सीधी उसके मम्मों पर थीं। कुछ देर वो यूँ ही बैठी रही। मैंने नोट किया वो कभी चुपके से मेरी तरफ़ भी देख लेती और मुझे अपने मम्मों की तरफ़ आँखें फाड़कर देखते हुए पाकर दोबारा अपने शौहर की तरफ़ देखने लगती।
कुछ देर बाद दिनेश ने अपनी बीवी से कुछ पूछा। उसको अपनी तरफ़ मुतवज्ज़ह पाकर रागिनी ने एक दम अपना पल्लू ठीक कर लिया। बस उसी दिन से मुझे यक़ीन हो गया कि रागिनी सिर्फ़ मुझे अपना बदन दिखा रही थी। उसका मक़सद अपने अधूरे मम्मे मुझे दिखाकर मेरी पसंद-दिदगी को नोट करना था।
दिन यूँ ही बीत रहे थे। एक दिन मैं अपने ऑफ़िस में बैठा था कि दिनेश की कॉल आई कि वो मेरे ऑफ़िस के नज़दीक ही आया हुआ है अगर मैं फ़ारिग़ हूँ तो किसी कॉफ़ी शॉप में बैठकर कॉफ़ी पी जाएँ। मेरा भी ऑफ़ करने का मूड था। मैंने ऑफ़िस से पैक अप किया और लिफ़्ट से नीचे पहुँचा।
वहाँ दिनेश अपनी गाड़ी के पास खड़ा मेरा ही वेट कर रहा था। मैं उसके साथ ही बैठ गया और एक क़रीबी कॉफ़ी शॉप पर पहुँचे। वो अपनी जॉब के बारे में बताने लगा। हम कॉफ़ी पीने लगे और साथ ही बातें भी करते जाते। आख़िर दिनेश ने मुझसे कहा “भाई परमजीत मुझे आपसे एक ज़रूरी बात करनी है अगर आप इजाज़त दें।”
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मैं बोला “कहो दिनेश।”
दिनेश कुछ देर बाद बोला “भाई परमजीत क्या आप मेरी बीवी रागिनी के लिए कोई ऐसे-वैसे ख़यालात अपने मन में रखते हैं।”
दिनेश को मैं तकता ही रह गया। उसने कितनी अजीब, कितनी घिनौनी बात कितनी आसानी से कह दी थी लेकिन मैं अपने दिल के चोर पकड़े जाने से कुछ घबरा भी गया था। आप जानें उसकी बीवी रागिनी के जिस्म का आशिक़ तो मैं था ही साथ में उसके जिस्म को हासिल करने की ख़्वाहिश भी रखता था। हाँ ये कभी न सोचा था कि यूँ दिनेश मेरे सामने बैठकर मुझसे इस बारे में कभी बात करे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं उसकी बात के शॉक से बाहर आया तो हकलाती आवाज़ में बोला “दिनेश ये ऐसी बात क्यों कर रहे हो तुम मुझसे।”
दिनेश बोला “क्या ऐसी कोई बात नहीं है परमजीत भाई।”
मैं बोला “आख़िर तुम ये कैसे कह सकते हो मैं तो उसे अपनी भाभी ही समझता हूँ।”
दिनेश बोला “मैं भी यही समझता था परमजीत भाई कल रात से पहले।”
“क्यों! क्या हुआ था कल रात?”
दिनेश बोला “परमजीत भाई आप तो जानते हैं रागिनी नींद में बोलने की बीमारी में मुब्तला है। कल रात उसने आपका नाम लेते पूरी रात गुज़ारी। सुबह जब इस बारे में उससे मैंने पूछा तो पहले तो इंकार करती रही आख़िर उसने इक़रार किया कि वो आपको पसंद करती है और उसके मन में ख़्वाहिश है।”
“कैसी ख़्वाहिश?”
दिनेश ख़ामोश था। ऐसा लग रहा था उसे ये बात कहते बहुत तकलीफ़ हो रही थी। कुछ देर में उसने लंबी साँस खींची और कहा “वो आपसे चुदाई करवाना चाहती है।”
मैं हक्का-बक्का हो गया।
दिनेश बोला “प्लीज़ परमजीत भाई आपको ये बात अजीब लगेगी लेकिन मैं अपनी बीवी की कोई ख़्वाहिश टाल नहीं सकता। उससे मोहब्बत ही इतनी करता हूँ।”
और मैं उसकी इस अनोखी मोहब्बत पर हक्का-बक्का उसे देख रहा था। यूँ तो मेरे दिल में ख़ुशी के लड्डू फूट रहे थे लेकिन कितनी अजीब बात थी ये और कितनी अजीब तरह हो रही थी। इसको मेरा दिमाग़ मान नहीं पा रहा था कि दुनिया में ऐसा भी होता है भला। और दोस्तों दुनिया में क्या नहीं होता? मैं सिर पकड़कर चेयर पर बैठ गया।
दिनेश बोला “क्या हुआ परमजीत भाई क्या आपको रागिनी पसंद नहीं है?”
