Sex story होने वाली सास जुली की छिपी वासना
sex story होने वाली सास जुली की छिपी वासना
जुली की आँखें उस ठंडी रात में खुली हुई थीं, जैसे कोई अनकही बात मन में जाग रही हो। दिल्ली की सर्दी अब चरम पर थी। खिड़की से आती हवा पर्दों को हल्के-हल्के हिलाती, और कमरे में सिर्फ घड़ी की टिक-टिक और जुली की साँसों की हल्की आवाज़ गूंज रही थी। वो बिस्तर पर करवटें बदल रही थी, लेकिन नींद आँखों से कोसों दूर। कल उसकी इकलौती बेटी की सगाई पक्की हुई थी। प्रमोद – उसका होने वाला दामाद – आज शाम से ही घर में था, और रात को ठंड के कारण यहीं रुक गया। जुली का मन बार-बार उसी की तरफ जा रहा था। “ये क्या हो रहा है मेरे साथ?” उसने खुद से पूछा, लेकिन जवाब में सिर्फ एक गहरी सिसकी निकली। वो उठी, साड़ी को ठीक किया, और धीरे से कमरे से बाहर निकल आई। पानी पीने का बहाना था, लेकिन असल में मन को थोड़ा शांत करना चाहती थी।
घर पुराना था, लेकिन मजबूत। पति के जाने के बाद जुली ने इसे अकेले ही संभाला था। बेटी की पढ़ाई, घर की देखभाल, रिश्तेदारों से निपटना – सब कुछ। अब बेटी की शादी तय हो गई थी, और प्रमोद जैसे लड़के से मिलकर जुली को पहली बार लगा था कि शायद उसकी जिंदगी में कोई नई रोशनी आ सकती है। प्रमोद लंबा था, चौड़ी छाती, गोरी चमकती त्वचा, और आँखों में वो गहराई जो बात करते वक्त जुली को बार-बार अपनी ओर खींचती। “नहीं जुली, ये सोचना पाप है,” वो खुद को डाँटती, लेकिन मन नहीं मानता। रिश्ते की मर्यादा थी – वो सास बनने वाली थी, प्रमोद दामाद। मगर दिल की बातें मर्यादा नहीं मानतीं।
रसोई में पहुँचकर जुली ने फ्रिज खोला। ठंडा पानी गले से उतरा तो थोड़ा सुकून मिला। तभी पीछे से धीमी आवाज़ आई – “आंटी जी… आप भी जाग रही हैं?” जुली का दिल धक से रह गया। मुड़कर देखा तो प्रमोद खड़ा था। सिर्फ ग्रे बनियान और पजामा में। बनियान तंग थी, छाती की मांसपेशियाँ उभरी हुईं, और ठंड के बावजूद उसके बदन से एक गर्म लहर आ रही थी। “हाँ… नींद नहीं आ रही,” जुली ने नजरें झुकाकर कहा। प्रमोद पास आया, काउंटर पर हाथ टिका लिया। “मुझे भी नहीं। शायद नई जगह, नई जिम्मेदारियाँ…” उसकी आवाज़ में एक हल्की थकान थी, लेकिन आँखों में कुछ और। जुली को लगा कमरा छोटा हो गया हो। “कॉफी पीएँगे?” प्रमोद ने पूछा। जुली ने हल्के से सिर हिलाया।
