xnxx शादी में देवर ने भाभी की चूत चोद कर मज़ा दिया
sex story शादी में देवर ने भाभी की चूत चोद कर मज़ा दिया
Sshadi me devar bhabhi chudai sex story: मेरा नाम नुपुर है, और मैं एक मध्यवयस्क शादीशुदा महिला हूं। मेरी उम्र 34 साल है। मेरा पति मेरे साथ ही रहता है। हमारा एक फ्लैट है बोरीवली में।
मेरे रिश्ते में एक शादी थी। कुछ दिन पहले हमारे रिश्तेदारों की शादी में हम सभी गए थे। वहां बहुत सारे रिश्तेदार आए हुए थे। मैं भी पूरे उत्साह के साथ इसमें शामिल हुई थी। मेरे रिश्ते का एक देवर शिशिर खूब जवान और बेहद खूबसूरत था। उससे मेरी खूब ठिठोली और मजाक हुआ करता था। वो भी वहां आया हुआ था।
वो बड़ा गठीला बदन वाला था। उसकी चौड़ी छाती, मोटी भुजाएं, भरी हुई ऊंचाई, कातिलाना हंसी और कुल मिलाकर सजीला गबरू जवान वाला व्यक्तित्व मुझे बार-बार अपनी ओर खींचता था। मैं महसूस कर रही थी कि वो भी मुझ पर नजर रखता था। कई बार वो मुझे जाने-अनजाने में छूने और लिपटने की कोशिश करता था। उसकी इन गर्म सांसों वाली कोशिशों से मेरा दिल भी उस पर पूरी तरह बेईमान हो चुका था।
उस दिन उसने मुझसे कहा, “आप सेक्सी लग रही हो..!” तो मेरा चेहरा खिल उठा। मेरे गालों पर लालिमा छा गई और अंदर ही अंदर एक गर्म लहर दौड़ गई। फिर हम तैयार होने अपने-अपने कमरे में चले गए। मेरा और उसका कमरा आमने-सामने था। जब हम पार्टी में जा रहे थे तो संयोगवश लिफ्ट में हम दोनों अकेले ही थे।
उसने मौका देखकर सामने लगे शीशे में देखा और बोला, “आज तो सिर्फ तुम्हीं तुम दिख रही हो..!” और यह कहते हुए उसने मेरे गाल को अपनी मजबूत उंगलियों से धीरे से दबा दिया। उसकी उंगलियों की गर्मी मेरी नरम त्वचा में समा गई। मैं कुछ नहीं बोली। बस अंदर ही अंदर मचल कर रह गई। मेरी सांसें तेज हो गई थीं और चूत में हल्की सी नमी महसूस होने लगी थी। और फिर हम लोग शादी के कार्यक्रम में शामिल हो गए।
उस रात उसने मुझसे खूब मजाक किया और मैंने भी उसके हर मजाक का पूरा आनंद लिया। अगले दिन सुबह जब वो नहाने के लिए जा रहा था तो मेरे सामने आते ही उसका चेहरा और शरीर खिल उठा था। मैंने उसकी पैंट की तरफ देखा तो उसमें उसका लिंग पूरी तरह तन गया था। कपड़े के ऊपर से भी उसकी मोटाई और लंबाई साफ दिख रही थी। वह बड़ा, खूबसूरत और आकर्षक लग रहा था।
मेरी चूत तो उसे देखते ही पनिया गई थी। गर्म और चिपचिपा रस अंदर से बहने लगा था। मेरी सांसें भारी हो गईं। कुछ भी करके अब मुझे उससे चुदना ही था। मैं तरकीबें सोचने लगी। मैंने उसकी तरफ आंख मारी और उसके लंड की तरफ इशारा किया। एक बार तो वो शरमा गया। फिर धीरे से मेरे पास आकर मेरे गाल के बिल्कुल नजदीक आ गया। उसकी गर्म सांस मेरे कान को छू रही थी। उसने धीरे से कान में कहा, “कैसा लगा..? अच्छा है ना..! पसंद है..?”
मैं भी शरमा कर भाग गई। मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था और चेहरे पर गर्मी महसूस हो रही थी। अब मेरा चुदना लगभग तय था। अब मेरी बारी थी। मैंने सोच लिया कि अब मैं भी उसे कुछ दिखाऊं। जैसे ही वो नहाकर निकला, मैं बाथरूम में घुसी और धीरे से उससे कहा, “यहीं बाहर ही रुकना, कुछ दिखाना है।”
उसने कहा, “ओके..!” मैं बाथरूम से नहाकर बिना ब्रा के गीला टॉप पहनकर बाहर आ गई। मेरा गीला टॉप मेरे स्तनों से चिपक गया था। मेरे कठोर निप्पल कपड़े के ऊपर से साफ उभर रहे थे। उसका मुंह तो जैसे खुला का खुला रह गया। उसकी नजरें मेरे भीगे स्तनों पर अटक गई थीं। मैं मुस्कराई और उसके पास जाकर उसके कान में बोली, “मुंह बंद कर लो राजा.. अभी मुंह में नहीं दे रही हूं..!”