आख़िर मैंने सोचा कि ये तो अब बेवक़ूफ़ी होगी कि एक आदमी अपनी बीवी की पसंद का ख़ुले दिल से माजरा बयान कर रहा हो और मैं उसको मना कर दूँ। मैं बोला “नहीं दिनेश ऐसी बात नहीं। बल्कि मैं तो तुम्हारी तकदीर पर हमेशा से ही रश्क करता चला आया हूँ कि तुमको कितनी अच्छी और ख़ूबसूरत बीवी मिली है।”
दिनेश जल्दी से बोला “वो आपकी भी हो सकती है परमजीत भाई अगर आप चाहें।”
मैंने कहा “ऐसा कैसे मुमकिन है दिनेश। वो अब तुम्हारी बीवी है मैं उससे शादी नहीं कर सकता।”
दिनेश बोला “तो मत करें शादी। आप उसके साथ कुछ रातें तो गुज़ार ही सकते हैं। उसकी ख़्वाहिश भी पूरी हो जाएगी और आपकी भी तकदीर कुछ दिनों के लिए मेरी तरह अच्छी हो जाएगी।”
मैंने हक्का-बक्का कहा “ऐसा कैसे हो सकता है दिनेश। भला रागिनी मेरे साथ रातें क्यों गुज़ारेगी।”
वो बोला “ये आप मुझ पर छोड़ दें।”
मैं ख़ामोश हो गया और शायद उसने उसकी रज़ामंदी समझा।
वो बोला “तो मैं आज ही रागिनी को बता दूँ कि आप तैयार हो गए हैं।”
मैं बोला “दिनेश ये सब मुझे बहुत ही अजीब लग रहा है। वो तुम्हारी पत्नी है यार।”
दिनेश बोला “तो क्या हुआ परमजीत भाई आप भी कोई ग़ैर तो नहीं हो। बात घर की घर पर रहेगी और आपको आपकी पसंद भी हासिल हो जाएगी।”
मैं कुछ-कुछ क़ायल हो गया उसकी बात पर। मैं एक दम बोला “अगर मालिनी को पता चल गया तो?”
दिनेश बोला “हाँ ये तो है। रागिनी उसे तो ज़रूर बता देगी।”
मैं एक दम परेशान हो गया। रागिनी का हसीन जिस्म मेरी पहुँच में आकर दूर जाता दिखाई दिया। मैं बोला “क्या करें फिर दिनेश। मालिनी को पता नहीं चलना चाहिए।”
दिनेश अय्यारी से बोला “एक तरकीब हो सकती है परमजीत भाई?”
मैं बोला “जल्दी बोलो दिनेश।”
दिनेश मेरी बेताबी को गहरी नज़रों से देखते हुए बोला “अगर हम मालिनी को भी इस खेल में शरीक कर लें तो वो आपको कुछ नहीं कहेगी।”
मैं हक्का-बक्का बोला “क्या मतलब मालिनी का क्या काम इस काम में?”
दिनेश बोला “आप नहीं समझे परमजीत भाई। वाइफ़ स्वैपिंग का नाम कहीं सुना है आपने?”
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और एक दम जैसे मेरे दिमाग़ में रोशनी का एक झमका हुआ। जैसे बड़ी देर से भूली बात एक दम याद आ गई। मैं धीरे से और मरे हुए लहजे में बोला “तुम्हारा मतलब तुम मेरी बीवी को चोदोगे और मैं तुम्हारी बीवी को।”
दिनेश ने खिलते हुए कहा “हाँ परमजीत भाई। जिस तरह आप मेरी क़िस्मत पर रश्क करते थे वैसे ही मैं मालिनी को देखकर आपकी क़िस्मत पर रश्क करता हूँ। तो हम दोनों कम से कम एक बार तो एक दूसरे की बीवी को चख ही सकते हैं।”
उसने बड़ी गंदी ज़बान इस्तेमाल की थी इस वक़्त लेकिन अभी ये सब सोचने का टाइम नहीं था मेरे पास। मेरे सामने तो उसकी बीवी का मस्त और नाज़ुक जिस्म नाच रहा था। मैं उसको कपड़ों के बग़ैर देखने की आरज़ू में मरा जा रहा था। लेकिन मालिनी… क्या वो मानेगी दिनेश से चुदवाने पर?
मैं बोला “दिनेश ये तो बहुत मुश्किल काम है। मालिनी इस काम पर तैयार नहीं होगी। वो मेरे सिवा किसी से नहीं चुदवाएगी।”
दोस्तों आप जानें इन लफ़्ज़ों के पीछे एक शौहर का अपनी बीवी के लिए प्यार और उस पर जो मुझे ऐतबार था वो बोल रहा था। दिनेश बोला तंज़िया से लहजे में “ये भी आप मुझ पर छोड़ दें। मैं मालिनी को तैयार कर लूँगा। और एक बात तो अभी बता दूँ वो भी आधी तैयार ही है बस आपके हाँ कहने का इंतज़ार था।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
और मेरे अंदर कोई चीज़ बड़ी आवाज़ से टूटी। ये मेरा मान था, मेरा ऐतबार था, मेरा प्यार था। लेकिन दूसरे ही लम्हे रागिनी का जिस्म मेरे सामने आ खड़ा हुआ और मैंने मालिनी की इस बेवफ़ाई पर वक़्ती पर्दा डाल दिया। अब मुझे अंदाज़ा हो रहा था उन तीनों ने पूरा प्रोग्राम पहले ही सेट किया हुआ था बस मेरे हाँ कहने का इंतज़ार था।
और मेरा जवाब अब दिनेश के पास था। वो मुझसे ये कहता रुख़सत हुआ “परमजीत भाई अब आप घर जाएँ। मैं कुछ दिनों में प्रोग्राम सेट करता हूँ फिर आपको बता दूँगा कि क्या करना है।” और मैं बेवक़ूफ़ों की तरह बैठा उसे जाते देखता रहा। क्या मेरी बीवी मालिनी दिनेश से चुदवाने को राज़ी थी? क्या यही थी उसकी मोहब्बत?
