xnxx भाभी को अब्दुल के लंड पर चढ़ाया
sex story भाभी को अब्दुल के लंड पर चढ़ाया
Abdul ne bhabhi chodi sex story: शादी के बाद से नजमा भाभी की चुदाई बहुत ही कम हुई थी। जवान तन लंड का प्यासा था। मुझे रोज चुदते देखकर उसका मन भी मचल उठा। वो रोज छुप छुप कर अब्दुल से मेरी चुदाई देखा करती थी। जब वो गांड मारता था तो भाभी का दिल हलक में अटक जाता था। भैया को बस धंधे से मतलब था। रात को दारू पीता और थकान के मारे जल्दी सो जाता था। सात दिन पहले वो मुंबई चला गया था।
नजमा भाभी आज तो ठान रखी थी कि मुझसे बात करके कुछ काम तो फिट कर ही लेगी। भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा, “बानो छत पर चल, एक जरूरी काम है!”
“यहीं बोल दे ना!”
“अब तू भी गांड फुला कर नखरे दिखा! कहा ना जरूरी काम है!”
“चूतिया टाइप बातें मत कर… गांड जैसा अपना मुंह खोल… बोल क्या बात है!”
“साली हरामजादी… मां चुदा! नहीं बताती!”
“हाय मेरी भाभी जान… चल फिर… लगता है जरूर कोई बात है!”
भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और लगभग खींचती हुई छत की ओर छलांगें मारती हुई सीढ़ियां चढ़ने लगी। छत पर पहुंचते ही वो हांफने लगी। उसकी छातियां ऊपर नीचे होने लगी।
“सुन… एक बात कहूं… बुरा तो नहीं मानेगी ना…” उसने बड़ी मुश्किल से उखड़ती आवाज में कहा।
“बोल ना… दिल में इतनी बेचैनी… क्या बात है… किसी ने चोद मारा है क्या…?”
“बात ही कुछ ऐसी है… देख नाराज मत होना!”
मैंने उसे हैरानी से देखा… “बोल ना… ऐसा क्या है?”
“बहुत दिन हो गए, तेरे भाई जान तो यहां है नहीं!” वो अटकते हुए बोली।
“हां तो… आ जाएंगे ना!”
“वो तेरा दोस्त है ना, अब्दुल… उससे मेरी दोस्ती करवा दे!” भाभी ने जमीन की ओर देखते हुए कहा।
“ओह हो… मेरी भाभी की चूत चुदासी हो गई है… चुदना है क्या?”
“बानो! प्लीज देख मजाक मत कर… मेरी हालत बहुत खराब हो रही है… देख, चूत में से पानी टपक रहा है!”
“अच्छा… पहले देखूं तो कितनी बेचैन है भाभी की चूत…” मैंने उसकी चूत दबा दी।
सच में रसीली हो चुकी थी। मेरी उंगलियों के स्पर्श से भाभी की गर्म चूत की नमी तुरंत महसूस हुई। उसकी पतली पैंटी के ऊपर से भी गीली गर्माहट हाथ पर चिपक गई।
तो भोसड़ी की! रांड को चुदवाना है? मैंने कहा।
“सच रे… ये तो बहुत ही चुदासी है… साली पहले क्यों नहीं चुदवा लिया… कब चुदवाओगी… कब बुलाऊं उसे???”
