xnxx Aunty Fuck Story – आंटी को अपने दोस्त से चुदवाते पकड़ा अंकल ने
sex story Aunty Fuck Story – आंटी को अपने दोस्त से चुदवाते पकड़ा अंकल ने
Aunty Fuck Story
मैं आपके लिए जिसकी कहानी लिखने जा रहा हूँ, वो कहानी किसी और की नहीं, मेरी आंटी की है, मेरे अंकल के एक दोस्त के साथ किए गए सेक्स की, जिसे मैंने अपनी आँखों से दूसरी बार देखा था। जैसा कि मैंने अपनी पहली कहानी में अपने पड़ोस वाली आंटी के बारे में बता चुका हूँ कि उनके परिवार में मैं, आंटी और अंकल हैं। Aunty Fuck Story
अंकल एक प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन में काम करते हैं, जिसके चलते उनको अक्सर बाहर ही रहना पड़ता है। मेरी आंटी जिसकी उम्र 28 साल की है, वो इतनी सुंदर हैं कि जिनको देखने के बाद अच्छे-अच्छों के डंडे खड़े हो जाते हैं। उनकी लंबाई पाँच फीट छह इंच की है।
मेरी आंटी किसी ऐसे मर्द की तलाश में रहती थीं जो उनकी इस इच्छा को पूरी कर सके। उनकी वो इच्छा उस दिन पूरी हो गई जब अंकल ने एक दिन उनको अपने एक दोस्त से मिलवाया। जिनका नाम राजू था। उनको देखते ही आंटी के चेहरे को देखने के बाद ऐसा साफ लग रहा था कि आंटी की ख्वाहिश जल्दी ही पूरी होने वाली है।
अब मैं उस दिन की ओर ले चलता हूँ। मुझे वो दिन आज भी बिल्कुल अच्छी तरह से याद है। उस दिन घर में मेरी आंटी ही थीं क्योंकि अंकल अपने काम से दो दिन के लिए बाहर गए हुए थे और मैं उस दिन स्कूल गया हुआ था। उस दिन किसी कारण से मेरे स्कूल में हाफ टाइम तक की पढ़ाई हुई और स्कूल में छुट्टी होने के चलते जब मैं अपने घर के पास पहुँचा तो मैंने राजू को आंटी के फ्लैट के गेट पर खड़ा हुआ पाया।
मैं वहीं रुक गया और देखा कि आंटी ने दरवाजा खोला और राजू अंदर चले गए। इसके बाद गेट बंद हो गया। मैं समझ गया कि आज फिर से आंटी का वो दिन लौट आया है। अब मैं देर करना उचित नहीं समझा और बिल्कुल आराम से सीढ़ियों पर चढ़के मैं वैसी जगह पर बैठ गया जहाँ से मैं सब कुछ आराम से देख सकता था।
मैंने देखा कि राजू आंटी के रूम में जाकर बैठ गए। आंटी उनके लिए पानी देकर चली गईं। राजू ने पानी पी लिया। कुछ देर के बाद आंटी कुछ काम करके वापस आईं तो राजू ने आंटी के हाथ को पकड़ लिया और आंटी को अपनी तरफ खींचते हुए अपनी गोद में बैठा लिया। आंटी ने मुस्कुराते हुए बोला, “ये क्या कर रहे हो?”
राजू ने आंटी के दोनों चूचियों को अपने दोनों हथेलियों में लेकर मसलना शुरू कर दिया और बोले, “बहुत दिन हो गए हैं, आइए एक-दूसरे की आवश्यकता को पूरा कर लें।” ऐसा कहते हुए आंटी को बेड पर लिटा दिया और आंटी की नाइटी को ऊपर उठाने लगे। उस समय आंटी के दोनों पैर बेड से लटक रहे थे।
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आंटी ने बोला, “कोई आ जाएगा तो क्या होगा?”