फिर मेरे मन से जवाब आया मैं भी तो उससे बेवफ़ाई कर रहा था। रागिनी के लिए अपने दिल में जाने क्या-क्या ख़यालात रखता था और उसे चोदने के प्रोग्राम बनाया करता था। मेरे दिमाग़ ने कहा मैं तो मर्द हूँ कुछ भी कर सकता हूँ। मालिनी ने मेरी बीवी होकर ऐसी हरकत की फिर मैंने सोचा अगर दिनेश मालिनी को नहीं चोदेगा तो अपनी बीवी रागिनी को क्यों चुदवाएगा।
ये तो सीधा-सीधा “गिव एंड टेक” का मामला था। एक सौदा-बाज़ी थी। अब देखना ये था कि किस का सौदा खरा था और किस का नुक़सान का। मैं घर चला आया। घर आकर देखा आज मालिनी ने ख़ास इहतमाम किया था खाने का। खूब तैयार थी। बहुत ही ख़ूबसूरत लग रही थी।
उसने घर आते ही मेरे मूड का अंदाज़ा लगाया और ये जानकर कि मैं गुस्से में नहीं अनजानी ख़ुशी से खिल उठी। मैं ये सब देख रहा था। मेरा दिल कट रहा था लेकिन क्या करूँ अपनी बदन की भूख का वो रागिनी को माँग रहा था। डिनर के बाद मालिनी मेरा मूड बनाने लगी। हमने ड्रिंक ली और बिस्तर पर आ गए।
आज मालिनी खूब बेरहमी से हमले कर रही थी। गोया एक आग सी उसके जिस्म में। और कुछ ही देर बाद मेरी मनी उसकी चूत से बह रही थी और मैं उसके बदन पर पड़ा हाँफ रहा था। मालिनी अब भी मेरे बदन से लिपटी मुझे प्यार कर रही थी। मैं कुछ ही देर बाद सो गया और नींद में ख़्वाब में रागिनी को चोदता रहा।
रागिनी का जिस्म मुझ पर हावी हो चला था। रात के न जाने किस पहर मेरी आँख खुली तो मालिनी बेड पर नहीं थी। मैं नींद से बेहाल था। मैंने बेडरूम के दरवाज़े से झाँककर देखा तो मालिनी फोन पर बात कर रही थी। मैं हैरान होता हुआ आकर दोबारा लेट गया कि मालिनी इतनी रात में किससे बात कर रही है और मालिनी का इंतज़ार करते हुए ही सो गया।
सुबह अपने टाइम पर आँख खुली। मालिनी ने नाश्ता तैयार किया हुआ था। मैंने जल्दी में नाश्ता किया और ऑफ़िस चला आया। शाम को मेरे सेल फोन पर दिनेश की कॉल आई। मैंने फोन रिसीव किया तो दिनेश ही था “परमजीत भाई मैं आपके ऑफ़िस के नीचे ही खड़ा हूँ। कब तक फ़ारिग़ हो रहे हैं?”
मैं बोला “बस कुछ देर में आता हूँ।”
मेरा काम ख़त्म हो ही गया था। मैंने पैक अप किया और लिफ़्ट से नीचे आ गया। पार्किंग में दिनेश मौजूद था। उसने मुझे अपनी गाड़ी में बिठाया और कॉफ़ी शॉप पर आ गए। कॉफ़ी का ऑर्डर दिया दिनेश ने। कॉफ़ी आने के बाद वो ख़ुशी से काँपती आवाज़ में बोला “परमजीत भाई मैंने सब सेटिंग कर ली है। मालिनी भी तैयार है। आज ही रात का प्रोग्राम है। कल ऑफ़ है तो आज रात कैसी रहेगी?”
मैं बोला “आज रात? पर करना क्या होगा?”
वो बोला “बस हम अपनी रात को यादगार बनाएँगे।”
मैं बोला “वो किस तरह?”
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दिनेश बोला “आज मेरे घर में दोनों औरतें एक दूसरे को तैयार करेंगी हमारे लिए। मेरी बीवी आपके लिए तैयार होगी और उसे आपकी बीवी तैयार करेगी और आपकी बीवी मेरे लिए तैयार होगी उसे मेरी बीवी तैयार करेगी। वो दोनों अपने सुहागरात वाली ही ड्रेस में होंगी। हम दोनों मेरे घर जाएँगे। आप मेरी बीवी के कमरे में रात बसर करेंगे और मैं आपकी बीवी के कमरे में। दोनों कमरे साथ-साथ ही हैं। कहिए कैसा लगा प्रोग्राम?”