“आज रात को ही चुदवा दे ना मुझे…” भाभी ने कातर नजरों से मुझे देखा। मुझे उस पर दया आ गई…
अब्दुल तो शाम को सात बजे ही घर पर आ गया था। शाम का धुंधलका बढ़ गया था। हम दोनों छत पर आ गए। दूसरी छतों पर लोग थे। हल्की हवा चल रही थी और आसमान में नारंगी रोशनी फैली हुई थी।
“बानो, भाभी आए उसके पहले कुछ हो जाए…?” अब्दुल बोला। उसकी आवाज में उत्सुकता और जल्दबाजी साफ झलक रही थी।
मुझे डर सा लगा, पर तुरंत आईडिया आ गया। दीवार की आड़ में मस्ती कर लेते हैं।
“अच्छा तो नीचे बैठ जा और मेरी चूत खोल ले… ऊपर तो कुछ दिखेगा नहीं।” मैंने फुसफुसाते हुए कहा।
मैं दीवार पर खड़ी हो गई ताकि कमर तक दीवार आ जाए। मेरी कमर दीवार की आड़ में थी और ऊपरी हिस्सा छिपा हुआ था। वो नीचे बैठ गया और मेरी सफेद पैंटी को धीरे से दोनों हाथों से पकड़कर नीचे उतार दी। ठंडी हवा सीधे मेरी नंगी चूत पर लगी। मेरी चूत उसके चेहरे के ठीक सामने थी। गुलाबी और थोड़ी गीली हो चुकी मेरी चूत की महक अब्दुल के नाक तक पहुंच रही थी।
उसने नीचे कुर्सी की गद्दी लगा ली और दीवार से टिक कर आराम से बैठ गया। फिर उसने मेरी चूत से खेलना शुरू कर दिया। पहले उसकी उंगलियां धीरे से मेरी चूत की बाहर वाली पतली परत को सहलाने लगीं। नरम स्पर्श से मेरी कमर में सिहरन दौड़ गई। फिर उसकी अंगुली मेरे दाने पर आई। उसने उसे हल्के से दबाया और घुमाया। तीखा सुखद झटका मेरी रीढ़ में उतर गया।
फिर दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को मजबूती से पकड़ कर दबा दिया। उसके अंगूठे मेरी नरम गांड की चमड़ी को मसल रहे थे। एक उंगली धीरे से मेरे गांड के छेद पर घूमती हुई अंदर की ओर दबाने लगी। गांड के टाइट छेद में उंगली घुसते ही मैंने होंठ काट लिए। बड़ा मजा आ रहा था। मेरी सांसें तेज हो गई थीं।
उसका लंड खड़ा हो गया था। उसने जिप खोल कर अपना मोटा, गर्म लौड़ा बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगा। उसके हाथ ऊपर नीचे होने की हल्की आवाज आ रही थी। बीच बीच में उसके हाथ मेरे टॉप के अंदर भी घुस जाते थे। उसकी हथेली मेरी नंगी छातियों को छू रही थी। निप्पल सख्त होकर खड़े हो गए थे। मुझे डर लगता कि कोई मादरचोद मुझे देख ना ले। इसलिए मैं उसका हाथ पकड़ कर वापस नीचे ले जाती।
“चूतिये… ऊपर मत कर… कोई देख लेगा तो… मेरी तो मां चुद जाएगी!” मैंने दबे स्वर में कहा।
“बानो धीरे से नीचे बैठ जा… तब तो कोई नहीं देखेगा ना!” मैं उसकी तरकीब समझ नहीं पाई। मैंने नीचे देखा और धीरे से बैठ गई। जैसे ही मैं नीचे बैठी, उसका लंड सीधा मेरी चूत में घुस गया। गर्म और मोटा लंड मेरी भीगी चूत की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर चला गया। पूरी लंबाई एक झटके में अंदर तक चली गई। लंड चूत में घुसते ही मुझे उसकी बात पल्ले पड़ गई और मैं हंस दी।
“भोसड़ी के… मुझे चोदेगा क्या…? भाभी को आने दे ना…!” मैंने उसका लौड़ा बाहर निकाल दिया।
तभी छत के कमरे में से मुझे खिड़की से झांकती हुई भाभी नजर आ गई। वो वहां खड़ी खड़ी अपनी चूचियां मसल रही थी। जाने वो कब से खड़ी होकर हमें देख रही थी। उसने मेरे देखते ही इशारा किया। मैंने अब्दुल को दूर हटा दिया।
“सुन रे गांडू, कपड़े पहन ले… भाभी आने वाली है!” मैंने अब्दुल को लताड़ा।
अब्दुल ने कपड़े पहन लिए और खड़ा हो गया। मैंने भी अपने कपड़े सही कर लिए। सब कुछ सही देख कर भाभी कमरे में से बाहर छत पर आ गई।
भाभी जान के आते ही अब्दुल जैसे तैयार हो गया। मैंने भाभी को इशारा किया कि क्या शुरू करें कार्यक्रम?
