sex story sunita bhabi ki chudai
sex story sunita bhabi ki chudai सुनीता भाभी की बड़ी चुचियाँ और मोटी गाँड की कामुक देसी सेक्स कहानी। चचेरी भाभी के साथ छुपी हुई प्यास कैसे रेप जैसे जोश में पूरी चुदाई तक पहुँची – चूत मारना, मुँह में लंड, गाँड फाड़ना और बार-बार चोदने की सच्ची हॉट स्टोरी। भाभी की चूत और गाँड की प्यास बुझाने वाली फुल मसाला सेक्स कहानी हिंदी में।
सुनीता भाभी मेरी चचेरी भाभी हैं, उम्र करीब 29 साल। वो बेहद खूबसूरत और कामुक औरत हैं – गोरी-चिट्टी त्वचा, जो धूप में भी चमकती है, बड़ी-बड़ी 38D की चुचियाँ जो हर कपड़े में उभरी हुई लगती हैं, मोटी और गोल-मटोल गाँड जो चलते वक्त लहराती है, और कद करीब 5 फुट 4 इंच। उनके चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान रहती है, आँखों में गहरा काजल और होंठों पर ब्राउन लिपस्टिक, जो उन्हें नवविवाहित जैसा लुक देती है। लेकिन सच तो ये है कि उनके दो बच्चे हैं – एक 7 साल का बेटा और दूसरी 5 साल की बेटी। भैया बॉम्बे में नौकरी करते हैं, और काम की व्यस्तता की वजह से 3-4 महीने में एक बार ही घर आ पाते हैं। घर आने पर भी थकान और समय की कमी से भाभी को वो ध्यान नहीं दे पाते, जो एक जवान औरत को चाहिए।
भाभी हमेशा खुश और मस्तमौला रहती हैं। मेरे साथ उनकी बॉन्डिंग बहुत गहरी है – मैं तो कहता हूँ कि मैं उनका सबसे करीबी दोस्त हूँ। हम साथ घूमने जाते हैं, मार्केट शॉपिंग करते हैं, मूवी देखते हैं, रेस्टोरेंट में डिनर करते हैं। मोटरसाइकिल पर जब वो मेरे पीछे बैठती हैं, तो पूरी तरह चिपक जाती हैं – उनकी नरम और भारी चुचियाँ मेरी पीठ पर दब जाती हैं, गर्माहट महसूस होती है। रास्ते में लोग हमें देखकर पति-पत्नी समझते हैं। भाभी हर शाम सजती-संवरती हैं – सेक्सी साड़ी, लो-कट ब्लाउज, या टाइट कुर्ती, जो उनके कर्व्स को और उभारती है। वो जानबूझकर ऐसा करती हैं, जैसे अपनी कामुकता को छुपाना नहीं चाहतीं।
एक शाम कॉलेज से लौटते ही भाभी ने कहा, “चलो मिंटू, मार्केट चलना है, कुछ सामान लेना है।” मैं तैयार हो गया और हम निकल पड़े। बाजार में उन्होंने कपड़े चुने, और साथ में कुछ ब्रा-पैंटी भी। पैसे कम थे, तो मुझसे उधार ले लिया और मुस्कुराकर बोलीं, “घर पहुँचकर दे दूँगी।” मैं शर्मा गया, लेकिन कुछ कह नहीं सका। ऐसा पहले भी कई बार हुआ है – भाभी मेरे साथ ही अपनी इंटीमेट चीजें खरीदती हैं, कभी रास्ते के ठेले से भी ब्रा या पैंटी उठा लेती हैं, और मुझे दिखाकर हँसती हैं।
एक दोपहर कॉलेज से जल्दी घर लौटा तो मुख्य दरवाजा खुला था। अंदर से हल्की-हल्की सिसकारियाँ और अजीब आवाजें आ रही थीं। जिज्ञासा वश चुपके से अंदर झाँका तो जो देखा, दंग रह गया। भाभी मेरे कमरे में मेरे कंप्यूटर पर पोर्न मूवी चला रही थीं – स्क्रीन पर एक औरत जोर-जोर से चुद रही थी। भाभी कुर्सी पर बैठी थीं, साड़ी ऊपर उठी हुई, और हाथ में एक मोटी मूली थी, जिसे वो अपनी चूत में धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रही थीं। उनकी आँखें बंद थीं, होंठ काट रही थीं, और सिसकारियाँ निकल रही थीं – “आह… ओह… और जोर से…” ये देखकर मेरा दिमाग सुन्न हो गया। कभी सोचा नहीं था कि भाभी इतनी भूखी हैं, और वो भी मेरे कंप्यूटर पर। मैं तुरंत बाहर निकला और जोर से आवाज करके अंदर घुसा।