राजू बोले, “कोई बात नहीं, देख लेंगे।”
ऐसा कहते हुए राजू ने आंटी की नाइटी को उठाकर कमर के ऊपर कर दिया। आंटी ने नाइटी के नीचे कुछ नहीं पहना था। अब आंटी की बुर साफ दिख रही थी। आंटी की बुर को देखते हुए राजू ने बोला, “इसको देखके लगता है कि पता नहीं ये कितने दिन से भूखी है। आज मैं इसकी भूख मिटा देता हूँ।”
अब राजू ने अपने लंड को लुंगी से निकाल दिया और आंटी की बुर पर सटा के अपने कमर को हिलाने लगे। अब आंटी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और जोर-जोर से साँसें खींचने लगीं। राजू ने आंटी की नाइटी को ऊपर उठाकर अब आंटी को बिल्कुल ही नंगा कर दिया।
आंटी अब जोर-जोर से साँसें खींच रही थीं। कुछ देर के बाद ऐसा लगने लगा कि आंटी बिल्कुल ही गरम हो गई थीं। राजू ने अब अपने लंड को, जो कि आठ इंच का लंबा और ढाई इंच चौड़ा था, आंटी की बुर में एक हल्के से झटके के साथ अंदर किया तो आंटी तो जैसे काँप उठी।
आंटी की बुर पर जब मैंने देखा तो पाया कि उनकी बुर में राजू के लंड का अगला हिस्सा चला गया था। आंटी की कमर को पकड़ के राजू ने अपने कमर को धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया तो आंटी उनके हर एक झटके के साथ एक अजीब से मस्ती भरी आवाज में उनका जवाब दे रही थीं।
आंटी के पैर भी हर झटके के साथ हिल रहे थे जिसके चलते उनके पैर के पायल की आवाज से राजू के हौसले और भी बढ़ रहे थे और राजू आंटी की बुर में अपने लंड को अंदर ले जाने के लिए कभी-कभी जोर-जोर से धक्का लगाते तो आंटी की तरफ से एक अजीब सी सिसकी पूरे रूम में दौड़ जाती थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
आंटी की बुर में राजू का लंड हर एक बड़े धक्के के साथ अंदर जा रहा था जो आंटी के दर्द को और ही बढ़ा रहा था। आंटी के इस प्रकार से मस्ती में कराहते हुए देख के राजू ने आंटी के तने हुए चूचियों को धीरे-धीरे दबाने लगे तो आंटी के चूचियों से दूध निकलने लगा।
राजू आंटी के चूचियों के दूध को पीने के लिए आंटी के ऊपर लेट गए और आंटी के दोनों चूचियों को बारी-बारी से अपने मुँह में लेकर आंटी के दूध को पीने लगे तो आंटी मस्ती में आने लगीं और वो अब ढीली पड़ने लगीं। राजू ने जब देखा कि आंटी ढीली पड़ने लगीं तो फिर से अपने कमर को जोर से झटके के साथ अपने लंड को आंटी की बुर की गहराई में ले जाने के लिए हिलाया।
आंटी अपने जगह से दो इंच ऊपर खिसक चुकी थीं। आंटी जोर से चीख पड़ीं। आंटी की चीख पूरे रूम में गूँज उठी। आंटी ने उनसे लंड को निकालने के लिए बोला लेकिन राजू के ऊपर उसका कोई भी असर नहीं पड़ा। आंटी बोलीं, “प्लीज थोड़ी देर के लिए बाहर निकाल दीजिए। मैं मर जाऊँगी, बहुत पेन कर रहा है।”
लेकिन उनकी इस बात का राजू के ऊपर कोई भी असर नहीं हुआ और उन्होंने फिर से एक जोर का धक्का मारा और आंटी फिर से छटपटा उठीं। अब आंटी की बुर में उनका पूरा आठ इंच चला गया था। आंटी की हालत देखते ही बन रही थी। वो ऐसे छटपटा रही थीं जैसे कोई छोटी बच्ची हो।
आंटी के कोमल-कोमल बालों से राजू के कोमल-कोमल बालों का मिलन हो रहा था। अब राजू ने आंटी के होंठों को चूसना शुरू कर दिया तो आंटी भी कुछ देर के बाद धीरे-धीरे मस्ती में आने लगीं और अब राजू का साथ देने लगीं। आंटी ने अब अपने दोनों पैरों को फोल्ड कर लिया और अपनी दोनों जाँघों को फैला दिया जिससे राजू अब आंटी के दोनों पैरों के बीच में आ गए और आंटी की जवानी का भरपूर मजा लूटने लगे।
