xnxx Desi Student Sex – मासूम स्टूडेंट की चूत चाटने लगा ठरकी टीचर
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Desi Student Sex
यह कहानी आज से 4 साल पुरानी है जब मैं जॉब की तलाश में था पर मुझे जॉब नहीं मिलती थी। सोचा कुछ न कुछ किया जाना चाहिए तो मैंने ट्यूशन करने का सोचा और मुझे एक घर में एक लड़की की ट्यूशन मिल गई। मेरी स्टूडेंट जिसको मैं ट्यूशन पढ़ाता था उसका नाम खुशबू था और उसकी उम्र 18 साल थी। Desi Student Sex
वो बहुत ही प्रीटी और क्यूट थी। वो मिल्की फेयर कलर की थी, ब्राउन हेयर्स, ब्लू आइज़, पिंक लिप्स और उसका फिगर उस वक्त कोई 32-26-34 था। वो काफी इनोसेंट लड़की थी। स्टडी के अलावा किसी चीज़ में उसका इंटरेस्ट नहीं था तो वो कंप्यूटर और नेट था लेकिन नेट को वो केवल अपनी स्टडी के लिए यूज़ करती थी।
चलें अब अपनी स्टोरी की तरफ आता हूँ। मैं रोज़ उसे 7 से 10 पी.एम. पढ़ाने जाता था। यह बात 15 दिसंबर की है। जब मैं उसके घर पहुँचा तो वो घर पर अकेली थी। उसके मॉम, पापा और उसका भाई एक प्रोग्राम में गए हुए थे। उसने आकर दरवाज़ा खोला और बोली, “सर अंदर आ जाइए।”
और खुद वो अपना बैग लेने दूसरे रूम में चली गई। और जब वो वापस आई तो बोली, “सर मेरा पी.सी. काफी दिनों से हैंग हो रहा है प्लीज़ ज़रा मेरा पी.सी. ठीक कर दें। मुझे काफी प्रॉब्लम होती है। आज घर में भी कोई नहीं है।” तो मैंने बोला, “खुशबू कहाँ है तुम्हारा पी.सी. चलो देख लेता हूँ।”
वो मुझे लेकर अपने स्टडी वाले रूम में ले गई और पी.सी. के सामने वाली चेयर पर बैठकर पी.सी. ऑन कर दिया उसने और मेरे लिए एक दूसरी चेयर अपने बराबर में खींच ली और मुझे बैठने को बोला। मैं बैठ गया। उसने उस दिन लाइट ब्लू कलर का सलवार कमीज पहना हुआ था जो काफी सिल्की था.
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और इस वजह से उसका दुपट्टा बार-बार नीचे खिसक रहा था और मुझे उसके बूब्स देखने का मौका मिल रहा था जब कई बार दुपट्टा नीचे खिसका। मैंने बोला, “खुशबू तुम ऐसा करो दुपट्टे को उतारकर रख दो क्योंकि तुम बार-बार सही करती हो और ये बार-बार गिर जाता है।”
मैंने बोला, “खुशबू तुम ऐसा करो अपना दुपट्टा उतारकर रख दो वैसे भी घर में मैं और तुम ही तो हैं।” तो उसने कुछ शर्माते हुए अपना दुपट्टा उतारकर टेबल की साइड पर रख दिया और पी.सी. का पासवर्ड डालकर पी.सी. ऑन कर दिया। मैं दूसरी वाली चेयर पर बैठा और पी.सी. देख रहा था।
अचानक मेरी नज़र खुशबू के सीने पर गई तो मैं देखता ही रह गया। उसके बूब्स बहुत ही टाइट और स्ट्रेट थे और उसकी कमीज काफी टाइट होने की वजह से और भी सेक्सी लग रहे थे। मेरी नज़र उसके बूब्स पर ही रुक गई। अचानक खुशबू ने मुझसे मुखातिब होकर बोलना चाहा तो उसने देखा कि मैं उसके बूब्स की तरफ देख रहा हूँ तो उसने अचानक अपना दुपट्टा उठाया और अपने सामने रख लिया।
और अजीब तरह से मेरी तरफ देखकर बोली, “सर प्लीज़ पी.सी. को देखिए ना क्या मसला है इसके साथ ये हैंग क्यों होता है बार-बार।” मैंने एकदम पी.सी. पर नज़र कर ली और माउस हाथ में लेकर चेक करने लगा। माउस चलाते हुए मेरी एल्बो उसके बूब्स साइड पर लग रही थी.