भाभी भागती हुई आईं – चेहरा लाल, पसीना छूट रहा था, साड़ी ठीक करती हुईं। वो बैचेन और घबराई हुई लग रही थीं। मैंने कुछ नहीं कहा, खाना खाया और कमरे में सोने चला गया। लेकिन नींद कहाँ आती? सपने में बार-बार भाभी और वो मूली घूमने लगी। कभी लगता मैं खुद भाभी को जोरदार धक्के मार रहा हूँ, उनकी चुचियाँ मसल रहा हूँ। नींद में ही मेरा लंड झड़ गया – गीला हो गया। उठकर बाथरूम गया, साफ किया और लौटा।
शाम को भाभी ने चाय के लिए बुलाया। अब मेरे मन में सिर्फ एक ही ख्याल था – भाभी को चोदना। बाहर आया तो देखा वो ब्लैक साड़ी और डीप नेक ब्लाउज में थीं – गहरा क्लिवेज साफ दिख रहा था, चुचियाँ जैसे बाहर आने को बेताब। चाय देते हुए वो मेरे बगल में बैठ गईं। बातें शुरू हुईं, लेकिन मैं बार-बार उनके क्लिवेज को घूर रहा था। अचानक जोश में आकर मैंने झुककर उनके होंठों पर किस कर लिया। भाभी चौंक गईं, “अरे मिंटू, ये क्या कर रहे हो?” लेकिन मैं रुका नहीं, फिर किस किया। वो विरोध करने लगीं, हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन मैंने उनके हाथ पकड़ लिए और होंठों को अपने में जकड़कर चूसने लगा। उनकी ब्राउन लिपस्टिक का स्वाद, नरम होंठ – मैं पागल हो गया। दस मिनट तक चूसता रहा, जीभ अंदर डालकर उनका रस चाट लिया।
जब छोड़ा तो भाभी होंठ पोंछते हुए गुस्से से बोलीं, “साले कमीने, अपनी भाभी पर बुरी नजर? हरामी, मैं तुझे अच्छा समझती थी, तू तो मुझे चोदना चाहता है!”
मेरा गुस्सा भड़क उठा। मैंने उन्हें उठाकर सोफे पर पटक दिया। “कुतिया, नाटक बंद कर! मेरे कंप्यूटर पर पोर्न देखती है, मूली से चूत मिटाती है, और अब सती-सावित्री बन रही है? आज तेरी सारी इज्जत लूटकर तेरी माँ चोदूँगा!”
भाभी छटपटाने लगीं, धक्का दिया, एक जोरदार थप्पड़ मारा। मेरे गाल पर जलन हुई, लेकिन मैंने उनका पैर पकड़ लिया। वो गिर पड़ीं, चक्कर सा आ गया। मैंने उन्हें गोद में उठाया, कमरे में ले जाकर बिस्तर पर लिटाया और दो हल्के थप्पड़ मारे। “बोल, खुद से चुदवाएगी या जबरदस्ती करूँ?”
कंप्यूटर ऑन करके वही पोर्न मूवी चला दी। भाभी स्क्रीन की तरफ देखने लगीं। मैंने उनकी चुचियों पर हाथ रखा तो झिड़क दिया, “साले, तू मुझे नहीं चोद पाएगा!”
मैंने उनकी साड़ी खींच ली – वो मेरी बाहों में आ गईं। फिर होंठ चूसने लगा। 20 मिनट की किसिंग में भाभी मस्त होने लगीं – सिसकारियाँ निकलने लगीं। साड़ी पूरी उतार दी, उनकी मोटी गाँड दबाने लगा – नरम और गर्म। आगे से चूत पर हाथ फेरा तो पेटीकोट गीला था, रस बह रहा था। चुचियाँ मसलने लगा, ब्लाउज के ऊपर से चूसने लगा। जैसे ही छोड़ा, भाभी भागने की कोशिश की। मैंने ब्लाउज पकड़कर खींचा – फट गया, ब्लैक ब्रा में बड़ी-बड़ी चुचियाँ उछलने लगीं। सीढ़ियों पर पकड़ लिया, ब्लाउज पूरी फाड़ दी। ब्रा खींची तो संगमरमर जैसी सफेद चुचियाँ बाहर आ गईं – गुलाबी निप्पल कड़े हो गए। पेटीकोट फाड़ दिया, भाभी एकदम नंगी हो गईं। मैं उन्हें निहारता रह गया – परफेक्ट बॉडी, चूत पर हल्के बाल, गाँड गोल और भरी हुई।
भाभी मौका देखकर अपने कमरे में भागीं। दरवाजा बंद करने लगीं तो मैंने पैर अड़ा दिया – चोट लगी। भाभी ने दरवाजा खोला, मेरा पैर पकड़कर बोलीं, “अरे, चोट तो नहीं लगी बेटा?” मैं हैरान रह गया।
फिर वो खुद मेरे पास आईं, नंगी बॉडी हिलाती हुईं – चुचियाँ ऊपर-नीचे। “क्या हुआ मिंटू, जोश ठंडा पड़ गया? अब नहीं चोदेगा अपनी भाभी को? आज मौका है, चोद ना साले! डर गया क्या?”