यह कहकर मैं हंसकर कमरे में भाग गई। जाते-जाते बोली, “पांच मिनट बाद कमरे में आओ तो, कुछ और देख पाओगे..!” उसका मुंह फिर खुला सा रह गया। अब इस खेल में मुझे खूब मजा आ रहा था।
मैं कमरे में आ गई थी। मैंने गीला टॉप उतारकर बदन पोंछा, पेटीकोट और साड़ी पहन ली। ऊपर ब्रा तो पहन ली लेकिन ब्लाउज नहीं पहना। थोड़ी देर में बेसब्रे देवर जी कमरे में आए। मैंने एक चूची नंगी करके उन्हें दिखाई। मेरा भरा हुआ, गुलाबी निप्पल वाला स्तन उनके सामने झलका और फिर मैंने उसे ढक दिया।
देवर जी बोले, “कुछ और दिखाओ न भाभी..! चलो दोनों दिखाओ ना..!” मैंने कह दिया, “बस अब आप जाओ..!” वो लंड सहलाते हुए चले गए। उनको भी अब कुछ और करना होगा, ऐसा शायद वो सोच रहे हों।
अगले दिन जब सब मेहमान चले गए थे और कुछ ही रह गए थे। मैं सुबह उठकर कमरे से बाहर आई तो मैंने मिडी पहनी हुई थी। आज मुझे मस्ती कुछ ज्यादा ही चढ़ रही थी। सो मैंने शिशिर को देखते हुए एक कातिल अंगड़ाई ली। मेरी कमर झुक गई, छाती आगे निकल आई और मिडी का ऊपरी हिस्सा खिंच गया।
शिशिर ने भी पौना-जीन्स पहनी हुई थी। मेरे अंगड़ाई लेते ही उसका लंड तन गया था। उसने चड्डी नहीं पहनी हुई थी, सो उसका मोटा टोपा पैंट से साफ उभरा हुआ दिख रहा था। बड़ा शानदार, मोटा और लंबा लंड था। मुझे उस पर बड़ा प्यार आ रहा था।
मुझे खतरनाक शैतानी सूझी। मेरे शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गई और मेरी चूत में फिर से नमी उभरने लगी। मैं धीरे से उसके बेहद नजदीक चली गई। मेरी सांसें तेज हो रही थीं। मैंने अपनी नरम उंगलियों को बढ़ाया और अपने अंगूठे तथा दो उंगलियों के बीच में उसके पैंट से उभरे हुए मोटे लंड के टोपे को पकड़ लिया।
उसके टोपे की गर्मी और मोटाई मेरी उंगलियों में महसूस होते ही मेरी चूत सिकुड़ गई। मैंने उसे धीरे से मसला। पहले हल्के दबाव से, फिर थोड़ा जोर लगाकर। उसके लंड का टोपा मेरी उंगलियों के बीच नरम और गर्म महसूस हो रहा था। मैंने दो-तीन बार उसे अच्छी तरह मसल डाला। हर मसलने पर उसका लंड और सख्त होता जा रहा था।
शिशिर भैया ‘सी..सी’ कर के सीत्कार कर उठे। उनकी आवाज में दर्द और मस्ती दोनों थे। उनका शरीर एक झटके से कांप गया। उनकी सांसें रुक सी गईं और चेहरा लाल हो गया।
मैंने धीरे से कहा कुछ देखना हो तो पांच मिनट बाद कमरे में आओ। मेरी आवाज में शरारत और छेड़छाड़ भरी हुई थी। मेरे लंड के टोपे को पकड़ कर मसलने से देवर जी समझ गए कि मामला फिट है। उनके चेहरे पर खुशी और उत्तेजना साफ दिख रही थी। उनकी आंखें चमक उठीं और लंड पहले से भी ज्यादा तन गया।
मैं कमरे में आई और मिडी उतार दी। नीचे सिर्फ पैन्टी थी। ब्रा पहनी नहीं थी। सो दोनों कबूतर उछल कर बाहर निकल आए। मेरे बड़े-बड़े, भरे हुए स्तन हवा में आजाद होकर हल्के से उछल रहे थे। उनके गुलाबी निप्पल सख्त होकर खड़े हो गए थे। बड़े प्यारे लग रहे थे। सो मैं भी ऐसे ही लेट गई। अब सिर्फ पैन्टी मेरे शरीर पर थी। बाकी मैं पूरी तरह नंगी थी। मेरी चूत पर पैन्टी का पतला कपड़ा चिपका हुआ था और उसमें नमी के धब्बे बनने लगे थे। अब क्या.. सिर्फ इंतज़ार था।
देवर जी कमरे में आए। मुझे इस हालत में देखते ही उनकी लार टपक पड़ी। उनकी नजरें मेरे नंगे स्तनों पर अटक गईं। उन्होंने अपनी जीभ से होंठ चाटे। उनकी सांसें भारी हो गईं।
मैंने कहा कल यही देखना चाहते थे न… आप..! लो देख लो, पर खबरदार… नज़दीक मत आना और कुछ करना नहीं.. भाभी हूँ आपकी..! खेल अब खतरनाक हो गया था। कुछ करना बहुत जरूरी हो गया था। मेरी चूत अब पूरी तरह भीग चुकी थी।
मैंने अपने पति सुनील से कहा मैं आज अपने घर पर कुछ काम करना चाहती हूँ। टाइम लगेगा सो आप मेरे साथ चलो। उसने कहा तुम ऑटो से चली जाओ, मुझे आज ऑफिस में अर्जेंट मीटिंग है। मैं तो उल्टा आज देर से आ पाऊँगा।