मैं उसकी इस शैतानी और मकरूह प्रोग्राम की ख़ूबसूरती में खो सा गया। रागिनी कितनी प्यारी लगेगी दुल्हन बनकर और मैं उसकी नरम और नाज़ुक चूत में अपना लंड डालकर कितना ख़ुश हूँगा। दूसरे ही लम्हे मालिनी का ख़याल आया वो भी तो दिनेश की बाँहों में होगी। लेकिन मैंने अपने ख़यालात का रुख़ ज़बरदस्ती रागिनी की तरफ़ मोड़ दिया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं मालिनी के बारे में सोचना ही नहीं चाहता था। लेकिन कुछ था जो मुझे रोक रहा था। कोई मेरे अंदर कह रहा था मत होने दो ऐसा। लेकिन मैं उस आवाज़ पर कान देने को तैयार ही न था। मैं तो बस अपनी जिस्मानी भूख से पागल हो रहा था। शहवत से दीवाना हो रहा था।
और उस आवाज़ का गला मैंने सीने में ही घोंट दिया। और दिनेश जो कि मेरी तरफ़ सवालिया नज़रों से देख रहा था। रज़ामंदी में सिर हिला दिया। वो ख़ुशी-ख़ुशी उठकर एक तरफ़ जाकर मोबाइल पर बात करने लगा। शायद वो अपनी बीवी को या मेरी बीवी को हिदायत दे रहा था।
हम वहाँ से उठकर एक क़रीबी बार में आ बैठे और पीने लगे। मैं इसलिए पी रहा था कि अपने अंदर की आवाज़ को नशे की तरंग में दबा दूँ और दिनेश इसलिए पी रहा था कि आने वाले लम्हात में वो मेरी बीवी के जिस्म से ज़्यादा से ज़्यादा लुत्फ़ ले सके। उसकी ख़ुशी उसके चेहरे से ही ज़ाहिर थी।
न जाने मुझे क्यों ख़ुश न था। कौन सी वो चीज़ थी जो दिनेश को ख़ुश रखे हुए थी और मैं चाहने के बावजूद ख़ुशी नहीं महसूस कर रहा था। और दोस्तों बहुत बाद में मैंने जाना उस चीज़ का नाम था “मोहब्बत”। जी हाँ ये मेरी टूटी हुई मोहब्बत थी जो मुझे इस घिनौने काम से रोक रही थी।
आख़िर रात आ ही गई। दिनेश के मोबाइल का बज़र बोला। उसने बात की और मुझे इशारा करता उठ खड़ा हुआ। उसने व्हिस्की की २ बोतलें साथ ले लीं और हम घर रवाना हुए। खेल शुरू हो रहा था। एक ड्रामा प्ले होने जा रहा था। एक शो शुरू हो रहा था। मैं अपने अंदर एक खिंचाव जो बढ़ता ही जा रहा था महसूस कर रहा था।
शायद नशे का असर था या कुछ और। मैंने अपने बैग से सुकून अवर दवा निकालकर खाई। उससे तबीयत कुछ पुरसुकून हुई। कुछ ठहराव आया। इतने में घर आ चुका था। आज मैं दिनेश के घर मेहमान था और वो अपने मेहमान को अपनी बीवी पेश करने जा रहा था।
ऐसी थी उसकी मेहमानी। कभी सुनी है दोस्तों? और मज़े की बात तो ये कि उसका मेहमान यानी मैं उसकी मेहमानी के बदले अपनी सबसे क़ीमती चीज़ यानी अपनी प्यारी बीवी, अपने घर की इज़्ज़त सौंप रहा था। उसे जैसे चाहे इस्तेमाल करे आज की रात। कभी सुनी है दोस्तों ऐसी क़ीमत?
हम घर के दरवाज़े पर पहुँच गए। अंदर रोशनियाँ जल रही थीं जबकि बराबर में मेरे घर में अंधेरा था। और ऐसा ही अंधेरा और ख़ामोशी मेरे अंदर थी। और मैं नहीं जानता था कि आज रात के बाद यही अंधेरे मेरी क़िस्मत पर हमेशा के लिए छा जाने वाले थे। दिनेश ने बेल पर हाथ रखा। अंदर चहल-पहल सी नज़र आने लगी।
दिनेश ने दरवाज़े का हैंडल घुमाया तो वो लॉक नहीं था। यानी उसने बेल बजाकर ये सिग्नल दिया था कि हम आ चुके हैं। “एवरीथिंग इज़ प्लान्ड”। हम अंदर आ गए। ऊपरी मंज़िल पर दोनों बेडरूम थे बराबर-बराबर जिनमें हमारी बीवियाँ हमारा इंतज़ार कर रही थीं। लेकिन मेरी बीवी दिनेश का और दिनेश की बीवी मेरा।
दिनेश बोला “पहले नीचे वाले रूम में जाकर नहा-धोकर फ्रेश हो जाएँ। आपके कपड़े वहीं रखे हैं। मैं भी फ्रेश हो जाता हूँ।” ये कहता हुआ वो एक दूसरे कमरे में चला गया। मैं भी उसके बताए हुए कमरे में गया। बेड पर मेरे प्रेस किए हुए कपड़े रखे थे जो यक़ीनन मेरी बीवी ने रखे थे। मैंने बाथ लिया और कपड़े पहनकर वापस लाउंज में पहुँचा तो वहाँ दिनेश को अपना मुंतज़िर पाया।
वो बोला “क्या ख़याल है परमजीत भाई। चला जाएँ अब?” मैंने कहा चलो। हम सीढ़ियों की तरफ़ बढ़ गए। पहले मेरा कमरा था यानी वो जिसमें रागिनी मेरा इंतज़ार कर रही थी और उसके साथ दूसरा कमरा जहाँ मालिनी दिनेश का इंतज़ार कर रही थी दुल्हन बनी हुई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मेरा मन एक दम कोईया कि मैं अपनी बीवी के पास चला जाऊँ। उसको दुल्हन बने इस हाल में सिर्फ़ मैंने ही देखा था। उसके हसीन कोरे बदन को सबसे पहले मैंने ही हाथ लगाया था। उसको कली से फूल मैंने ही बनाया था। और आज मेरी दुल्हन बनी बीवी दिनेश की मिल्कियत थी। आज उसके जिस्म से दिनेश खेलेगा।
मैंने ये ख़यालात एक दम अपने दिमाग़ से झटके और अपने रूम में घुसता चला गया। अंदर रूम में हल्का-हल्का ठंडा अंधेरा फैला हुआ था। मुझे बेख़ुद अपनी मालिनी के साथ मनी गई सुहागरात याद आ गई जब ऐसे ही ठंडे अंधेरे में मैंने अपनी मालिनी की कोरी और अनछुई चूत पहली बार देखी थी, उसे छुआ था और आख़िर उसे ख़ून-ख़ून कर दिया था।
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वैसा ही नज़ारा था। वैसा ही कुछ बेड लगा हुआ था। चादर पर ख़ुशबूदार फूल बिखरे पड़े थे जिनकी भीनी-भीनी ख़ुशबू कमरे की फ़ज़ा को और ख़्वाबनाक बना रही थी। उसी रात की तरह बेड पर एक लड़की सिकुड़ी-सिमटी बैठी थी। घूँघट निकाले। आने वाले लम्हों की गर्मी से गर्माता जिस्म। आने वाले लम्हों की तपिश से लड़ता जिस्म। क्या मालिनी भी दिनेश के सामने ऐसे ही बैठी हुई थी?