वो तो जैसे पहले ही गरम हो चुकी थी। उसका हाथ तो चूत पर ही था और उसे दबा रखा था… मानो पेटीकोट दबा रखा हो। उसकी उंगलियां पेटीकोट के ऊपर से ही अपनी चूत को जोर जोर से मसल रही थीं। चेहरे पर गहरी लालिमा फैली हुई थी और सांसें तेज चल रही थीं।
“अब्दुल, यह है नजमा भाभी… तुम्हें याद कर रही थी!”
“सलाम, भाभी जान… आप तो बड़ी खूबसूरत हैं!” अब्दुल की आंखों में भूख साफ दिख रही थी।
प्रत्युत्तर में भाभी मुस्कराई और बोली, “मुझे तो बानो ने बताया कि आप तो कमाल के हैं!”
“यह भोसड़ी का तो बस… चुदाई में कमाल दिखाता है…” मैंने उन दोनों को खोलने की कोशिश की।
“चल हट री बहन की लौड़ी… वो तो सभी मर्द होते हैं!” भाभी ने खुलना ही मुनासिब समझा।
“भाभी जान… आपकी बात तो अलग लग रही है… आपके पोंद तो कैसे मस्त हैं!” अब्दुल ने पास आते हुए कहा। उसकी आवाज भारी और कामुक हो गई थी।
“हाय अल्लाह… आप तो पोंद पर ही आ गए… मैंने तो आपके बारे में अभी कुछ नहीं कहा?”
अब्दुल ने सीधा आक्रमण कर दिया। उसने दोनों हाथों से भाभी के उभरे हुए मस्त पोंद को पीछे से जोर से पकड़ लिया और अच्छी तरह दबा दिया। भाभी के नरम, गोल चूतड़ उसकी उंगलियों में दबकर फैल गए। अब्दुल ने उन्हें मसलते हुए खींचा भी।
“भाभी इसे यानि पोंद मरवा कर देखो…” गांड में अब्दुल ने अंगुली करते हुए कहा। उसकी मोटी उंगली भाभी की पेटीकोट के ऊपर से गांड के छेद पर दब रही थी।
“आईईई… बानो… मेरी पोंद दबा दी इसने…!” भाभी के मुंह से तीखी सिसकारी निकली। उसका शरीर हल्का सा कांप उठा।
“अब्दुल चूंचे भी दबा दे… जल्दी कर…” मैंने अब्दुल को इशारा किया।
अब्दुल ने उसके पीछे आकर दोनों चूचियों को पेटीकोट के ऊपर से ही मजबूती से पकड़ लिया। उसकी उंगलियां भाभी की बड़ी और भारी चूचियों को गहरे से मसलने लगीं। निप्पल सख्त होकर खड़े हो गए थे। अब्दुल उन्हें बीच बीच में चुटकी भी ले रहा था। भाभी के मुंह से लगातार सिसकारियां निकल पड़ीं। “अह्ह्ह… उफ्फ…”
“अरे हट छोड़ मुझे, किसी ने देख लिया तो रट्टा हो जाएगा!” भाभी ने यहां वहां देखा और घबरा कर कहा… “चल वहीं बैठ जा, जहां तू बानो की चूस रहा था।”
अब्दुल तुरंत वहीं जा कर बैठ गया। भाभी जान अब्दुल के पास गई और अपना पेटीकोट ऊपर उठाया और उसके मुंह पर डाल दिया। अब अब्दुल का चेहरा पूरी तरह भाभी की नंगी चूत के नीचे छिप गया था।
“बानो, शुक्रिया मेरी जान… अब तो अब्दुल से मैं चुदा लूंगी… चल रे अब्दुल… शुरू हो जा…” भाभी ने मुस्करा कर मुझे देखा और आंख मार दी। भाभी के मुख से एक गहरी आह निकल पड़ी। मैं समझ गई कि अब्दुल ने कुछ अंदर किया है।
“हाय अब्बा… डाल दे अंगुली… पूरी घुसेड़ दे रे…”
भाभी ने मुझे पकड़ लिया। मैं भाभी की चूचियों को पेटीकोट के अंदर से दबाने लगी। उनकी गर्मी और नरमी मेरी हथेलियों में महसूस हो रही थी। उसने मुझे वासना भरी नजर से देखा और सिसकारी भरने लगी। “बानो, यह तो मस्त लड़का है रे… चूत का पानी ही निकाल देगा!”