मैंने कहा मुझसे अकेले नहीं हो पाएगा.. ऊपर टांड से कुछ सामान उतारना है। सुनील ने कहा तो ऐसा करो.. शिशिर को ले जाओ, वो फ्री ही है।
पर उससे मैं नहीं कहूँगी.. आप कहो तो शायद वो मान जाए, पर आप कह देना कि वहाँ कुछ टाइम लगेगा, सो वापस मुझे साथ लेकर ही आए। मैंने ये इसलिए कहा था कि किसी को कुछ शक नहीं हो, इसलिये सुनील से कहलवाया।
अधिकतर मेहमान चले गए थे और कुछ रह गए थे। मैं, माँ, आंटी और कुछ रिश्तेदार बैठ कर बातें कर रहे थे। तभी मेरे पति आए और उससे बोले शिशिर जरा अपनी भाभी को घर ले जा, उसे कुछ काम है।
फिर हम दोनों हमारे घर आ गए। घर आ गया, उस समय घर में मैं और शिशिर ही थे। शिशिर ने आते ही घर का दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया था। उसने मेरे पीछे आकर मुझे पकड़ लिया। शिशिर मुझे चूमने की कोशिश करने लगा।
शिशिर ने मुझे बिस्तर पर गिरा दिया और मेरे ऊपर आ गया और मुझे प्यार करने लगा। जैसे-तैसे मैंने उसे हटाया और कहा हटो, मैं चाय बना कर लाती हूँ।
मैं उठकर चाय बनाने चली गई और वो मेरे पति के कंप्यूटर पर जा कर बैठ गया। कंप्यूटर पर नेट ऑन किया और मेल चैक करने लगा और साथ-साथ उसमें पोर्न साईट सर्च कर रहा था, तभी मैं चाय लेकर चुपचाप उसके पीछे खड़ी होकर देखने लगी।
वो भी हॉट सेक्सी सीन्स का मज़ा ले रहा था। अचानक उसने देखा तो मैं पीछे थी, वो जैसे ही हड़बड़ी में पीछे घूमा, मैं चाय लेकर खड़ी थी, तो पूरी ट्रे मुझ पर ही उलट गई। चाय बहुत गर्म थी, तेज़ी से जलन हुई, मैं भाग कर जल्दी से बाथरूम में जाकर पानी से धोने के लिए चली गई। चाय बहुत गर्म थी।
मैं चाय लेकर चुपचाप उसके पीछे खड़ी होकर देखने लगी। वो भी हॉट सेक्सी सीन्स का मज़ा ले रहा था।
अचानक उसने देखा तो मैं पीछे थी, वो जैसे ही हड़बड़ी में पीछे घूमा, मैं चाय लेकर खड़ी थी, तो पूरी ट्रे मुझ पर ही उलट गई। चाय बहुत गर्म थी, तेज़ी से जलन हुई तो मैं भाग कर जल्दी से बाथरूम में जाकर पानी से धोने के लिए चली गई। चाय बहुत गर्म थी।
अब आगे की कहानी आप शिशिर के शब्दों में सुनिए।
दोस्तों मैं 23 साल का जवान लड़का हूँ। मेरा लंड 6 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है और मेरी हाइट 5’ 11” इंच है। मैं एक स्मार्ट लड़का हूँ। मेरा रंग गोरा है। आज मैं आपको अपने पहले सेक्स अनुभव के बारे में बता रहा हूँ।
भाभी जल्दी से बाथरूम में जाकर पानी से धोने के लिए चली गई। चाय बहुत गर्म थी। उनकी चीख सुनकर मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था। वो जल्दी से बाथरूम में गई और शावर ही खोल दिया ताकि जल्दी ठंडे पानी से आराम मिले। ठंडे पानी की तेज धार उनके शरीर पर गिरने लगी। दरवाज़ा खुला ही था।
मैंने कहा पानी तेज़ चला लो और तुम्हें कहीं जलन तो नहीं हो रही है, जल्दी से कपड़े बदल डालो। यह कहते हुए मैं बाथरूम के पास चला गया और देखा तो भीगे कपड़ों में वो बेहद खूबसूरत लग रही थी। उनका गीला ब्लाउज उनके 38 साइज के भरे हुए स्तनों से पूरी तरह चिपक गया था। ब्रा के अंदर से उनके मोटे, गुलाबी निप्पल साफ उभरकर दिख रहे थे। स्तन बाहर आने को आतुर हो रहे थे। साड़ी का पल्लू पूरा नीचे गिर गया था और उनकी गीली पेटीकोट उनकी जांघों और गोल चूतड़ों से लिपटी हुई थी।
वो बोलीं जरा मेरी मदद कीजिए.. जरा अलमारी से तौलिया ला दीजिए। मैं तौलिया निकालने गया।
इसी बीच भाभी ने अपनी साड़ी उतार दी थी। ब्लाउज भी खोल दिया था। अब वो अपनी ब्रा खोलने की कोशिश कर रही थी लेकिन वो हुक खुल नहीं रहा था। उनके नंगे पीठ और कमर की नरम त्वचा पानी से चमक रही थी।
मैंने उनको तौलिया पकड़ा दिया। उन्होंने उसे हाथ में लेकर हेंगर पर टांगा और अपने ब्रा के हुक को खोलने की कोशिश करने लगी।
मैंने बाहर से कहा मैं हेल्प करूँ..! वो बोलीं हाँ हाँ जल्दी खोल दीजिए न.. चाय गर्म थी ना..!