ये ख़याल एक दम ही मेरे दिमाग़ में आया और सच जाने तरपा ही गया मुझे। बड़ी ही मुश्किल से इस मुश्किल सवाल से पीछा छुड़ा पाया मैं। और बेड पर बैठी लड़की की तरफ़ मुतवज्ज़ह किया अपने दिल-दिमाग़ को और बेड की तरफ़ बढ़ा। बेड पर बैठकर मैंने धीरे से कहा “रागिनी मेरी जान।”
अंदर से एक हल्की सी सिसकी की आवाज़ आई। मैंने आगे बढ़कर घूँघट उलट दिया और अंदर बैठी पूरी तरह तैयार रागिनी ने शरमाते हुए गुलाल होते अपना मुँह अपने हाथों से ढक लिया और कमरा उसकी हाथों पर लगी मेहंदी की महक से मुअत्तर हो गया। और बस मैं सब कुछ भूल गया।
मैं उसके गर्मागर्म और जवान जिस्म से लिपट गया। उसके जिस्म की मदहोशकुन नरमी मैंने अपने जिस्म पर महसूस की। उसके मम्मों का कसाव मैंने अपने सीने पर महसूस किया। और उसका हाथ उसके चेहरे से उठाकर उसके नरम शरीन होंठों को अपने होंठों में दबा लिया और उन्हें चूसने लगा।
उसके हाथ भी मेरे सिर के पीछे पहुँच गए। वो एक भरपूर औरत थी। वो मेरे होंठ चूस रही थी। मेरा भरपूर साथ दे रही थी। और मैं बेख़ुद हुआ जा रहा था। मैं एक-एक करके उसके कानों की बालियाँ, माथे का झुमेर, गले का हार उतारता गया और उसकी नाज़ुक जिस्म को ज़ेवरात के बोझ से मुक्ति दिलाता गया।
उसके होंठ मेरे होंठों से चिपके हुए थे और मैं उन होंठों की शहद में खोया हुआ था। मैंने उसके बाल पीछे हाथ ले जाकर खोल दिए। बालों की ख़ूबसूरत महक मेरी साँसों को महसूस करती चली गई। बाल क्या खुलते ही एक घट्टा सी आसमान पर छा गई। वो उसकी कमर तक फैलते चले गए।
बिलाशुबा बहुत ही रेशमी और मुलायम बाल थे उसके। मैं उसके बाल सहलाता रहा और उसे बिस्तर पर लिटा दिया। और धीरे-धीरे उसकी आँखों में आँखें डालते उसके मम्मे दबाने और सहलाने लगा। वो कँवारी न थी लेकिन किसी दूसरे मर्द के हाथ पहली बार उसके जिस्म की इन ऊँचाइयों को छू रहे थे।
अपने शौहर की वो आदी थी लेकिन मेरे हाथों का लम्स उसके लिए नया था। उसके मम्मे तनते जाते थे। वो मेरे हाथों के लम्स को पसंद कर रही थी। उसका अंदाज़ा रागिनी की बंद आँखों और तेज़ी से ऊपर-नीचे होते सीने को देखकर किया जा सकता था। आख़िर मैंने उसके सीने को कपड़ों की क़ैद से आज़ाद कर दिया और मेरे सामने रेड ब्रेज़ियर में लिपटा क्या ही ख़ूबसूरत नज़ारा था।
मैं तो बस उसकी ख़ूबसूरती को तकता जा रहा था। आख़िर मैंने उन्हें इस हल्की सी रेड पट्टी से भी निजात दिला दी और उसके मम्मे एक दम मेरे सामने आ गए। बिल्कुल गोल, तने हुए। जिनके निप्पल्स लाइट ब्राउन थे और बिल्कुल खड़े थे। बस कोई आए और इनको अपने मुँह में दबाकर इनका सारा रस चूस ले।
वो बिल्कुल गर्मागर्म और तैयार थे। वो मेरे होंठों का इंतज़ार कर रहे थे कि मैं कब इन तने हुए मम्मों के तने हुए निप्पल्स को अपने होंठों में दबा लूँ। और मैंने उन्हें मज़ीद इंतज़ार करना मुनासिब न समझा और बेताबी से उन्हें अपने होंठों में दबा लिया। कमरे में एक सिसकी सी गूँजी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं तेज़ी से उन्हें चूस रहा था और वो मेरे सिर के बालों को सहला रही थी। मैं उसकी कमर पर, पेट पर हाथ फेर रहा था। कुछ देर बाद मैं उठ बैठा। वो सवालिया नज़रों से मुझे देख रही थी। उसकी प्यासी आँखों में दावत थी, तलब थी, प्यास थी। मैंने अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लंड तना हुआ था। जिसे देखकर उसकी आँखों में चमक बेदार हो गई।
मैंने इस इरादे से कपड़े उतारे थे कि मैं अब अपने लंड को उसकी चूत की सैर करा दूँ लेकिन वो मेरा लंड देखते ही उठ बैठी और मेरा लंड पकड़कर उसे सहलाने लगी। मेरा लंड गर्मागर्म हो चुका था। और फिर रागिनी ने झुककर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया। और मैं सरशार हो गया।
रागिनी ने मुझे वो दे दिया था जो मेरी बीवी मालिनी कभी मुझे न दे सकी थी। जिसके लिए मैं तरसता रहा था। मैंने बेताबी से उसके सिर को मज़बूती से पकड़ लिया और उससे अपना लंड चुसवाने लगा। वो भी मस्ती में थी और बैठी हुई मेरा लंड चूसती रही।