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आंटी की इस चुदाई को देख के मेरा मन सोचने के लिए मजबूर हो गया कि जब अपनी आंटी की बुर की चुदाई देखने में इतना मजा आ रहा है तो भला राजू को आंटी की चुदाई करने में कितना मजा आ रहा होगा। तभी आंटी-राजू एक-दूसरे से पूरी तरह से लिपट गए और आंटी राजू की पीठ पर अपने दोनों हाथ सहला रही थीं।
एक तरफ राजू आंटी की बुर में अपने पूरे लंड को अंदर-बाहर कर रहे थे तो दूसरी तरफ आंटी के होंठों को चूस रहे थे। आंटी भी उनका खुलकर साथ दे रही थीं। इस तरह से आंटी अपनी जवानी का भरपूर आनंद राजू को खुलके दे रही थीं। कुछ देर के बाद दोनों लोग शांत पड़ गए तो मैं समझ गया कि आंटी की बुर में राजू का स्पर्म गिर गया था।
अब दोनों लोग वैसे ही कुछ देर तक एक-दूसरे की बाहों में पड़े रहे। कुछ देर के बाद राजू जब आंटी के ऊपर से हटे तो आंटी ने आँखें खोलीं और मुस्कुराने लगीं। इतना सुनके राजू बोले, “देखो अपने बुर को लगता है कि बरसों की इसकी ख्वाहिश आज पूरी हो गई है।” अब राजू आंटी के ऊपर से हट गए।
और अपने कपड़े पहन के जब बाथरूम में गए तो आंटी भी उठके बैठ गईं। अब आंटी ने अपनी नाइटी को पहन लिया और जैसे ही राजू बाथरूम से निकले तो आंटी बाथरूम में गईं और पेशाब करके जब वापस आईं तो मैंने दरवाजा खोलने के लिए मेन गेट पर जाकर कॉल बेल बजाई।
आंटी ने आके गेट खोला। मैं अंदर जाने के बाद जब राजू को देखा तो आंटी से पूछा कि राजू कब आए तो आंटी ने बताया कि अभी पाँच मिनट पहले ही आए। मैंने आंटी को कभी भी ये अहसास नहीं होने दिया कि मैंने सब कुछ देखा है। आंटी बहुत खुश थीं। आखिर उनकी बुर की जबरदस्त चुदाई जो हुई थी, इससे उनका बुर भी फूल गया था।
उस दिन जो कुछ देखा था, वो मेरे दिमाग में बार-बार घूम रहा था। आंटी की वो खुशी, उनकी आँखों में चमक, उनका वो मुस्कुराना- सब कुछ मुझे अजीब तरह से प्रभावित कर रहा था। मैं सोचता रहता कि क्या आंटी सचमुच इतनी बेचैन थीं? और राजू अंकल के साथ उनकी वो खुली जवानी… मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था कि दोबारा कुछ देखने की कोशिश करूँ।
एक शाम को अंकल फिर से ऑफिस के काम से बाहर गए। इस बार तीन दिन के लिए। घर में सिर्फ आंटी थीं। मैं जानबूझकर थोड़ी देर से घर पहुँचा। जैसे ही मैंने गेट पर पहुँचकर देखा, राजू अंकल की बाइक फिर से पार्किंग में खड़ी थी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने चुपके से सीढ़ियाँ चढ़ीं और उसी पुरानी जगह पर जा बैठा जहाँ से सब कुछ साफ दिखता था- बालकनी की ग्रिल के पीछे छिपकर। आज आंटी ने एक हल्की गुलाबी साड़ी पहनी हुई थी। ब्लाउज काफी टाइट था और पेटीकोट भी थोड़ा नीचे बंधा हुआ लग रहा था।
जैसे ही राजू अंदर आए, आंटी ने दरवाजा बंद किया और सीधे उनकी तरफ बढ़ीं। इस बार कोई पानी-वानी देने की औपचारिकता नहीं। आंटी ने राजू के गले में हाथ डाल दिए और सीधे होंठों पर होंठ रख दिए। राजू ने भी उन्हें कसकर पकड़ लिया। दोनों एक-दूसरे को चूमते हुए ही सोफे की तरफ बढ़े।
आंटी ने राजू की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। राजू ने आंटी की साड़ी का पल्लू खींचा और उसे धीरे-धीरे नीचे सरकाया। आंटी की कमर नंगी हो गई। राजू ने उनकी कमर पर हाथ फेरते हुए कहा, “आज तो तुम और भी गरम लग रही हो… क्या बात है?”