वो दरवाजे की तरफ पीठ कर के खड़ी हो गई। मैंने ब्रा का हुक खोल दिया। ब्रा के खुले होते ही उनके भारी, दूध जैसे स्तन आजाद होकर झूलने लगे। मैंने अपनी गर्म हथेली उनकी नंगी कमर पर फेरते हुए कहा कहीं जलन तो नहीं हो रही..!
मैं बड़े प्यार से कमर पर हाथ चला रहा था। बोला ठंडे पानी को बदन पर डालो..! फिर मैंने शावर चला दिया। शावर के नीचे उनके स्तन बहुत ही सेक्सी लग रहे थे। पानी की धार उनके बड़े-बड़े स्तनों पर गिर रही थी। उनके स्तन उठे हुए थे और निप्पल पूरी तरह सख्त होकर खड़े हो गए थे। उनको देख कर मेरे लंड में पूरी मस्ती आ रही थी। मेरा लंड पैंट के अंदर पागलों की तरह तन गया था।
मैं भी भीग गया। ठंडा पानी मेरे कपड़ों से होकर मेरी त्वचा तक पहुंच रहा था।
फिर वो बोलीं देवर जी, आप भी भीग गए हो.. जल्दी कपड़े उतार लीजिए..!
मैंने ‘फट’ से सारे कपड़े उतार दिए।
मेरा लंड पूरा टाइट होकर खड़ा हो गया था। अंडरवियर में लंड खूब तना हुआ था। उसकी मोटाई और लंबाई के कारण अंडरवियर का कपड़ा बहुत खिंच गया था और लंड का टोपा साफ उभरकर दिख रहा था। भाभी ने भी गौर किया था। उनकी नजर मेरे तने हुए लंड पर अटक गई थी। पर उनको शायद कोई एतराज़ नहीं था। उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक आ गई थी।
मैंने फिर धीरे से उनके गीले बाल गर्दन पर से हटाए। मेरी उंगलियां उनकी नरम, गीली त्वचा को छूते ही एक करंट सा दौड़ गया। मैंने कहा भाभी, जरा सामने घूमो कहीं यहाँ जलन तो नहीं हो रही है।
सामने घूमने पर उनके खरबूजे बहुत मस्त लग रहे थे। पानी की धार उनके बड़े-बड़े, भारी स्तनों पर गिर रही थी। उनके गुलाबी निप्पल पूरी तरह सख्त होकर खड़े थे और पानी की बूंदें उन पर से फिसल रही थीं। मैंने दोनों हाथों से उनको प्यार से सहलाया। मेरी हथेलियां उनके नरम, गर्म और भरे हुए स्तनों को अच्छी तरह छू रही थीं। मैंने कहा इन पर थोड़ा पानी और डालो।
उसके मस्त मम्मे सहलाते हुए मैंने पूछा कहीं जलन तो नहीं हो रही? ठीक से पानी पैरों पर और जांघों पर भी डालो.. वहाँ भी चाय गिरी है। यह कहते हुए मैंने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। पेटीकोट ढीला होते ही उनकी जांघों पर गिर गया। फिर भाभी ने जल्दी से पेटीकोट उतार दिया और फिर पानी डालने में लगीं। अब वो सिर्फ पतली पैन्टी में थीं।
मैंने कहा इधर कहीं जलन तो नहीं हो रही..! यह कहते हुए मैंने पूरी जाँघों पर, टांगों पर और उसकी चूत पर और चूतड़ों-गांड पर खूब हाथ मला। जैसे कि मैं धोने में मदद कर रहा होऊँ। मेरी उंगलियां उनकी नरम जांघों को सहलाती हुई ऊपर चढ़ीं। मैंने उनकी गोल, मोटी गांड को दोनों हाथों से दबाया। फिर अपनी उंगलियों को उनकी पैन्टी के ऊपर से चूत की दरार पर फेरा। गीली पैन्टी में से उनकी चूत की गर्मी और नमी मेरी उंगलियों को महसूस हो रही थी।
मैंने कहा कहीं जलन हो रही हो तो क्रीम लगा दूँ..! बोलीं नहीं, अब ठीक लग रहा है।
मैंने कहा पर अब जलन मेरे बदन पर शुरू हो गई है। बड़ी मदमस्त लग रही थी वो, और मुझसे रहा नहीं जा रहा था। अब मैं क्या करूँ कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरे लंड में तेज दर्द जैसी उत्तेजना हो रही थी।
मैं भाभी की कमर पर हाथ फेरने लगा और बोला मेरी जान, तुम तो इतनी सेक्सी हो मैंने कभी सोचा नहीं था। पीछे से भाभी का बदन बहुत सेक्सी लग रहा था। उनका फिगर का साइज़ 38-30-38 था। उनकी कमर पतली और गांड भारी थी।
“आज तो मुझे गिफ्ट चाहिए..!” यह बोलकर झट से मैंने पहले उनका हाथ उठाकर चूमा और फिर उनके लबों को चूम लिया। उनके नरम, गर्म होंठ मेरे मुंह में आ गए। मैंने जोर से किस किया।
वो बोलीं क्या कर रहे हो? उनकी आवाज में हल्का विरोध था लेकिन सांसें तेज हो रही थीं।
मैंने कहा मस्ती और क्या..! फिर थोड़ा सा आगे पैर दबाया और उनके पास सट कर खड़ा हो गया। मेरे तना हुआ लंड उनकी पेट के पास दब गया। मैंने उनके बालों को हटाते हुए एक हाथ को कमर पर और दूसरे हाथ को उनके स्तन के ऊपर रखते हुए उनको अपनी तरफ खींच लिया।
और उनसे बोला जब से मैंने आपके भीगे हुए बदन को देखा है, मेरे मन में आग सी लगी है। मैं बेचैन हो गया हूँ। आज मैं अपनी हर कामना को पूरा करना चाहता हूँ।
अब मैं उनके बड़े बड़े स्तनों को दबाने लगा। मेरी उंगलियां उनके नरम मांस में धंस गईं। पहले कुछ देर तक तो वो विरोध करती रहीं लेकिन थोड़ी देर के बाद मैंने देखा कि वो “उम् आह..” की आवाजें निकालने लगीं और फिर “स्स्स्स आह उम्” की मस्ती भरी एक अजीब से आवाज़ निकलने लगी।
वो हालांकि उस वक्त भी यह दिखाने की पूरी कोशिश कर रही थीं कि वो वैसा नहीं चाहती है, लेकिन उन्हें मज़ा आने लगा था। उनके शरीर में झुरझुरी सी दौड़ रही थी।
मैं उनके स्तनों को जोरों से दबाने लगा और फिर जीभ से चाटने लगा और बोला इससे सारी जलन मिट जाएगी..! और चारों तरफ जीभ फेरने लगा। अहह.. क्या लग रही थी..!