फिर उसने अपना मुँह मेरे लंड से हटाया और टांगें खोलकर लेट गई और अपने सिर से इशारा किया। मैंने अपना लंड हाथ से सहलाता हुआ उसकी तरफ़ आया तो उसने लंड को हाथ से हटाया और मेरा मुँह पकड़कर अपनी गर्मागर्म गर्मागर्म नमकीन चूत से चिपका लिया और मैं उसकी चूत की महक में खो सा गया।
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बेशक वो काफी खुली हुई चूत थी लेकिन उसका गुलाबीपन अब तक मंद नहीं पड़ा था। उसके लब बेशक फैल चुके थे लेकिन आज भी वो चूत के गिर्द बड़ी ही ख़ूबसूरती से फैले हुए थे। मैंने उसकी चूत के गुलाबी लबों को अपने होंठों में दबा लिया और उसे चूसने लगा। उसकी चूत पानी छोड़ रही थी और मैं जवानी का वो रस पीता रहा।
मैं उसकी गर्मागर्म चूत में काफी गहराई तक अपनी ज़बान पहुँचा रहा था। वो सिसक रही थी, मचल रही थी और मैं तो जज़्बाती हुआ जा रहा था। उसकी चूत छोड़ने को तैयार ही न था। आख़िर वो ख़ुद ही लड़खड़ाती आवाज़ में बोली “बस अब चोद दो मुझे बर्दाश्त नहीं होता।” मैं उठ बैठा उसकी चूत से निकला रस अब तक मेरे होंठों पर लगा था।
मैंने उसके होंठों पर होंठ रख दिए और वो अपनी ही चूत से निकला रस चाटने लगी। नीचे मैं उसकी चूत में उँगली डालकर उसे खोलता रहा। फिर मैं उकड़ू बैठा और अगले ही लम्हे मेरा लंड उसकी चूत की गहराइयों में था और मैं उस पर सवार झटके ले रहा था। उसकी चूत काफी खुली थी।
मैं झटके मार रहा था लेकिन वो जिस तरह मुझे ख़ुद से चिपका रही थी इससे साफ़ लग रहा था वो और अंदर तक मेरा लंड लेना चाह रही थी लेकिन मेरा लंड जितना था उतना ही उसकी चूत में ग़ायब हो चुका था। अब मज़ीद गुंजाइश ही न थी। और फिर कहानी ख़त्म हुई।
उसकी चूत से मेरी मनी सफ़ेद पानी बनकर बह निकली और वो भी पुरसुकून होती गई। उसकी आँखें बंद थीं और वो मज़े से पड़ी थी। उसकी चूत से मेरी मनी भी बहकर बेड की चादर पर गिर रही थी। मैं उठा और कमरे के साथ ही ड्रेसिंग रूम की तरफ़ बढ़ा। मेरा और दिनेश का घर बराबर-बराबर था और एक ही तरह पर बना हुआ था।
मैं जानता था ऊपरी मंज़िल पर दोनों बेडरूम एक दूसरे से जुड़े हुए थे बीच में बने ड्रेसिंग रूम की वजह से। मेरा इरादा ये मालूम करने का था कि मालिनी क्या कर रही है। रागिनी तो पुरसुकून पड़ी सो रही थी। मैं ड्रेसिंग रूम में दाख़िल हुआ। उसका वो दरवाज़ा जो दिनेश के रूम में खुलता था लॉक था।
मैं एक अलमारी पर चढ़ गया और रोशनदान से अंदर झाँका और मेरी आँखें हक्का-बक्का फट गईं। मालिनी और दिनेश एक दूसरे के ऊपर पड़े थे और मालिनी दिनेश का मोटा और लंबा लंड मुँह में लिए उसे बड़ी ही रुचि से चूस रही थी। ये वही मेरी बीवी थी जिसने कभी मेरा लंड अपने शौहर का लंड अपने मुँह में न लिया था। जो बड़ी ही सफ़ाई पसंद थी।
जिसकी चूत में अगर मैं मनी छोड़ता तो कपड़े से उसे साफ़ भी ख़ुद करती थी। आज वही मालिनी मेरे सामने दिनेश का लंबा लंड अपने मुँह में लिए हुए थी। दिनेश उसके नीचे लेटा था। वो अपने मम्मे दिनेश की फैली टांगों पर रखे बड़े मज़े से उसका लंड चूस रही थी और उसकी आवाज़ें जो लुत्फ़-ओ-इनबसात में डूबी हुई थीं यहाँ से भी साफ़ सुनाई दे रही थीं।
“ऊफ़्फ़… आह्ह्ह… मेरे ग़ैराम चूसो उसे… बहुत मज़ा आ रहा है।” कुछ इसी क़िस्म के अल्फ़ाज़ थे। और दिनेश मेरी बीवी की चूत के नीचे घुसा उसकी चूत का रस चूस रहा था। ये वही रस था जो मैं हमेशा से चूसना चाहता था लेकिन कभी मालिनी ने मुझे चखने भी नहीं दिया था। और आज दिनेश के मुँह पर चूत रखे कैसे झटके ले-लेकर दबा-दबाकर चूत चुसवा रही थी।
वाह रे औरत… तुझे भला कोई समझ पाया है। मैं उन दोनों को देख रहा था। मेरा दिल अंदर से कट रहा था। मेरा दिल चाह रहा था अभी ज़मीन फटे और मैं उसमें समा जाऊँ। सिर्फ़ एक औरत का जिस्म हासिल करने के लिए जिसकी चूत इतनी खुली हुई थी। मैंने अपनी बीवी को एक ग़ैर मर्द के हाथों में खेलने को दे दिया था। कितना कमीना था मैं। ले
