Sex story सास और बहू पूरी रात जन्नत में
sex story सास और बहू पूरी रात जन्नत में
Lesbian Sas Bahu Sex Story : मेरा नाम नेहा है। अब मैं २८ की हो चुकी हूँ, शादी को दस साल पूरे हो गए, दो बच्चे हैं – बेटा आठ साल का, बेटी पाँच की। जिंदगी नॉर्मल चल रही थी, घर संभालना, बच्चे स्कूल भेजना, पति की जॉब अच्छी है बैंक में, लेकिन वो थके हुए आते, डिनर करके सो जाते। रातें मेरी अकेली कटतीं, बदन में एक खालीपन सा रहता। मैं खुद को संभालती, लेकिन वो प्यास… वो जलन कभी-कभी रात को जगाती। लेकिन वो रात… मेरी सास और मैं फिर पूरी रात जन्नत में… आज भी याद करती हूँ तो नीचे अपने आप सिहरन हो जाती है, जैसे फिर वही मुलायम स्पर्श, वो गरम साँसें महसूस हो रही हों। सास जी का नाम सुनीता है, उम्र ५२ की, लेकिन देखने में ४२-४३ की लगतीं – गोरी चिट्टी, बाल काले घने जो कमर तक आते, चूचियाँ अभी भी भरी हुईं और टाइट, कमर थोड़ी मोटी हो गई लेकिन गांड चौड़ी और गोल, साड़ी में हिलती तो नजर हटती नहीं। पति के पापा गुजर गए थे बारह साल पहले, सास जी अकेली थीं तब से। वो मुझे बहुत प्यार करतीं, बहू नहीं बेटी कहतीं। घर का सारा काम साथ करतीं, बच्चे संभालतीं, रात को मेरे साथ बैठकर बातें करतीं। मैं भी उन्हें माँ जी कहती, लेकिन दिल से मानती।
लेकिन पिछले तीन-चार साल से कुछ बदलाव महसूस होने लगा था। सास जी की नजरें मेरे बदन पर ज्यादा रुकने लगीं। जब मैं नहाकर आती, बाल गीले, साड़ी बदन से चिपकी हुई, ब्लाउज में चूचियाँ उभरी हुईं, तो वो देखती रहतीं। मुस्कुरातीं, बोलीं, “नेहा… तेरी स्किन कितनी ग्लो करती है।” मैं शर्मा जाती, लेकिन मन में एक अजीब सी खुजली होती। पति दूर शहर में ट्रांसफर हो गए थे दो साल पहले, वीकेंड पर आते। घर पर मैं और सास जी ज्यादा टाइम साथ। वो मेरी मालिश करतीं अगर सर दर्द हो या कमर, उनके हाथ मुलायम, गरम। मैं सिहर जाती, लेकिन अच्छा लगता। कभी वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेरतीं, बोलीं, “नेहा… तू कितनी खूबसूरत है। तेरी बॉडी कितनी परफेक्ट। मैं जवान थी तो वैसी ही थी।” उनकी आवाज में एक उदासी होती, और कुछ और। मैं समझती थी – वो भी अकेली हैं कितने साल से। रात को मैं अकेले लेटकर सोचती, खुद को छूती, कभी सास जी के बारे में। गिल्ट होता – वो मेरी सास हैं, औरत हैं, लेकिन वो स्पर्श की याद… रुक नहीं पाती थी।
शुरुआत धीरे-धीरे हुई। एक बार बच्चे सो गए, पति बाहर। सास जी मेरे कमरे में आईं, बोलीं, “नेहा… नींद नहीं आ रही। बातें करें?” मैंने हाँ कहा। वो बेड पर बैठ गईं पास। बातें होने लगीं – घर की, बच्चों की, फिर पर्सनल। सास जी बोलीं, “नेहा… तू खुश है ना? बेटा दूर है, तेरी जरूरतें?” मैं शर्मा गई, चुप रही। वो हाथ मेरे कंधे पर रखा, सहलाने लगीं। बोलीं, “मैं समझती हूँ बेटी। मैं भी तो कितने साल से अकेली हूँ। बदन जलता है, लेकिन कोई नहीं।” उनकी आँखें भर आईं। मैंने उन्हें गले लगाया। वो लिपट गईं। उनकी चूचियाँ मेरी चूचियों से दब रही थीं। गरमी महसूस हुई। मैं सिहर गई। वो बोलीं, “नेहा… तू मेरी बेटी है, लेकिन औरत भी।” और मेरा चेहरा ऊपर किया, होंठों पर किस किया। पहले हल्के से, जैसे डर रही हों। मैं चौंकी, लेकिन रुकी नहीं। जवाब दिया। वो किस मीठा था, मुलायम। सालों की अकेलापन बाहर आ गया।
उस रात कुछ आगे नहीं बढ़ा, बस किस और गले लगना। लेकिन उसके बाद सब बदल गया। सास जी ज्यादा करीब आने लगीं। रात को मेरे कमरे में आतीं, साथ लेटतीं। हाथ मेरे बदन पर फेरतीं। मैं भी जवाब देती। धीरे-धीरे स्पर्श बढ़े – चूचियाँ दबाना, किस लंबे करना। लेकिन पूरी तरह नहीं हुआ। मैं डरती थी, वो भी। लेकिन प्यास बढ़ती गई।