मैं उनके स्तनों पर टंके हुए सेक्सी निप्पलों को चूस रहा था। मैंने एक निप्पल को मुंह में ले लिया और जोर से चूसा। फिर दूसरे को। फिर मैंने उनके स्तनों को अपने हाथों में भर लिया और उनको दबाने लगा। स्तन इतने बड़े थे कि मुश्किल से हाथ में आ रहे थे।
मैं अपने भाग्य को सराह रहा था कि आखिर आज मेरे लंड को चुदाई का मौका मिल ही गया…
मैंने उनके मुँह में मुँह डाला और उन्हें पागलों की तरह चूमने लगा। मेरी जीभ उनके गर्म, नरम होंठों को अलग करके अंदर घुस गई। मैं उनकी जीभ को अपनी जीभ से लपेटकर जोर-जोर से चूसने लगा। हम दोनों की लार एक-दूसरे के मुंह में मिल रही थी। गीली, गर्म चुभन वाली आवाजें निकल रही थीं।
वो भी जोश में आ गई थी। मैं उनके स्तनों को अपने मुँह में भरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वो इतने बड़े और भरे हुए थे कि यह नामुमकिन था। मैं एक-एक करके दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों में उठाकर मसल रहा था और निप्पलों को बारी-बारी से मुंह में लेकर जोर से चूस रहा था।
वो उधर सिसकरियाँ भर रही थी- अम्म… आह्ह्ह्ह क्या कर रहे हैं आप अह उम्म्म..! उनकी आवाज में दर्द और मस्ती दोनों थी। उनका शरीर बार-बार कांप उठता था।
मैं भी जोश में आ गया। भाभी भी स्तन को हाथ लगाने लगी। उन्होंने अपने एक हाथ से अपना ही स्तन दबाया और दूसरे हाथ से मेरे बाल पकड़कर मेरे मुंह को अपने निप्पल पर और जोर से दबाया। उनके मन में भी अब सेक्स की इच्छा प्रबल हो उठी थी शायद…! उनकी सांसें फूल रही थीं और चेहरे पर गहरी लालिमा छा गई थी।
मैंने अपना अंडरवियर भी उतार दिया। मेरा लंड पूरी मस्ती से खड़ा था। उसकी नसें फूली हुई थीं। लंड का टोपा चमक रहा था और उसमें से पारदर्शी रस की एक बूंद निकलकर लटक गई थी।
वो देखकर बोलीं शिशिर यह तो बहुत ही बड़ा है मैं नहीं झेल सकती.. कितना लम्बा और मोटा है। तुम्हारे भैया का 5 इंच से ज्यादा नहीं होगा पर तुम्हारा तो.. ओफ्फ्फ्फ़… बताओ तो सही क्या साइज़ है..! उनकी आंखें फैल गई थीं और नजर लंड से हट नहीं रही थी।
मैं बोला ज्यादा नहीं यही कोई 6 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है और अब तुम डरो नहीं मेरा वादा है कि जब यह तुम्हारी चूत में एक बार पूरा जाएगा, तब तुम खुद ही बोलोगी कि प्लीज शिशिर पूरा डाल कर चोदो मुझे, ट्रस्ट मी जरा इसको अपने प्यारे हाथों में लेकर थोड़ा प्यार करो।
अब मैंने उनको अपने बांहों में उठा लिया। उनकी नंगी, गीली देह मेरे सीने से सट गई। मैं उन्हें ले जाकर बेड पर लिटा दिया और उन्हें चूमने लगा।
वो बोलीं चूमा-चाटी में ही टाइम ख़राब करोगे या कुछ आगे भी करोगे? उनकी आवाज में अब साफ़ बेचैनी और इच्छा थी।
मैं उनके दोनों स्तनों के चूचकों को चूसने लगा था। मैं एक निप्पल को मुंह में भरकर जोर से चूसता तो दूसरा निप्पल अपनी उंगलियों से मसलता। वो जोर-जोर से, “आह…हह.. और जोर से चूसो अआह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह..!” और वो छटपटा रही थी। उनका बदन बार-बार कमर से ऊपर उठ रहा था।
मैंने दोनों हाथों से उनके स्तनों को दबा रहा था और मुँह से एक-एक करके पपीते चूस रहा था। फिर मैं एक हाथ से उनके चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा। मेरी उंगलियां उनके घने, गीले बालों को सहलाती हुई नीचे चूत की दरार तक पहुंच गईं।