किन ये जो औरत मेरे सामने थी क्या ये मेरी बीवी थी? क्या बीवी ऐसी ही होती है? वो जिस तरह एक अजनबी मर्द का लंड चूस रही थी वो मेरे लिए बाइस-ए-शर्मिंदगी था। बड़ी ही बेहयाई से दोनों हँस रहे थे। एक दूसरे से सेक्सी बातें कर रहे थे। एक दूसरे के लंड और चूत से शरारतें कर रहे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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कभी मालिनी दिनेश के लंड को दाँतों से दबा लेती दिनेश तड़पता तो छोड़कर उसे प्यार करती चूसने लगती। दोनों हँसने लगते। कभी दिनेश मेरी बीवी की चूत के दोनों लब अपने दाँतों से काटता तो मालिनी ज़ोर से “ओई” करती और वो उसे ज़बान से चाटने लगता। ये हो रहा था मेरे सामने।
ये तो मैंने भी कभी अपनी बीवी से नहीं किया था। और मैं देख रहा था दिनेश के साथ मेरी बीवी बहुत ख़ुश थी। उसका लंड बहुत ही प्यार से चूस रही थी। जब वो मेरे साथ होती थी तो बस हम चुदाई करते और ख़ामोशी से करवट बदलकर सो जाते लेकिन यहाँ तो ऐसा लग रहा था दो प्रेमी न जाने कब के बिछड़े मिले हों और वो प्यार के खेल खेल रहे हों।
दोनों अब एक दूसरे से लिपटकर एक दूसरे का जिस्म चूम रहे थे। दिनेश कभी झुककर मेरी बीवी के मम्मे दबा लेता और चूसने लगता। मालिनी के मम्मे उसकी बीवी से छोटे थे लेकिन बेहद तने हुए और ऊपर की तरफ़ उठे हुए थे। दिनेश का लंड मेरे लंड से काफी लंबा था। मेरा अंदाज़ा है ८ इंच का तो होगा।
इतना लंबा लंड देखकर मुझे तो झुरझुरी आ गई। ये मेरी बीवी की चूत का क्या हाल करेगा लेकिन मालिनी तो फिदा हो रही थी उसके लंड पर। आख़िर उसने मेरी बीवी के पीछे आकर उसके हाथ पकड़कर उसके पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया और मालिनी का मुँह एक लम्हे के लिए तकलीफ़ से और दूसरे ही लम्हे लुत्फ़ उसके चेहरे से छलकने लगा।
वो खूब मज़े से चुदवा रही थी। कुछ देर बाद दिनेश ने उसका हाथ छोड़ा तो वो घोड़ी बन गई। दिनेश उसे पीछे से चोदता रहा और मालिनी की आवाज़ें गूँजती रहीं। अब दिनेश ने राजन को खड़ा किया और खड़े-खड़े ही चोदने लगा। इस तरह तक़रीबन एक घंटा वो मेरी बीवी की चूत चोदता रहा और मालिनी इस दौरान लतीफ़ाद बार अपनी मनी छोड़ चुकी थी।
मेरी बीवी थी मैं उसकी हालत देखकर ही अंदाज़ा कर सकता था कि वो कब अपनी मनी छोड़ रही है। इस दौरान वो पूरा लंड अपनी चूत में लेकर दिनेश से चिपक जाती थी लेकिन दिनेश उसे छोड़ने के मूड में न था। आख़िर दिनेश ने उसे सीधा लिटाया और ख़ुद उसके मम्मे दबा-दबाकर चोदने लगा.
और एक ज़बरदस्त झटके से दिनेश की मनी मुझे मेरी बीवी की चूत की झिरियों से टपकती नज़र आई क्योंकि दिनेश ने अपना लंड मेरी बीवी की चूत से निकाला न था इसलिए मनी बहुत ही मामूली बाहर आई थी। और जब उसने अपना लंड बाहर निकाला तो मैंने देखा अब उसकी चूत में सिर्फ़ दिनेश की मनी की बक़ाया है।
सारी मनी मालिनी की चूत में ग़ायब हो चुकी थी। न जाने कब की भूखी चूत थी मेरी बीवी की। वो दोनों न जाने किस बात पर हँस रहे थे और एक दूसरे को चूम रहे थे। दोनों बहुत ख़ुश लग रहे थे। मेरी बीवी जिन हाथों से मुझे खाना खिलाया करती थी, मेरे सिर के बाल सहलाया करती थी आज उन ही हाथों से दिनेश के बालों भरे सीने पर मसाज कर रही थी।
उसका लंड पकड़कर मुँह में ले रही थी। मेरी सफ़ाई पसंद बीवी जिसकी चूत में बहती अपनी मनी मुझे ख़ुद साफ़ करनी पड़ती थी आज मेरे सामने अपनी चूत में लगी दिनेश की मनी उँगली से निकालकर चाट रही थी और तारीफ़ कर रही थी। मैं और नहीं देख सका और वापस रूम में चला आया। वहाँ रागिनी कपड़ों से बेनियाज़ अब तक टांगें खोले बेसुध पड़ी सो रही थी।
उसकी चूत से मेरी मनी भी सूख हो चुकी थी। मुझे इस औरत से नफ़रत सी महसूस हुई। इस औरत के जिस्म हासिल करने के लिए मैंने अपनी मालिनी को शायद सारी ज़िंदगी के लिए खो दिया था। मैं अभी देख ही रहा था मुझे मालिनी की हल्की सी आवाज़ें सुनाई दीं। मैं वापस ड्रेसिंग रूम में आया।
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अलमारी पर चढ़ा और अंदर झाँका तो दिनेश मेरी बीवी की गाँड चोद रहा था। मैं भी उसकी गाँड मारा करता था लेकिन कहाँ मेरा ६ इंच लंबा लंड और कहाँ दिनेश का ८ इंच लंबा और मोटा लंड। मालिनी की हालत बुरी थी और आख़िर दिनेश एक बार फिर मेरी बीवी की गाँड में मनी भरने लगा।