“भाभी जान… मस्त हो जा… अब तेरे पेटीकोट में क्या हो रहा है मैं क्या जानू रे…”
“हां बानो… ये अंदर की बात है… साला गजब चूत चूसता है… हाय मुझे मूत आ रहा है!” नजमा भाभी मचलती हुई बोली। उसकी कमर अब्दुल के चेहरे पर हिलने लगी थी।
“मूत दे भाभी… मैं चूत खोलता हूं…” अब्दुल पेटीकोट के अंदर से बोला।
“हाय मेरी अम्मा…” भाभी ने जरा सा जोर लगाया और मूतना चालू कर दिया। गर्म पेशाब की धार अब्दुल के मुंह में गिरने लगी। अब्दुल अंदर ही अंदर उसके पेशाब का आनंद लेने लगा। उसने अपना मुंह गीला कर लिया और मुंह खोल कर पेशाब भर लिया। पेशाब की गर्मी और नमकीन स्वाद उसे और उत्तेजित कर रहा था।
“और निकाल मूत… भाभी… क्या स्वाद है…” उसने चूत में अपना मुंह घुसा कर चाटने लगा। उसकी जीभ भाभी की चूत की अंदर वाली दीवारों को चाट रही थी।
“बैठ जा भाभी जान… आजा…” भाभी धीरे से उकडू बैठ गई और मुख से एक आनंद भरी सीत्कार निकल गई… “हाय रे… लंड घुस गया चूत में…” अब्दुल ने लंड घुसते ही पेटीकोट अपने ऊपर से हटा लिया और भाभी को जकड़ लिया। अब्दुल का मोटा, गर्म लंड भाभी की चूत में पूरा घुस गया था। चूत की दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं।
मैंने तुरंत वहां फैला हुआ पेशाब साफ किया और दौड़ कर दरी ले आई और भाभी के पीछे लगा दी। अब्दुल ने भाभी को कसे हुए दरी पर लेटा दिया और लंड को चूत में फिर से घुसेड़ दिया। लंड पूरी गहराई तक चला गया।
“हाय अब्दुल… तेरा लौड़ा कितना प्यारा है… पूरा ही अंदर तक उतर गया… अह्ह्ह्ह”
अब्दुल अब ठीक से सेट हो कर उस पर लेट गया और चोदने का आनंद लेने लगा। उसकी कमर तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी। मैंने भी भाभी की गांड में अपनी अंगुली डाल दी। गांड का टाइट छेद मेरी उंगली को अंदर खींच रहा था।
“बानो… मजा आ गया… एक अंगुली और डाल दे…!”
मैंने भाभी की गांड में दो अंगुलियां डाल दी और घुमाने लगी। अंदर की गर्मी और नमी महसूस हो रही थी। मुझे एक शरारत सूझी, अब्दुल की गांड में भी दूसरे हाथ की अंगुली डाल दी।
“बानो, तू साली चुपचाप नहीं बैठ सकती है ना… साला युसुफ गांड चोद जाता है वो कम है क्या?”
“क्या, युसुफ भी तुम्हारा दोस्त है…?”
“हां भाभी, और फिरोज भी है…” मैंने फिरोज का नाम और जोड़ दिया।
“हाय रे, बानो… मुझे भी अपनी टोली में मिला लो ना…” भाभी चुदते हुए बोली।
“भाभी चलो, अब हम भी तीन और ये भी तीन… नसीम को भी बताना चाहिए!”