वो उछल-उछल कर चिल्ला रही थी, “शिशिर और जोर से करो.. और जोर से दबाओ.. और जोर से चूसो…!” उनकी चूत से अब गर्म रस बहने लगा था जो मेरी उंगलियों को चिकना कर रहा था।
फिर मैं उनके पूरे बदन को चूमने लगा। वो मानो नई दुल्हन की तरह सिसकारियाँ ले रही थीं और मैं उनके पूरे बदन को अपनी जीभ से चाट रहा था। उनकी गर्दन, कांख, पेट, नाभि — हर जगह मेरी गर्म जीभ फेर रहा था।
फिर मैंने उन्हें उल्टा लिटा दिया और उसके पिछले हिस्से पर अपनी जीभ फिराने लगा। उसको मानो स्वर्ग का आनन्द मिल रहा था।
मैंने उनकी दोनों जांघों के बीच में भी अपनी जीभ को घुमाकर उन्हें मस्त कर डाला और फिर ऊपर से नीचे तक उन्हें चूम लिया। अब रहा नहीं जा रहा था।
मैंने अपना लंड उसके मुँह की तरफ कर दिया और चूसने को कहा। मेरा 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड उनके चेहरे के ठीक सामने था। उसका टोपा चमक रहा था और उसमें से पारदर्शी रस की बूंदें निकल रही थीं।
तो वो बोलीं नहीं शिशिर… यह मेरे मुँह में नहीं जा सकता..! उनकी आंखें फैली हुई थीं और चेहरा शर्म से लाल हो गया था।
मैंने कहा ठीक है कोशिश तो करो.. मैं तुम्हारी चूत चूसता हूँ और तुम मेरा लंड..!
फिर मैं ऊपर और वो नीचे थी। मैंने अपनी जीभ उनकी बालों वाली चूत पर रखी। पहले मैंने उनकी गीली चूत की दोनों पत्तियों को अपनी उंगलियों से अलग किया। उनकी चूत गुलाबी और पूरी तरह भीगी हुई थी। मैंने अपनी गर्म जीभ को उनकी चूत के ऊपरी हिस्से पर रखकर जोर से चाटा। फिर जीभ को अंदर डालकर घुमाने लगा। उनकी चूत से मीठा-खट्टा रस मेरी जीभ पर आ रहा था।
वो स्वर्ग में उड़ने लगी। उनका बदन बार-बार उठ रहा था। मस्ती में उन्होंने मेरा लंड अपने नरम हाथ में पकड़ा और जितना ले सकती थीं उतना मुंह में लेकर चूसने लगीं। उनके गर्म, गीले मुंह में मेरा लंड आधा तक चला गया। वो अपनी जीभ से मेरे लंड के टोपे को चाट रही थीं और हल्के-हल्के चूस रही थीं। उसको अब खूब मज़ा आ रहा था।
करीब 15 मिनट बाद वो बोलीं शिशिर मैं झड़ने वाली हूँ… जोर-जोर से मेरी चूत को चूसो, खा जाओ मेरी चूत को आआह्ह्ह… आज तक कभी मेरे पति ने इस तरह मेरी चूत नहीं चाटी आअम्म्म्म..!
ये बोलते हुए उन्होंने मेरी गर्दन अपनी टांगों में कस ली। उनकी जांघें मेरे सिर को जकड़ गईं। उन्होंने अपनी चूत ऊपर उठा दी। मैं समझ गया कि वो झड़ गई है। उनकी चूत सिकुड़ी और फिर ढीली पड़ गई।
इतनी देर में उनकी चूत का गर्म, चिपचिपा रस मेरे मुँह के रास्ते मेरे गले में उतर गया। स्वाद मीठा और थोड़ा नमकीन था। वो शांत हो चुकी थी और मेरा लंड अब भी अपने मुंह में लेकर धीरे-धीरे चूस रही थी।
कुछ देर बाद मैं उठकर उनकी टांगों के बीच में बैठ गया। मैंने अपनी चूत के मुँह पर लंड रखा और थोड़ी देर के लिए उन्हें सताने के लिए उस पर धीरे-धीरे रगड़ने लगा। मेरा गर्म, मोटा लंड उनकी चूत की पत्तियों को अलग करता हुआ ऊपर-नीचे सरक रहा था।
उन्हें इतना मज़ा आ रहा था कि वो बोल नहीं पा रही थीं, पर उनके चेहरे से साफ़ जाहिर था कि वो मेरे लंड को अपनी चूत के अन्दर लेने के लिए बेकरार हो रही थीं। उनकी आंखें बंद थीं, होंठ कांप रहे थे और कमर हल्के-हल्के ऊपर उठ रही थी।
फिर मैंने उनकी चूत के मुँह पर लंड रखकर एक हल्का सा धक्का मारा। वो सिहर उठीं। अब उन्हें दर्द होने लगा। उनका चेहरा थोड़ा सिकुड़ गया। मैंने उनके मुँह पर झुककर उन्हें चुम्बन करने लगा और अपने हाथ उनके स्तनों पर फेरने लगा।
भाभी बोलीं अय्यीयाह… मर जाऊँगी.. अह… यार बहुत मोटा है.. धीरे करो..!