असली रात आई पिछले महीने की। बच्चे स्कूल ट्रिप पर गए थे चार दिन के लिए। पति बाहर। घर पर सिर्फ मैं और सास जी। दिन भर हम साथ रहे, खाना बनाया, पुरानी फिल्में देखी। सास जी ने वाइन निकाली, बोलीं, “नेहा… आज मजा करें?” हम पीने लगीं। वाइन का असर हुआ, बातें खुल गईं। सास जी बोलीं, “नेहा… कितने टाइम से तुझे छूना चाहती हूँ। तेरी बॉडी देखकर जलती हूँ।” मैंने कहा, “माँ जी… मैं भी… आपकी याद में खुद को छूती हूँ।” हम हँसे, फिर लिपट गएं। वो रात पूरी जन्नत थी।
सास जी मुझे बेड पर ले गईं। लाइट डिम की। मेरी साड़ी उतारी धीरे-धीरे। ब्लाउज खोला। ब्रा उतारी। मेरी चूचियाँ बाहर। सास जी ने देखा, बोलीं, “नेहा… कितनी टाइट और गोरी हैं तेरी चूचियाँ… चूसूँ?” मैंने हाँ कहा। वो मुँह में लिया, चूसा जोर से। जीभ से निप्पल्स घुमाई। मैं तड़प रही थी, “माँ जी… आह… चूसो… तेरी बहू की चूचियाँ चूसो…” वो काटीं हल्के से। दर्द और मजा। उनका हाथ नीचे, पेटीकोट में। पैंटी गीली। बोलीं, “नेहा… कितनी तर हो गई है तेरी चूत… मेरी वजह से?” मैं शर्मा गई, बोली, “हाँ माँ जी… आपकी वजह से…” वो पैंटी उतारी। मेरी चूत पर उँगलियाँ घुमाईं। क्लिट दबाई। मैं कराही, “माँ जी… अंदर डालो…” वो दो उँगलियाँ अंदर डालीं। चूत गरम थी। वो चलाने लगीं। बोलीं, “नेहा… तेरी चूत कितनी टाइट है… कितने टाइम बाद छू रही हूँ किसी को…” मैं कमर उठा रही थी, “माँ जी… तेज… फाड़ दो…” वो उँगलियाँ तेज कीं। मैं झड़ गई, रस उनके हाथ पर बह गया। पूरा बदन काँपा।
फिर सास जी ने अपना गाउन उतारा। पूरी नंगी। उनकी चूचियाँ बड़ी, थोड़ी लटकी लेकिन मुलायम। निप्पल्स भूरे। मैंने दबाईं। बोलीं, “नेहा… दबा… चूस…” मैंने चूसीं। स्वाद अलग, लेकिन गरम। नीचे उनकी चूत – बाल सफेद मिश्रित, लेकिन गीली। मैंने छुआ। बोलीं, “नेहा… चाट… तेरी सास की चूत चाट…” मैं नीचे सरकी। जीभ से चाटने लगी। पहले बाहर, फिर क्लिट पर। सास जी तड़प उठीं, पैर फैला दिएं। “नेहा… आह… चाट… कितने साल बाद किसी ने चाटी… तेरी जीभ कमाल है…” मैं चाटती रही, जीभ अंदर डाली। उँगलियाँ क्लिट पर। सास जी झड़ीं, रस मेरे मुँह में। बोलीं, “नेहा… मजा आ गया… अब तेरी बारी फिर।”
हम 69 में आ गईं। मैं ऊपर, वो नीचे। एक-दूसरे की चूत चाटतीं। सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। सास जी की जीभ मेरी चूत में गहरी जा रही थी, मैं उनकी क्लिट चूस रही थी। हम दोनों साथ झड़ीं। फिर स्किसरिंग की – पैर फैलाकर चूत से चूत रगड़ीं। गरमी, गीलापन, रगड़। मजा जन्नत जैसा। सास जी बोलीं, “नेहा… ये जन्नत है… तेरी सास और तू पूरी रात जन्नत में…” मैं बोली, “हाँ माँ जी… आपकी चूत कितनी गरम है…” हम रगड़ती रहीं, झड़ीं फिर।
पूरी रात नहीं सोए। तीसरी बार सास जी ने मेरी चूचियाँ चूसीं, मैं उनकी गांड दबाई। चौथी बार उँगलियाँ एक-दूसरे में। सास जी ने तीन उँगलियाँ मेरी चूत में डालीं, मैंने उनकी। तेज-तेज। हम चिल्ला रही थीं। पाँचवीं बार सुबह शावर में। पानी के नीचे लिपटकर, चाटा-चुटी। सास जी दीवार से टिकीं, मैं नीचे बैठकर चूत चाटी। वो झड़ीं मेरे मुँह पर। फिर मैं टिकी, वो चाटीं।
सुबह नाश्ता बनाया साथ। हँसे, गले लगे। सास जी बोलीं, “नेहा… ये हमारा राज़ रहेगा। लेकिन फिर करेंगे?” मैंने हाँ कहा। अब जब घर खाली, हम साथ सोतीं। सास जी मेरी मालिश करतीं, फिर चुदाई। बच्चे सो जाएँ तो चुपके से। मेरी सास और मैं फिर पूरी रात जन्नत में… अब आदत हो गई। पति को शक नहीं। गिल्ट होता कभी – समाज क्या कहेगा, लेकिन वो सुकून, वो प्यार… सास जी कहतीं, “नेहा… तू मेरी जिंदगी है अब।” मैं मान जाती। ये राज़ हमारा, शायद हमेशा। आज लिखकर लगा जैसे फिर जी रही हूँ वो रात। हल्का हो गई।
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