कॉफी बनाते हुए दोनों चुप रहे। मगर वो चुप्पी बोल रही थी। जुली की नजरें बार-बार प्रमोद के हाथों पर जातीं – मजबूत, लंबी उँगलियाँ। वो सोच रही थी कि अगर ये उँगलियाँ उसके गाल पर फिरें तो… “बस कर जुली,” मन ने चेतावनी दी। प्रमोद ने मग थमाया। उँगलियाँ छू गईं। वो स्पर्श जुली के पूरे बदन में फैल गया, जैसे बिजली का झटका। वो जल्दी से मग ले आई और पीछे हट गई। “शुक्रिया,” उसने धीमे से कहा। प्रमोद मुस्कुराया – वो मुस्कान जो दिन में भी कई बार जुली को बेचैन कर गई थी। “आंटी जी, आप इतनी उदास क्यों लग रही हैं? सब ठीक हो जाएगा।” उसकी आवाज़ में इतनी नरमी थी कि जुली की आँखें भर आईं। दोनों रसोई की मद्धम रोशनी में खड़े रहे, कॉफी पीते हुए बातें करते। बेटी की शादी, घर की तैयारियाँ, छोटी-छोटी बातें। लेकिन हर बात के बीच एक अनकही चाहत हवा में तैर रही थी।
सुबह हुई। घर में हलचल शुरू हो गई – रिश्तेदार फोन कर रहे थे, सामान आ रहा था। प्रमोद भी मदद में जुटा हुआ था। लेकिन जुली और प्रमोद की नजरें मिलतीं तो दोनों झट से नजरें हटा लेते। दिन भर वो तनाव रहा। शाम को जब सब थककर आराम करने लगे, जुली बालकनी में खड़ी हो गई। ठंडी हवा उसके चेहरे को सहला रही थी। तभी प्रमोद आया। “आंटी जी… अकेले क्या कर रही हैं?” जुली मुस्कुराई, “बस… थोड़ी हवा ले रही हूँ।” प्रमोद उसके बगल में खड़ा हो गया। इतना करीब कि जुली उसके बदन की गर्माहट महसूस कर रही थी। “आप सच में बहुत खूबसूरत हैं,” प्रमोद ने अचानक कहा। जुली का दिल जोर से धड़का। “ऐसी बातें मत करो प्रमोद,” उसने हँसकर टालने की कोशिश की। लेकिन प्रमोद गंभीर था। “मैं सच कह रहा हूँ। आपकी आँखें… वो मुझे रोक नहीं पातीं।” जुली की साँस रुक गई। वो जानती थी ये गलत है, लेकिन सालों से छिपी वो भूख जाग रही थी। स्पर्श की, प्यार की, किसी के करीब आने की।
धीरे-धीरे बातें गहरी हो गईं। प्रमोद ने बताया कि वो अक्सर अकेला महसूस करता है। जुली ने भी अपने अकेलेपन का जिक्र किया – पति के जाने के बाद की खाली रातें। दोनों के बीच एक भावनात्मक धागा बंध रहा था। जुली की उँगलियाँ रेलिंग पर कस गईं। प्रमोद का हाथ धीरे से उसके हाथ के पास आया। “आंटी जी… क्या मैं…” वो रुक गया। जुली ने कुछ नहीं कहा। प्रमोद ने हाथ रख दिया। वो गर्माहट जुली के पूरे शरीर में फैल गई। “प्रमोद… ये नहीं होना चाहिए,” उसने धीमे से कहा, लेकिन आवाज़ काँप रही थी। प्रमोद ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। उनकी साँसें मिल रही थीं। फिर धीरे से उसके होंठ जुली के होंठों पर रख दिए। वो चुंबन नरम था, गहरा, और भूखा। जुली की आँखें बंद हो गईं। वो खुद को रोक नहीं पाई। कुछ पल बाद वो पीछे हटी। “नहीं… हम नहीं कर सकते।” आँखों में आँसू थे। प्रमोद ने उसे सीने से लगा लिया। “आंटी जी… मैं आपको बहुत चाहता हूँ।” जुली का मन टूट रहा था, लेकिन वो चाहत भी थी।