आंटी ने शरमाते हुए मुस्कुराकर कहा, “तुम तीन दिन से नहीं आए थे ना… इंतजार बहुत हुआ है।”
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राजू ने आंटी को गोद में उठाया और बेडरूम में ले गए। मैंने भी चुपके से बालकनी से थोड़ा आगे बढ़कर खिड़की के पास आकर देखना शुरू किया। खिड़की थोड़ी खुली थी, आवाजें साफ सुनाई दे रही थीं। राजू ने आंटी को बेड पर लिटाया और उनकी साड़ी पूरी तरह उतार दी।
आज आंटी ने काली लेस वाली ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी। राजू ने ब्रा के ऊपर से ही चूचियों को दबाना शुरू किया। आंटी की सिसकारियाँ शुरू हो गईं। “आह्ह… राजू… धीरे…” लेकिन राजू रुकने वाले नहीं थे। उन्होंने ब्रा का हुक खोला और दोनों चूचियाँ बाहर निकाल लीं। आज दूध की धार और भी ज्यादा लग रही थी।
राजू ने एक चूची मुँह में ली और जोर-जोर से चूसने लगे। आंटी की पीठ कमर से ऊपर उठ रही थी। दूसरी चूची पर हाथ से दबाव डालते हुए दूध की धार निकल रही थी। फिर राजू नीचे की तरफ आए। आंटी की पैंटी पर हाथ फेरा और धीरे से उतार दी। आंटी की बुर पहले से ही गीली लग रही थी।
राजू ने उँगली डालकर सहलाना शुरू किया। आंटी जोर-जोर से कराह रही थीं। “उफ्फ… अंदर… और अंदर…” राजू ने अपनी पैंट उतारी। उनका लंड पहले से ही खड़ा था। आंटी ने हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ा और सहलाने लगीं। फिर उन्होंने राजू को अपनी तरफ खींचा और कहा, “आज मुझे और जोर से चाहिए… बिल्कुल वैसे ही जैसे पहली बार था।”
राजू ने आंटी की टाँगें फैलाईं और अपना लंड उनके बुर पर सटाया। एक झटके में आधा अंदर चला गया। आंटी चीख पड़ीं, “आह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही…” राजू ने धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई। हर धक्के के साथ आंटी की चीखें और सिसकारियाँ बढ़ती जा रही थीं। पायल की छम-छम, बेड की चरमराहट और दोनों की साँसें- सब मिलकर कमरे को भर रहा था।
करीब २०-२५ मिनट तक राजू ने आंटी को अलग-अलग पोजीशन में चोदा। पहले मिशनरी, फिर आंटी को ऊपर करके काउगर्ल स्टाइल में, फिर डॉगी स्टाइल में। आंटी हर पोजीशन में पूरी मस्ती से साथ दे रही थीं। डॉगी स्टाइल में राजू ने आंटी के बाल पकड़कर पीछे से जोर-जोर से धक्के मारे तो आंटी की चीखें कमरे की दीवारों से टकरा रही थीं। “हाँ… और जोर से… फाड़ दो मुझे…”
आखिर में दोनों एक साथ झड़ गए। राजू ने आंटी के अंदर ही सारा पानी छोड़ दिया। दोनों थककर एक-दूसरे के ऊपर लेट गए। आंटी राजू के सीने पर सिर रखकर लेटी थीं। राजू उनके बाल सहला रहे थे। आंटी ने धीरे से कहा, “तुम्हारे बिना ये दिन कितने लंबे लगते हैं…”
राजू हँसे और बोले, “अब तो मैं हफ्ते में कम से कम तीन दिन आऊँगा।”
मैं वहाँ से चुपके से हट गया। मेरे मन में हजार सवाल थे। क्या ये सिर्फ शारीरिक भूख है? या इसमें कुछ और भी है? और सबसे बड़ा सवाल- अगर अंकल को पता चल गया तो क्या होगा? लेकिन उस दिन भी मैंने आंटी को कुछ नहीं बताया। मैं बस चुपचाप देखता रहा और सोचता रहा कि ये सिलसिला कब तक चलेगा… और क्या कभी मैं भी इस राज का हिस्सा बन पाऊँगा?