उन्हें वो अच्छा लगा और मैंने चूमते हुए ही एक और धक्का दे दिया और मेरा लंड कुछ और अन्दर डाल दिया, तो उनकी चीख निकल गई।
पर मेरे लगातार चुम्बन करने की वजह से वो मेरे मुँह में ही रह गई। मैंने चुम्बन को चालू रखा। उन्हें इससे बहुत अच्छा लग रहा था और मेरे दोनों हाथ उसके उभारों को मसल रहे थे।
उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था।
फिर मैंने उनके मुँह को अपनी जीभ से भर दिया और उसके मम्मों को जोर-जोर से दबाने लगा। उसे थोड़ा दर्द जरुर हुआ, पर वो मज़े लूट रही थी।
फिर थोड़ी देर उनके मम्मों को सहलाने के बाद मैं एक और आखरी धक्का दे दिया और मेरा पूरा 6 इन्च लम्बा लंड उनके चूत के अन्दर था।
वो जोर से सिसकारी मार रही थी, “आह्ह्ह्ह उईईई मरीईए गई मज़ा आ गया चोद दे याररर अह्ह्ह्हह…!” उनकी चूत मेरे मोटे लंड को पूरी तरह निचोड़ रही थी। उनके अंदर की गर्म, चिपचिपी दीवारें मेरे लंड के चारों ओर सिकुड़-ढीली हो रही थीं।
अब मैं फिर धक्का मारने लगा। धीरे-धीरे अब वो मुझे अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर साथ देने लगी। हर धक्के पर उनका गोल, मोटा चूतड़ मेरी कमर से टकरा रहा था।
कुछ देर बाद मैंने उनके पैर अपने कन्धों पर रखे और अपना पूरा लंड उसकी चूत में अन्दर बाहर कर रहा था।
उनके पैर मेरे कंधे पर होने से पोजीशन इतनी टाइट थी और मैं उनके चूत के अन्दर तक चला गया था। मेरा लंड उनकी गर्भाशय की दीवार तक पहुंच रहा था।
मेरा लम्बा लंड भाभी की चूत में उछल-कूद करने लगा। हर जोरदार धक्के पर उनकी चूत से चिकना रस बाहर निकलकर मेरी जांघों को भीगने लगा।
वो चिल्ला रही थी, “बहुत बड़ा है..अब बस करो मुझसे सहा नहीं जाता प्लीजजज..!” उनकी आंखें बंद थीं, मुंह खुला था और सांसें फूट रही थीं।
पर मैं बस थोड़े ही करने वाला था। कुछ देर बाद उनकी चूत में मेरे लंड ने अपनी जगह बना ली थी। अब उनकी चूत मेरे लंड के आकार के हिसाब से ढल गई थी।
अब भाभी भी मुझे कह रही थीं, “और जोर से चोद.. आज से पहले ज़िन्दगी में ऐसी मज़ा कभी नहीं आया..!” और मैं धक्के पर धक्के दे रहा था और वो भी उछल-उछल कर मेरा साथ दे रही थी। मैं जोर-जोर से अपना लंड उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा।
वो अपने बाल नोंच रही थी, तो कभी अपने स्तन को दबा रही थी। बस मुझे उसके साथ आज ज़िन्दगी का मज़ा लूटना था।
अब वो इतनी तेज़ी से उछल रही थी कि वो उसकी चूत से ‘फच फच’ की आवाजें पूरे रूम को भरने लगीं।
भाभी भी मेरा हौसला बढ़ा रही थीं, “और जोर से शिशिर और जोर से.. अब मैं झड़ने वाली हूँ.. तुम मुझे बहुत मज़ा दे रहा हूँ आह्ह अआम्म्म हाँ… और जोर से आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्… लो मैं झड़ी…आ..हह..!” और वो झड गई। उनकी चूत मेरे लंड को जोर-जोर से निचोड़ रही थी। गर्म रस की धार मेरे लंड पर बह रही थी।
कुछ देर बाद करीब मैं परेशान हो गया था कि मैं झड़ क्यूँ नहीं रहा था। भाभी को फिर तो मैंने अलग-अलग आसनों में अलग-अलग तरीके से खूब चोदा। उन्होंने भी खूब मजे से चुदवाया। मुझे भी खूब मजा आ रहा था। दस मिनट बाद मैंने उनकी चूत में गरम-गरम रस डाल दिया और इस दौरान वो भी दोबारा झड गई थीं। मेरा लंड अभी तक उनकी चूत के अन्दर था, थोड़ी देर बाद हम अलग हुए।
मैंने कहा भाभी मन नहीं भरा है..!
दस मिनट बाद मैंने उनकी चूत में गरम-गरम रस डाल दिया और इस दौरान वो भी दोबारा झड गई थीं। मेरा लंड अभी तक उनकी चूत के अन्दर था, थोड़ी देर बाद हम अलग हुए।
मैंने कहा भाभी मन नहीं भरा है..!
वो बोलीं तो करते रहो।
मैंने कहा पहले तुम्हें इस लंड महाराज की सेवा करनी होगी..!