मनी निकलते देख मेरी बीवी जल्दी से सीधी लेट गई और दिनेश उसकी गाँड से लंड को निकालकर उसके सीने पर बैठ गया। उसने लंड अपने सीने के बीच दबा लिया और मनी का एक-एक क़तरा चाट-चाटकर साफ़ करने लगी। और मैं बस वापस उतर आया।
रूम में आकर मैं रागिनी के बराबर में ही लेट गया। सुकून के लिए रूम में और कोई जगह ही नहीं थी और फिर न जाने कब सो गया। मालिनी और दिनेश न जाने कब तक एक दूसरे से खेलते रहे। मैं सोता रहा और उधर मेरी बीवी अपने अरमान पूरे करती रही, चुदती रही और मैं सोता रहा।
अगली सुबह आम सुबह जैसी ही थी लेकिन मेरा सब कुछ ख़त्म हो चुका था। मैं अपनी दुनिया लुट चुका था। रागिनी का जिस्म हासिल करने की मुझे कोई ख़ुशी न थी। उसका जिस्म वैसा ही था जैसा एक आम रंडी का होता है। कोई ख़ास बात न थी। ख़ास बात तो बीवी में होती है जिसके पास इंसान के लिए सुकून होता है लेकिन मैंने अपनी बीवी को भी रंडी बना दिया था।
क्या अब वो कभी मुझे सुकून दे सकती थी? क्या मैं अब कभी उसे बीवी के रूप में क़बूल कर सकता था? ऐसे ही बहुत से सवाल लिए वो सुबह तुलू हुई। बहुत ही ज़हरीली सुबह थी वो। नाश्ते की मेज़ पर सब ही मौजूद थे। गंदे मज़ाक़ किए जा रहे थे। रागिनी सबको बता रही थी मैं तो उससे चोदकर सो गया था।
दिनेश मेरी बीवी के जिस्म से छेड़-छाड़ कर रहा था। उससे गंदे मज़ाक़ कर रहा था। और मालिनी भी खिली-खिली नज़र आ रही थी। सब ख़ुश थे। मैं भी उनके साथ हँस रहा था लेकिन अंदर से मेरा दिल ख़ून के आँसू रो रहा था। मैं अपने ऑफ़िस चला आया और सबसे पहले मैंने दो टिकट लिए अमृतसर के। अपना और मालिनी का। रात ही की फ़्लाइट थी। घर आया।
मालिनी अब तक दिनेश के घर थी। न जाने क्या कर रही थी। अब तक उसकी चूत की गर्मी निकली न थी। मैंने अपना और मालिनी का मुक्तसर सा सामान पैक किया और मालिनी के वापसी का इंतज़ार करने लगा। वो ६ बजे वापस आई और मुझे घर में देखकर हैरान रह गई और शिकायत करने लगी कि आप आ गए थे तो बुला लिया होता मुझे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैं क्या कहता उससे। वो सामान पैक देखकर हैरान रह गई। पूछने लगी कौन जा रहा है, हम कहाँ जा रहे हैं। मैंने उसे बताया मुझे ज़रूरी काम से वापस जाना पड़ रहा है। वापस अमृतसर कुछ दिनों में लौट आएँगे हम। उसने लाख चाहा कि दिनेश को बता दे। मैंने मन किया और उसी रात हम वापस इंडिया आ गए। मैं फिर कभी यूएई नहीं गया और न ही मालिनी। मैंने अमृतसर में ही एक जनरल स्टोर खोल लिया।
९ महीने बाद मालिनी ने एक ख़ूबसूरत से लड़के को जन्म दिया जिसका नाम मैंने किशोर रखा और दोस्तों आप समझ ही गए होंगे वो किसका बच्चा था। वो हो-ब-हू अपने बाप दिनेश पर गया था। मेरे ख़ानदान के सब लोग बहुत ख़ुश थे। मेरा वारिस आ गया। अब मैं क्या कहता। मैं इस बच्चे को जो दिनेश की उस दिन छोड़ी गई मनी का नतीजा था बहुत प्यार करता हूँ क्योंकि इन सारे वाक़ियात में इस मासूम का कोई क़सूर न था।
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क़सूर तो मेरा था, मालिनी का था, हमारी हवस का था। मालिनी से उस दिन के बाद मैंने कभी बात नहीं की। न ही कभी उसके साथ सोया। ख़ुद पर भी औरत का जिस्म हराम कर लिया। ये मेरी तजवीज़ की गई सज़ा थी जो मालिनी और मुझे भुगतनी थी। और क़ुदरत की एक सज़ा तो किशोर के रूप में हर दम हमारे सामने थी और आगे न जाने कितनी सज़ाएँ मुंतज़िर थीं। दोस्तों मैंने अपनी ज़िंदगी में आने वाले तूफ़ान के बारे में आपको सब बता दिया। कुछ नहीं छुपाया। मैंने जो महसूस किया वो लिख दिया।
आप अगर सोचते हैं वाइफ़ स्वैपिंग के बारे में तो बाज़ आ जाएँ। आपमें हिम्मत है किसी दिनेश का बच्चा पालने की तो अपनी बीवी की सिसकियाँ सुनने की, अपनी बीवी की चूत में लुब-लुबाती मनी देखने की, अपनी बीवी का जिस्म किसी और मर्द की बाँहों में देखने की तो ज़रूर कोशिश कर लीजिए और अगर नहीं तो अभी वक़्त की रेत आपके हाथों से नहीं फिसली है। उसको रोक दें। तूफ़ान को दावत न दें। अपने घर की इज़्ज़त को सर-ए-बाज़ार मत लेकर जाएँ। बस इतना ही कहना था मुझे। एक बार सोचिएगा ज़रूर इस बारे में।
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