जिससे उसके बूब्स साइड से मेरी एल्बो से दब रहे थे और मैं जानबूझकर मज़ीद अपनी एल्बो को उसके बूब्स की साइड पर प्रेस करता जा रहा था। ऐसा करने से वो कुछ-कुछ समझ गई कि मैं ये सब जानकर कर रहा हूँ तो वो थोड़ी अपनी चेयर को आगे करके बैठ गई.
और मैं एक बार फिर माउस से पी.सी. को चेक करने लगा और मैंने आहिस्ता से अपनी एल्बो को थोड़ा वाइड करके फिर से उसे टच करने लगा। वो मुझे पी.सी. चेक करते देखती रही और फिर मैंने अपनी एल्बो को मज़ीद उसके बूब्स पर रगड़ना शुरू कर दिया और एक बार फिर उसका दुपट्टा गिरने लगा बार-बार नीचे को। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने बोला, “खुशबू उतार दो ना दुपट्टा अपना।”
तो वो बोली, “सर फिर आप मुझे देखने लगेंगे जो मुझे अच्छा नहीं लगता।”
तो मैंने बोला, “खुशबू देख ही तो रहा था तुम वैसे भी आज इस ड्रेस में बहुत अच्छी लग रही हो।”
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तो थोड़ा शर्मा सी गई। मैं समझ गया कि इसको भी मेरा ये सब करना बुरा नहीं लग रहा। फीमेल है ना थोड़ा हिचकिचाती तो होगी ही। तब मैं हिम्मत करके उसका दुपट्टा अपने हाथ से खुद ही उतारकर साइड में रख दिया। वो कुछ नहीं बोली।
मैंने एक बार फिर पी.सी. को देखना शुरू किया और अपनी एल्बो को उसके बूब्स पर टच करना शुरू कर दिया। अब वो थोड़ी कॉम्फर्टेबल फील करने लगी तो मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ी और मैंने अपना हाथ उसकी थाइज़ पर रख दिया और आहिस्ता-आहिस्ता थाइज़ को अपनी फिंगर से रब करना शुरू कर दिया।
वो बोली, “सर प्लीज़ हाथ हटा लें यहाँ से।”
मैंने पूछा, “क्यों खुशबू क्या हुआ?”
तो बोली, “पता नहीं अजीब सी फीलिंग हो रही है आपके हाथ रखने से।”
मैंने पूछा, “क्या हुआ?”
तो शर्मा गई वो। मेरी थोड़ी और हिम्मत बढ़ी। मैंने उसका हाथ अपने हाथों में पकड़ लिया और मैंने उसके अपने हाथ को उसके बूब्स के करीब करके प्रेस किया तो वो चेयर से उठकर बाहर जाने लगी। मैंने उसे पीछे से जाकर पकड़ लिया। वो बहुत हिचकिचा रही थी। बोली, “सर प्लीज़ छोड़ दें मुझे।”
पर मैंने उसे पकड़कर किस की उसकी नेक के पीछे की साइड पर।
वो बोली, “सर प्लीज़ ये सब सही नहीं है।”
मैंने बोला, “खुशबू प्लीज़ तुम बहुत अच्छी लग रही हो प्लीज़ कोई घर पर भी नहीं है।”
तो वो बोली, “सर प्लीज़ मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता।”
मैंने पूछा, “क्यों पहले भी कभी किसी ने ऐसा करने की कोशिश की है तुमसे?”