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कुछ हफ्तों बाद की बात है। अब ये सिलसिला लगभग नियमित हो चुका था। राजू हर हफ्ते कम से कम दो-तीन बार आते। कभी दोपहर में, कभी शाम को। आंटी भी अब पहले से ज्यादा बेखौफ और खुलकर व्यवहार करने लगी थीं। जैसे उन्हें पता चल गया हो कि घर में कोई नहीं है जो उन्हें देख रहा है। लेकिन मैं… मैं हर बार चुपके से देखता रहा।
एक रविवार की दोपहर थी। अंकल इस बार पूरे हफ्ते के लिए दिल्ली गए हुए थे- कंपनी की मीटिंग के लिए। घर में सिर्फ आंटी थीं। मैंने जानबूझकर कॉलेज से जल्दी छुट्टी ले ली और घर के पास ही एक चाय की दुकान पर बैठकर इंतजार करने लगा। करीब 2 बजे राजू की बाइक आई। आज वे थोड़े अलग लग रहे थे- हाथ में एक छोटा-सा गिफ्ट बैग था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने चुपके से पीछे-पीछे सीढ़ियाँ चढ़ीं और अपनी पुरानी जगह पर जा बैठा। खिड़की आज थोड़ी ज्यादा खुली थी। शायद आंटी ने खुद ही खोली थी- ताजी हवा के लिए। राजू अंदर आए तो आंटी ने उन्हें देखते ही गले लगा लिया। आज आंटी ने एक लाल रंग की सिल्क की साड़ी पहनी थी- बहुत पतली, लगभग पारदर्शी। ब्लाउज भी गहरा नेक वाला। राजू ने बैग से एक छोटी-सी बॉक्स निकाली और आंटी को दी।
“ये क्या है?” आंटी ने मुस्कुराते हुए पूछा।
“खोलकर देखो,” राजू ने कहा।
आंटी ने बॉक्स खोला- अंदर एक काली लेस वाली ब्रा-पैंटी सेट था, बहुत सेक्सी। साथ में एक छोटा-सा वाइब्रेटर भी। आंटी की आँखें चमक उठीं।
“तुम… ये सब…” आंटी शरमा गईं।
“आज थोड़ा नया ट्राई करेंगे,” राजू ने कान में फुसफुसाकर कहा। “तुम्हें पसंद आएगा।”
आंटी ने हामी भरी। दोनों बेडरूम में गए। राजू ने आंटी को बेड पर बिठाया और धीरे-धीरे उनकी साड़ी उतारना शुरू किया। आज वे ज्यादा समय ले रहे थे- जैसे हर पल का मजा लेना चाहते हों। साड़ी उतरते ही आंटी की गोरी कमर और गहरी नाभि साफ दिख रही थी। राजू ने नाभि में उंगली डाली और फिर होंठों से चूमने लगे। आंटी की सिसकारियाँ शुरू हो गईं।
फिर राजू ने नया सेट निकाला। आंटी ने पुराने कपड़े उतारे और नए पहन लिए। काली लेस वाली ब्रा-पैंटी में वे और भी खूबसूरत लग रही थीं। राजू ने वाइब्रेटर ऑन किया और धीरे से आंटी की पैंटी के ऊपर से ही उसकी बुर पर रख दिया। आंटी तुरंत काँप उठीं।
“आह्ह… राजू… ये… बहुत तेज़ है…”
“रिलैक्स… बस थोड़ी देर,” राजू ने कहा और धीरे-धीरे उसे अंदर सरकाने लगे।
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आंटी की आँखें बंद हो गईं। उनके मुँह से लगातार “उफ्फ… आह्ह… हाँ…” जैसी आवाजें निकल रही थीं। राजू ने एक हाथ से वाइब्रेटर कंट्रोल किया और दूसरे हाथ से उनकी चूचियाँ दबाने लगे। दूध फिर से निकलने लगा। राजू ने चूचियाँ चूसते हुए वाइब्रेटर को और गहराई में धकेला। आंटी की कमर ऊपर-नीचे होने लगी। वे पूरी तरह से मस्त हो चुकी थीं।
करीब 10-15 मिनट बाद आंटी जोर से चीखीं और झड़ गईं। उनका पूरा शरीर काँप रहा था। राजू ने वाइब्रेटर निकाला और खुद की पैंट उतारी। उनका लंड पहले से ही फुल साइज में था। आंटी ने अभी भी साँसें तेज़ चल रही थीं। उन्होंने राजू को ऊपर खींचा और कहा, “अब… मुझे तुम्हारा चाहिए… जल्दी…”