अगले दिन घर में और भीड़ थी। लेकिन जुली और प्रमोद के बीच अब एक अनकही समझ थी। नजरें मिलतीं तो दोनों शरमा जाते। शाम को जुली अपने कमरे में अकेली थी। साड़ी बदल रही थी। दरवाजा खुला और प्रमोद अंदर आ गया। “सॉरी… मैं…” वो रुक गया। जुली ने सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट पहना था। पीठ नंगी। प्रमोद की नजरें वहाँ ठहर गईं। “आंटी जी… आपकी त्वचा…” उसने धीरे से कहा और पास आया। उसने हल्के से पीठ पर हाथ फेरा। जुली सिहर उठी। “प्रमोद… दरवाजा बंद कर दो,” उसने काँपती आवाज़ में कहा। प्रमोद ने किया। अब कमरा सिर्फ उनका था। प्रमोद ने जुली को दीवार से सटाया। गले पर, कानों पर चुंबन करने लगा। जुली की साँसें तेज़ हो गईं। “आह… प्रमोद…” वो फुसफुसाई। प्रमोद के हाथ कमर पर फिसले, ब्लाउज की हुक खोली। जुली की चूत में मीठी जलन हो रही थी। वो गीली हो चुकी थी। “तुम्हारा लंड… मुझे छूने दो,” उसने शरमाते हुए कहा। प्रमोद ने पजामा नीचे किया। उसका लंड कड़ा, मोटा, गर्म। जुली ने हाथ में लिया, सहलाया। “आंटी जी… आपकी गांड कितनी मुलायम है,” प्रमोद ने कहा और पीछे से उसे पकड़ लिया।
दोनों बिस्तर पर आए। जुली ने प्रमोद को धकेला, ऊपर चढ़ गई। उसकी चूत लंड पर रगड़ रही थी। “धीरे… मुझे महसूस करो,” जुली ने कहा। प्रमोद ने उसके स्तनों को मुंह में लिया, चूसने लगा। जुली की आहें निकलीं – “आह… हाँ… चूसो मेरी चूचियाँ…” तभी बाहर किसी की आवाज़ आई। दोनों रुक गए। दिल धड़क रहे थे। जुली बोली, “रात को… फिर मिलेंगे।”
रात गहरी हो गई। घर सो चुका था। जुली अपने कमरे में इंतजार कर रही थी। प्रमोद चुपके से आया। दरवाजा बंद किया। अब कोई डर नहीं। प्रमोद ने जुली को बाहों में उठाया, बिस्तर पर लिटाया। कपड़े उतारे। जुली पूरी नंगी। उसकी चूत गीली, फूली हुई। “प्रमोद… मेरी चूत में डालो अपना लंड,” उसने फुसफुसाया। प्रमोद ने धीरे-धीरे घुसाया। जुली चीखी – “आह… कितना मोटा… धीरे…” प्रमोद ने धक्के शुरू किए। जोरदार, गहरे। जुली की गांड थपथपाई। “आंटी जी… आपकी चूत कितनी टाइट और गर्म है,” प्रमोद ने कहा। दोनों घंटों एक-दूसरे में खोए रहे। हर पोज में – पीछे से, सामने से, जुली ऊपर, प्रमोद नीचे। जुली की चूत से रस बहता रहा। “मैं तुम्हारी हूँ… बस तुम्हारी,” जुली ने कहा। आँखों में खुशी के आँसू।
सुबह दोनों थके हुए, लेकिन संतुष्ट। जुली को ग्लानि हुई, लेकिन प्रमोद ने उसे गले लगाया। “हम चुपके से मिलते रहेंगे।” जुली ने हाँ कहा। वो अब रोक नहीं सकती थी। शादी के बाद भी ये रिश्ता चुपके-चुपके चला। प्यार, वासना, और एक गहरा डर। जुली का जीवन अब अधूरा नहीं लगता था। प्रमोद की बाहों में उसे सुकून मिलता था। लेकिन हर रात वो सोचती – अगर किसी को पता चल गया तो? फिर भी, वो रातें अब उसकी जिंदगी का सबसे कीमती हिस्सा बन चुकी थीं।