तो वो बोली, “नहीं पर मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ प्लीज़ ना करें आप और जाएँ अब आप।”
मैंने उसे एक बार फिर दोनों बाजुओं से पकड़कर उसकी गर्दन पर किसिंग शुरू कर दी। वो छुड़ाती रही अपने आप को मुझसे पर मैंने किसिंग जारी रखी। काफी कोशिश की उसने छुड़ाने की पर मैंने उसे ज़ोर से पकड़ा हुआ था और किसिंग करता जा रहा था उसकी गर्दन पर और फिर मैंने पीछे से ही उसके दोनों बूब्स को अपने हाथों में लेकर दबाना और गर्दन पर किसिंग करना शुरू कर दी।
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वो छुड़ाती रही अपने आप को और रोने लगी, “प्लीज़ सर छोड़ दें मुझे ना करें ये सब मेरे साथ मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ प्लीज़ छोड़ दें मुझे।”
पर मैं तो अपनी हवस खो बैठा था और उसकी गर्दन को चूस रहा था और उसके बूब्स को दबा रहा। फिर मैंने उसकी कमीज और ब्रा के अंदर हाथ डालकर उसके बूब्स दबाना शुरू कर दिया और वो चीखती रही, “प्लीज़ सर छोड़ दें मुझे ना करें प्लीज़।” और मैंने उसे उसके बूब्स से कसकर पकड़ा हुआ था।
फिर मैं अपना एक हाथ उसकी सलवार में ले गया और उसकी मासूम सी चूत को रब करने लगा। थोड़ी देर उसकी चूत को रब करने से वो भी मस्त होने लगी और छुड़ाने की कोशिश उसकी कम हो गई बल्कि बिल्कुल खत्म सी हो गई थी पर वो रो रही थी मुसलसल।
फिर मैंने उसकी चूत के अंदर अपनी फिंगर डालने की कोशिश की तो वो चीख पड़ी और बोली, “प्लीज़ सर ना मारें।” इस कोशिश में वो डिस्चार्ज हो गई और मुझे उसकी चूत गीली फील हुई पर मैंने उसे रब करना जारी रखा। वो आहिस्ता-आहिस्ता ढीली पड़ गई और मस्त हो गई। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर मैंने उसकी सलवार को नीचे करने की कोशिश की तो उसकी सलवार में लास्टिक होने की वजह से मुझे ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी और उसकी सलवार नीचे हो गई और मैंने उसे लिटा दिया सोफे पर और अपनी ज़ुबान उसकी चूत पर रखकर उसकी चूत को चूसना शुरू कर दिया।
वो मस्त से मस्त होती जा रही थी और मोन करने लगी, “आआ ह्म आआ प्लीज़ सर ना करें आपको कसम है आपकी मॉम की छोड़ दें मुझे आआ सूऊ आआई प्लीज़ ना सर छोड़ दें ना अम्म म्म आआ ओह्ह।” फिर मैंने उसकी चूत के होल को थोड़ा सा खोला और अपनी ज़ुबान उसकी चूत के होल में दे दी।
ऐसा करने से वो और मस्त हो गई और आवाज़ें निकालना शुरू कर दी, “देम्म आह्ह बस्स म्म छोड़ दें छोड़ दें प्लीज़ ना।” और एक बार फिर वो झड़ गई मेरे मुँह में ही। मैं उसकी चूत चाटता रहा और वो, “आआ ओई आह्ह म्म प्लीज़ ना करें ना करें बस्स ना बस्स करें प्लीज़ सर।”
वो रियली बहुत मासूम लड़की थी बहुत यंग थी वो और मैं उसकी चूत को चाटता रहा और इतने में उसके घर की बेल बजी और मैंने जल्दी से अपनी शर्ट सही की और मैं वहाँ से भाग आया और… मैं जैसे ही भागा, दिल की धड़कनें इतनी तेज़ थीं कि लग रहा था बाहर निकलते ही कोई सुन लेगा।
मैंने जल्दी से सीढ़ियाँ उतारीं, मुख्य गेट से बाहर निकला और घर की तरफ तेज़ कदमों से चल पड़ा। रास्ते में बार-बार पीछे मुड़कर देखता रहा कि कहीं खुशबू का कोई परिवार वाला तो नहीं आ रहा। लेकिन कोई नहीं था। रात का समय था, सड़कें सुनसान थीं।
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घर पहुँचकर मैंने दरवाज़ा बंद किया और सीधे अपने कमरे में गया। बिस्तर पर लेट गया, लेकिन नींद कहाँ आ रही थी। दिमाग में बस खुशबू का चेहरा, उसकी वो मासूम आँखें, उसकी चीखें, उसका रोना, और वो पल जब वो मस्त होकर कराह रही थी—सब कुछ घूम रहा था।
मुझे एक तरफ पछतावा हो रहा था कि मैंने इतना आगे बढ़कर गलत किया, दूसरी तरफ हवस अभी भी बाकी थी। मैं सोच रहा था कि कल क्या होगा? क्या खुशबू अपने माता-पिता को सब बता देगी? क्या वो मुझे फिर कभी ट्यूशन के लिए आने देगी? या पुलिस तक बात पहुँच जाएगी?