राजू ने आंटी की टाँगें कंधों पर रखीं और एक ही झटके में पूरा लंड अंदर कर दिया। आंटी की चीख फिर से गूँज उठी। इस बार वे ज्यादा जोर-जोर से धक्के मार रहे थे। हर धक्के पर आंटी की चूचियाँ उछल रही थीं। पलंग जोर-जोर से हिल रहा था। “हाँ… और जोर से… फाड़ दो… मुझे तुम्हारी हो गई हूँ…” आंटी चीख रही थीं।
राजू ने स्पीड बढ़ाई। आंटी ने अपनी टाँगें राजू की कमर पर लपेट लीं। दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह से समा गए थे। करीब आधे घंटे बाद राजू ने आंटी के अंदर ही जोर से झटका मारा और सारा पानी छोड़ दिया। आंटी ने भी उसी समय दूसरी बार झड़कर चीख मारी। दोनों थककर लेट गए। आंटी राजू के सीने पर सिर रखकर लेटी थीं। राजू उनके बालों में उँगलियाँ फेर रहे थे।
“तुम्हें पता है,” आंटी ने धीरे से कहा, “मुझे लगता है कि मैं अब सिर्फ तुम्हारे लिए ही जी रही हूँ।”
राजू ने हँसकर कहा, “और मैं सिर्फ तुम्हारे लिए ही आता हूँ।”
मैं वहाँ से चुपचाप हट गया। इस बार मेरे मन में कुछ अलग-सा हो रहा था। जलन? उत्सुकता? या कुछ और? मैं नहीं जानता। लेकिन एक बात साफ थी- ये रिश्ता अब सिर्फ शारीरिक नहीं रह गया था। इसमें भावनाएँ भी जुड़ रही थीं। और मैं… मैं बस एक चुप्पे दर्शक बनकर रह गया था।
क्या कभी ये राज खुल जाएगा? या ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा? मैं नहीं जानता। लेकिन अगली बार जब राजू आएँगे, मैं फिर वहीं खिड़की के पास खड़ा रहूँगा… देखने के लिए… समझने के लिए… और शायद, खुद को भी कुछ महसूस करने के लिए।
कुछ और दिन बीत गए। अब राजू और आंटी का रिश्ता इतना गहरा हो चुका था कि दोनों एक-दूसरे के बिना रह नहीं पाते थे। हर मुलाकात पहले से ज्यादा जोशीली और लंबी होती जा रही थी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक शाम की बात है। अंकल का ऑफिस का काम अचानक खत्म हो गया था।
वे दिल्ली से एक दिन पहले ही वापस लौट आए। ट्रेन से उतरते ही उन्होंने घर फोन किया, लेकिन आंटी ने फोन नहीं उठाया- शायद बाथरूम में थीं। अंकल ने सोचा कि सरप्राइज देंगे। वे टैक्सी लेकर सीधे घर पहुँचे। मैं उस दिन घर पर ही था।
शाम के करीब 6:30 बजे अंकल का फोन आया था कि वे रास्ते में हैं, लेकिन मैंने आंटी को नहीं बताया- क्योंकि मुझे अंदाजा था कि आज राजू आने वाले हैं। मैंने खिड़की से देखा कि राजू की बाइक पहले से ही पार्किंग में खड़ी थी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। आज कुछ गड़बड़ होने वाली है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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अंकल घर पहुँचे। मुख्य गेट खुला था- शायद आंटी ने राजू के लिए खुला छोड़ दिया था। अंकल अंदर आए और सीधे लिविंग रूम में गए। उन्होंने आवाज लगाई, “सुनो… मैं आ गया!” लेकिन कोई जवाब नहीं आया। तभी बेडरूम की तरफ से हल्की-हल्की सिसकारियाँ और पलंग की आवाज आने लगी।