“नसीम भी…” भाभी तो इतने सारे चुदाई के साथी मिल जाएंगे यकीन भी नहीं हो रहा था। भाभी चुदवा कर मदमस्त हो रही थी। उसे लंड क्या मिला मानो दुनिया मिल गई हो। वो बहुत ही उत्तेजित हो कर आनंद ले रही थी। मैंने गांड में अंगुली पेलना चालू रखा। दोनों ही डबल मार से बहुत उत्तेजित हो गए थे… अब्दुल सटासट लंड चला रहा था। अब्दुल का लौड़ा कड़कने लगा था, उसका डंडा लोहे जैसा हो गया था। दोनों की कमर एक तालमेल के साथ तेजी से चल रही थी। चूत गीली होने से फच फच की आवाजें भी सुनाई पड़ रही थीं। उत्तेजित भाभी के जिस्म में ऐंठन होने लगी थी।
मैंने भाभी और अब्दुल की गांड में से अंगुली निकाल दी और भाभी की चूचियां और निपल मसलने लगी। मेरी उंगलियां भाभी की भारी, गर्म चूचियों को जोर से दबा रही थीं। निप्पल सख्त और लंबे हो चुके थे। मैं उन्हें बीच-बीच में चुटकी ले रही थी और घुमा रही थी। भाभी के मुंह से एक गहरी आह निकली। उसका पूरा शरीर अचानक सख्त हो गया। उसकी चूत ने रस छोड़ दिया। गर्म, चिपचिपा रस अब्दुल के लंड को और भी गीला करते हुए बाहर निकल रहा था।
इधर अब्दुल भी लंड का जोर लगा कर वीर्य छोड़ने की कोशिश कर रहा था। उसकी कमर तेज-तेज हिल रही थी। चेहरे पर तनाव और आनंद का मिश्रण था। मैं भाभी को छोड़ कर अब्दुल के चूतड़ों को दबा कर मसलने लगी। मेरी उंगलियां उसके मजबूत, गोरे चूतड़ों को गहरे से पकड़ रही थीं। मैं उन्हें खींच रही थी और मसल रही थी।
बस अब्दुल ने अपना लौड़ा बाहर निकाला और पिचकारी छोड़ दी। पहली मोटी धार भाभी की चूत के ऊपर और पेट पर गिरी। गर्म, सफेद वीर्य की कई तेज धारें निकलीं। मैंने तुरंत उसका लौड़ा मुठ में भर लिया। गर्म, चिपचिपा और नसों वाला लंड मेरी हथेली में कांप रहा था। मैंने उसे निचोड़ने लगी। ऊपर से नीचे तक मजबूती से दबाते हुए बाकी का वीर्य बाहर निकालने लगी। आखिरी कुछ बूंदें मेरी उंगलियों पर आ गईं। मैंने उन्हें भी निचोड़ कर बाहर कर दिया। भाभी नीचे पड़ी हांफ रही थी। उसकी छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। अब अब्दुल भी ठंडा पड़ रहा था। उसकी सांसें धीमी हो रही थीं।
“भोसड़ी के… अब ऊपर से तो हट जा भाभी के…” मैंने अब्दुल को पीछे खींचा।
अब्दुल खड़ा हो गया। भाभी भी उठ बैठी। भाभी ने पेटीकोट नीचे किया और मुझसे लिपट पड़ी। उसका गर्म, पसीने से भीगा शरीर मेरे सीने से चिपक गया।
“बानो, शुक्रिया इस शानदार चुदाई का… एक बात कहूं? प्लीज मना मत करना!”
“हां बोलो… नज्जो भाभी…!”
“मुझे भी, अपने दोस्तों में शामिल कर लो… फिरोज, हाय कितना चिकना है… युसुफ का लौड़ा तो सॉलिड है और अब्दुल तो कितना प्यारा है!”
“भाभी… फिर तो आप रोज चुदोगी, होशियार… भैया को भूल जाओगी…!” मैंने भाभी को मजाक में कहा।
“हाय बानो… ये लो मैंने तो पेटीकोट अभी से ऊपर उठा दिया… चोदो… मुझे जी भर कर चोदो!”
हम तीनों ही हंस पड़े… और फिर सभी दोस्त बन गए। चुदाई सिलसिला शुरू हो गया… भला चढ़ती जवानी के जोश को कोई रोक सका है…।