अगले दिन सुबह मैं बहुत घबराया हुआ था। फोन करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। लेकिन ट्यूशन का समय था—शाम ७ बजे। मैंने सोचा अगर नहीं गया तो और शक हो सकता है। शायद वो सब भूल जाए, या डर के मारे चुप रहे। मैंने फैसला किया कि जाऊँगा, लेकिन बहुत सावधानी से।
शाम को 7 बजे मैं उसके घर पहुँचा। दिल धड़क रहा था। मैंने घंटी बजाई। कुछ सेकंड बाद दरवाज़ा खुला। खुशबू ने खोला। उसका चेहरा देखकर मैं समझ गया कि रात का असर अभी भी है। आँखें लाल थीं, जैसे रोई हो। उसने मुझे देखा और बिना कुछ बोले अंदर आने का इशारा किया।
मैं अंदर गया। आज घर में उसके माता-पिता थे। उसकी माँ किचन में थीं, पापा न्यूज़ देख रहे थे। खुशबू मुझे स्टडी रूम में ले गई। लेकिन आज वो पहले जैसी नहीं थी। वो दूर-दूर रह रही थी। चेयर पर बैठी, लेकिन मेरे बराबर नहीं। दुपट्टा कसकर लपेटा हुआ था। पी.सी. ऑन था, लेकिन वो कुछ नहीं बोल रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने हल्के से पूछा, “खुशबू… कल… सब ठीक है ना?”
वो चुप रही। फिर धीरे से बोली, “सर… प्लीज़… कल जो हुआ… वो कभी मत बोलना। मुझे बहुत डर लग रहा है। मैंने किसी को कुछ नहीं बताया। लेकिन… प्लीज़… अब ऐसा कभी मत करना।”
मैंने कहा, “खुशबू, मुझे माफ कर दो। मैं… मैं कंट्रोल नहीं कर पाया। तुम बहुत अच्छी लगती हो… मैं…”
वो बीच में बोली, “सर, बस। पढ़ाइए। और प्लीज़… मेरे पास मत आइए।”
मैंने पढ़ाना शुरू किया। लेकिन मेरा मन पढ़ाने में नहीं था। बार-बार उसकी तरफ देखता। वो भी कभी-कभी मेरी तरफ देखती, लेकिन जल्दी नज़रें फेर लेती। उस दिन कुछ खास नहीं हुआ। मैंने पढ़ाया और 10 बजे चला गया। जाते वक्त उसने कहा, “सर, अगले हफ्ते से टाइमिंग बदल दें… शायद शाम 6 से 8 तक।”
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मैं समझ गया। वो मुझे कम समय में रखना चाहती थी। या शायद घर में कोई रहे। अगले कुछ दिन ऐसे ही बीते। वो बहुत सतर्क रहती। दुपट्टा कभी नहीं खिसकने देती। मेरे पास आने नहीं देती। लेकिन मैं देखता कि कभी-कभी वो मेरी तरफ ऐसे देखती जैसे कुछ कहना चाहती हो, लेकिन बोल नहीं पाती।
एक दिन, लगभग 10-15 दिन बाद, फिर से घर में कोई नहीं था। उसके पापा-मम्मी किसी रिश्तेदार के यहाँ गए थे। खुशबू ने खुद मुझे मैसेज किया था कि आज टाइम पर आ जाना। मैं पहुँचा। दरवाज़ा खुला था। मैं अंदर गया। वो स्टडी रूम में बैठी थी। आज उसने व्हाइट कलर की सलवार कमीज पहनी थी। बहुत सादगी से। लेकिन उसकी आँखों में कुछ अलग था।
मैं बैठा।
उसने कहा, “सर… मैंने बहुत सोचा है। उस दिन जो हुआ… मैं डर गई थी। बहुत रोई। लेकिन…”
वो चुप हो गई।
मैंने पूछा, “लेकिन?”