अंकल का चेहरा बदल गया। वे धीरे-धीरे बेडरूम की तरफ बढ़े। दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था। अंकल ने झाँका। अंदर का नजारा देखकर अंकल के पैर जम गए। आंटी बिल्कुल नंगी बेड पर लेटी थीं। राजू उनके ऊपर थे। राजू आंटी की टाँगें अपने कंधों पर रखे जोर-जोर से धक्के मार रहे थे।
आंटी की आँखें बंद थीं, मुँह से लगातार “हाँ… और जोर से… बस ऐसे ही…” जैसी आवाजें निकल रही थीं। दोनों इतने मस्त थे कि उन्हें कुछ पता ही नहीं था कि कोई देख रहा है। अंकल का चेहरा लाल हो गया। उनके हाथ काँप रहे थे। वे कुछ सेकंड तक ऐसे ही खड़े रहे। फिर अचानक दरवाजा जोर से खोल दिया।
“ये क्या हो रहा है!!!” अंकल की आवाज पूरे घर में गूँज उठी।
राजू और आंटी दोनों एक साथ चौंक गए। राजू ने झटके से खुद को अलग किया और चादर खींचकर शरीर ढकने की कोशिश की। आंटी की आँखें फटी की फटी रह गईं। उनका चेहरा सफेद पड़ गया। वे जल्दी से चादर ओढ़कर बैठ गईं।
“तुम… तुम दोनों…” अंकल की आवाज काँप रही थी। “मैं… मैं तुम्हें इतना प्यार करता था… और तुम…”
राजू घबराकर उठा। “भाई साहब… सुनिए… ये…”
“चुप!!!” अंकल चिल्लाए। “तुम मेरे दोस्त थे… मेरे घर में… मेरी बीवी के साथ…”
आंटी रोने लगीं। “मुझे माफ कर दो… प्लीज… मैं… मैं गलत थी…”
अंकल ने आँखों में आँसू लिए कहा, “तुमने मेरा भरोसा तोड़ दिया। मैंने तुम्हें कभी कुछ नहीं कहा… कभी शक भी नहीं किया… और तुम…”
राजू ने कपड़े पहनने की कोशिश की। “भाई साहब, मैं जा रहा हूँ… प्लीज…”
अंकल ने उन्हें रोका नहीं। बस घूरते रहे। राजू जल्दी से कपड़े पहनकर बाहर निकल गया। बाइक स्टार्ट की और भाग गया। अंकल बेडरूम में ही खड़े रहे। आंटी रो-रोकर कह रही थीं, “मुझे मार दो… लेकिन माफ कर दो… मैंने गलती की…”
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अंकल ने कुछ नहीं कहा। बस मुड़कर बाहर चले गए। वे लिविंग रूम में सोफे पर बैठ गए और सिर पकड़ लिया। आँसू उनकी आँखों से बह रहे थे। मैं अपनी जगह से सब देख रहा था। मेरा दिल भी टूट रहा था। मैंने कभी नहीं चाहा था कि ऐसा हो। मैंने सोचा था कि ये राज हमेशा छिपा रहेगा। लेकिन आज सब कुछ खुल गया। रात भर घर में सन्नाटा रहा। आंटी कमरे में रोती रहीं। अंकल बाहर सोफे पर बैठे रहे। न कोई बात हुई, न कोई खाना बनाया। सुबह होते ही अंकल ने अपना बैग पैक किया। आंटी उनके पैरों में गिर पड़ीं।
“प्लीज मत जाओ… मैं सुधर जाऊँगी…” अंकल ने ठंडे लहजे में कहा, “मुझे सोचने का समय चाहिए। मैं कुछ दिनों के लिए कहीं और चला जाता हूँ। तुम… जो करना है करो।” वे घर से निकल गए। आंटी फर्श पर बैठकर रोती रहीं। मैं चुपचाप अपनी जगह से उठा। अब मुझे पता नहीं था कि आगे क्या होगा। क्या अंकल वापस आएँगे? क्या आंटी राजू से मिलना बंद कर देंगी? या ये सब खत्म हो जाएगा? एक बात साफ थी- जो राज कभी छिपा नहीं रहता, वो एक दिन जरूर खुल जाता है। और जब खुलता है, तो दर्द बहुत ज्यादा होता है।
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