उसने उसे हाथ में लेकर सहलाना चालू किया। मैं उसके स्तन के निप्पल को मसलने लगा। उनके निप्पल भी अब टाइट होने लगे थे। उन्होंने मेरे लंड को चूमा फिर मुँह में ले लिया और चूसने लगीं।
मुझे बड़ा आनन्द आ रहा था। मैं भी बोल रहा था, “भाभी आज इसे पूरा पी लो और जोर से चूस… पूरी जीभ से चाट.. खा लो न.. खूब जोर से लो प्लीज..!”
वो भी “उम्म्मम्म” करके लॉलीपॉप की तरह चूसे जा रही थी। उसने अपनी जीभ से मेरा पूरा लंड साफ कर दिया और उसे वापस ‘फ्रेश-बनाना’ की तरह कर दिया और चूस-चूस कर अब उसने मेरा लंड गरम लोहे की तरह बना दिया। मैं उसके और उसके स्तनों से खेल रहा था। वो भी अब कड़क हो गई थी।
“अब तुमको फिर मज़ा देता हूँ..! और उससे बोला अब मैं तुम्हें डॉगी-स्टाइल में चोदूँगा।
वो बोलीं कैसे?
मैंने कहा अरे पागल आज तक ऐसे नहीं करवाया तो क्या मस्ती मिली रे.., रोज नए-नए स्टाइल से चोदने का आनन्द लेना चाहिए मेरी जान..!
शीला भाभी बोलीं तो करो… नए-नए स्टाइल से आज मेरे ऊपर.. देखूं तो सही..!
मैंने उसे उसके दोनों हाथ को साइड में रखी टेबल पर जमा दिए और बोला अब थोड़ा झुक जाओ।
फिर मैंने उन्हें डॉगी-स्टाइल में खड़ा कर दिया और पीछे से उनके दोनों स्तन को पकड़कर मसल डाला और अपना लंड उनकी दोनों जाँघों के बीच में डालकर अपने लंड को उनकी चूत पर थोड़ा रगड़ा और उसे गर्म किया।
फिर मैंने अपना पूरा लंड एक ही झटके में अन्दर डाल दिया और मेरे हाथ उनके स्तन को मसल रहे थे, निप्पलों को पकड़ कर खींच रहा था.. मसल रहा था..।
इस स्टाइल में उन्हें दोनों तरफ से इतना मज़ा आ रहा था कि वो “अह्ह्ह्ह” करती जा रही थीं, “करते रहिए रुकिए नहीं..!”
अब मेरा लंड उनकी चूत में स्क्रू की तरह चला गया था और फिट हो गया था, इससे उन्हें बहुत अधिक उत्तेजना हो रही थी।
मुझे भी जबरदस्त आनन्द आ रहा था।
अचानक उसने पूरा लंड बाहर निकाल कर पूरा का पूरा एक झटके से मेरी गांड में डाल दिया, तो एकदम से मेरा मूत ही निकल गया।
मेरा पूरा शरीर एक झटके से कांप उठा। शिशिर का मोटा, गर्म और चिपचिपा लंड अचानक मेरी टाइट गांड के अंदर घुस गया। मेरी गांड की दीवारें तन गईं और एक तेज जलन के साथ गहरा आनंद भी फैल गया। मेरा मूत अनियंत्रित रूप से छूट गया। गर्म, पारदर्शी तरल मेरी जांघों पर बहने लगा। मेरी टांगें कांप रही थीं और मेरी चूत से भी ताजा रस रिस रहा था। हम दोनों ही जोर-जोर से हंसने लगे। हंसी के बीच मेरी सिसकारियां भी निकल रही थीं।
चुदाई के बाद मैं शर्माने जैसा नाटक कर के शिशिर से बोली मुझे अब बहुत शर्म आ रही है.. मैं न.. कितनी गन्दी हूँ… मैं कितनी बेशरम हो गई थी और तुमने भी आज मुझे कितना रगड़ा है। मेरी आवाज नकली शर्म से भरी हुई थी लेकिन मेरे शरीर पर अभी भी चुदाई की लालिमा और पसीना चमक रहा था। मेरे स्तन लाल हो गए थे, निप्पल सख्त थे और मेरी चूत तथा गांड दोनों में अभी भी उसका गरम रस भरा हुआ था।
तो शिशिर बोला नहीं भाभी, आप बहुत अच्छी हैं और मैं आप से बहुत प्यार करता हूँ और शरमाओ मत.. ये सब नेचुरल है।
शिशिर बहुत खुश था। उसने मुझे हर तरह से रगड़ा था। उसने मेरी चूत, मेरे मुंह और मेरी गांड तीनों जगह अपना मोटा लंड डालकर खूब जोरदार चुदाई की थी। मैं भी खुश थी कि मेरे तीनों छेद खूब भरे थे.. खूब अच्छे से चुदाई हुई थी। मेरी चूत अब भी धड़क रही थी और गांड में हल्का दर्द के साथ मस्ती महसूस हो रही थी।
भरपूर चुदाई के आनन्द के बाद हमने सोचा कि अब वापस चलना चाहिए तो दोनों ने कपड़े पहने और एक-दूसरे को खूब प्यार किया और वादा किया कि हम फिर मौक़ा मिलते ही इस सब को फिर से करेंगे और बार-बार करेंगे।
अब जब भी मेरे पति बाहर जाते हैं, शिशिर चोदने की जिद करता है। मैं भी कभी-कभी उसे मौक़ा देती हूँ, पर बाकी मेरे ढेरों और यार भी तो हैं… उनको भी तो अवसर देना होता है न…!
खैर आप आइएगा.. आपको भी निराश नहीं करूंगी।