वो शर्मा गई। बोली, “सर… मुझे अजीब लग रहा था। डर भी लग रहा था… लेकिन… जब आप… जब आपने… मुझे छुआ… तो कुछ… अच्छा भी लगा। मैं समझ नहीं पा रही थी। मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया।”
मेरा दिल जोर से धड़का। मैंने कहा, “खुशबू… तुम सच कह रही हो?”
वो सिर झुकाकर बोली, “हाँ सर… लेकिन मैं बहुत डरती हूँ। अगर किसी को पता चल गया तो… मेरी ज़िंदगी खराब हो जाएगी।”
मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा। इस बार उसने हाथ नहीं छुड़ाया। मैंने कहा, “खुशबू, मैं तुम्हें कभी नहीं सताऊँगा। जो भी होगा, तुम्हारी मर्ज़ी से।”
वो चुप रही। फिर धीरे से मेरी तरफ देखी। उसकी आँखों में शर्म और उत्सुकता दोनों थी। मैंने धीरे से उसकी तरफ झुका। उसने आँखें बंद कर लीं। मैंने उसके होंठों पर हल्का सा किस किया। वो काँप गई, लेकिन पीछे नहीं हटी। धीरे-धीरे मैंने उसे अपनी गोद में खींचा।
इस बार वो विरोध नहीं कर रही थी। मैंने उसके गले पर किस किया। वो हल्के से सिसकारी। “सर… धीरे…” मैंने उसकी कमीज के बटन खोले। ब्रा बाहर आई। मैंने ब्रा ऊपर की और उसके बूब्स को छुआ। वो बहुत नरम थे। मैंने उन्हें दबाया। वो कराही, “आह्ह… सर…” फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला। वो खुद उठी और सलवार नीचे कर दी। पैंटी गीली हो चुकी थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने पैंटी उतारी। उसकी चूत बहुत साफ थी, हल्के-हल्के बाल। मैंने उँगली से सहलाया। वो जोर से सिसकारी, “उफ्फ… सर…” मैंने उसे सोफे पर लिटाया। उसकी टाँगें फैलाईं और अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी। वो चीखी, “आआह्ह… सर… क्या कर रहे हैं…” मैंने चूसना शुरू किया। वो मस्त हो गई। उसके हाथ मेरे बालों में थे। वो दबा रही थी। “हाँ… ऐसे ही… आह्ह…” कुछ देर बाद वो झड़ गई।
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उसका पूरा शरीर काँप रहा था। फिर उसने मेरी तरफ देखा। बोली, “सर… अब आप भी…” मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा लंड खड़ा था। उसने पहली बार देखा और शर्मा गई। मैंने धीरे से उसके ऊपर चढ़ा। उसकी चूत पर लंड सटाया। वो बोली, “सर… धीरे… मुझे दर्द होगा…” मैंने धीरे से अंदर डाला। वो चीखी, “आह्ह… दर्द हो रहा है…” मैं रुका। फिर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। कुछ देर बाद वो भी साथ देने लगी। “हाँ… अब अच्छा लग रहा है…” हम दोनों मस्त हो गए। करीब आधे घंटे तक चुदाई चली।
आखिर में मैंने उसके अंदर ही झड़ दिया। वो भी साथ में झड़ गई। हम दोनों थककर लेट गए। वो मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “सर… ये हमारा राज रहेगा ना?” मैंने कहा, “हाँ खुशबू… हमेशा।” उस दिन से हमारा रिश्ता बदल गया। ट्यूशन के नाम पर हम हर बार मिलते। वो पहले जितनी इनोसेंट थी, अब उतनी ही मेरी हो चुकी थी। लेकिन हमेशा सावधानी बरतते। कोई नहीं जानता था। कहानी अभी भी जारी है… लेकिन वो पहले जैसी मासूम खुशबू अब नहीं रही। वो मेरी हो गई थी। पूरी तरह से।
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