मैंने उनकी चुचियाँ पकड़ लीं, लंड बाहर निकालकर उनके मुँह पर रगड़ने लगा। वो नखरे दिखाने लगीं, लेकिन मैंने निप्पल ऐंठे तो सिसकारियाँ निकलने लगीं – “आह… ओई माँ…” चुचियाँ मुँह में लेकर चूसने-काटने लगा। भाभी मचल उठीं।
मेरा 8 इंच का मोटा लंड उनके हाथ में दिया। देखकर वो हैरान हुईं, आँखें बंद कीं, लेकिन फिर सहलाने लगीं। मैंने उन्हें उठाकर खड़े लंड पर बैठा दिया – एक झटके में पूरा अंदर। भाभी चीखीं, “मादरचोद, निकाल! फट गई चूत… दर्द हो रहा है!”
लेकिन मैंने कमर पकड़ी, ऊपर-नीचे करने लगा। फिर गोद में उठाकर सोफे पर लिटाया और जोरदार धक्के मारने लगा। भाभी चीख रही थीं, “धीरे… मत चोदो… इज्जत मत लूटो!”
मैं बोला, “साली, तू ही तो जोश दिला रही थी, अब सह!”
धीरे-धीरे उनका विरोध मस्ती में बदल गया। सिसकारियाँ कामुक हो गईं – “आह… चोदो मिंटू… कसके चोदो… चूत में खुजली है सालों से… फाड़ डालो… मैं तेरी रंडी हूँ आज… भैया का लंड छोटा है, मजा नहीं देता… तेरा लंड तो स्वर्ग है… तेज मार यार!”
भाभी अब पूरी तरह साथ दे रही थीं – होंठ चूम रही थीं, नाखून पीठ पर गड़ा रही थीं। मैंने टाँगें कंधों पर रखीं, गहराई तक पेला। भाभी दो बार झड़ गईं – चूत से रस की बौछार। मैंने कहा, “भाभी, मैं भी आ रहा हूँ…” और चूत में ही सारा माल डाल दिया। भाभी संतुष्ट होकर मुझे चूमने लगीं, “साले, रेप ही कर डाला… लेकिन क्या मजा आया… तेरा लंड तो कमाल है… दिल करता है तुझे हमेशा का रखैल बना लूँ।”
फिर बोलीं, “चल, अपना मस्त लंड चटाऊँ।” आइसक्रीम की तरह 15 मिनट चाटीं-चूसीं – जीभ से टॉप तक, गेंदें मुँह में लीं। मैंने चेताया, “पानी निकलेगा…” वो बोलीं, “चूत में लिया तो मुँह में क्यों नहीं… डाल साले!” मैंने मुँह में झड़ दिया, वो सब पी गईं और मुस्कुराईं।
फिर मैंने उनकी चूत चाटी – रस चाटा, उँगलियाँ डाली। वो मचल उठीं, “कसके चाट यार… जीभ अंदर डाल…” मैं काटने-चूसने लगा। वो बोलीं, “गालियाँ बुरा मत मानना, भैया ने सिखाई हैं… वो मुझे ऐसे ही चोदते थे।”
साइड पोजीशन में फिर लंड डाला – चूत सूजी हुई थी, टाइट। धीरे-धीरे पूरा अंदर। भाभी अब मजा ले रही थीं, खुद ऊपर चढ़कर उछलने लगीं। ये राउंड 35 मिनट चला – चूत फूलकर लाल हो गई।
फिर हम बाथरूम गए। मैंने उन्हें लंड पर बैठाया, दोनों ने साथ मूत दिया – गर्माहट महसूस हुई। भाभी शर्मा गईं, लेकिन हँसकर बोलीं, “कितना गंदा है तू!” शावर लिया, एक-दूसरे को साबुन लगाया, चुचियाँ और लंड सहलाए।
अब गाँड की बारी थी। उँगली डाली तो भाभी उछल पड़ीं, कमरे में भागीं, दरवाजा बंद किया। मैंने धक्का देकर खोला। वो बिस्तर पर पेट के बल लेटीं, हाथ गाँड पर। “नहीं दूँगी साले… गाँड मत मार!”
मैंने मनाया, “एक बार ट्राई करो, मजा आएगा।” वो मानीं, “भैया मार चुके हैं, दर्द होता है… तेरा इतना मोटा… धीरे करना।”
उँगली से खोला, लंड पर थूक लगवाया। पहले फिसला, तो हाथ-पैर बाँध दिए। धीरे-धीरे अंदर किया। भाभी चीखीं, “निकाल हरामी… फट गई गाँड!” लेकिन 30 धक्कों बाद मैं झड़ गया। गाँड से हल्का खून निकला।
भाभी अब खुद माँगने लगीं, “मार साले… फाड़ दे गाँड… तीनों छेद आज तेरे… तेज पेल… मैं तेरी रंडी हूँ!” मैंने बंधन खोले। वो डॉगी स्टाइल हो गईं – खुद चुचियाँ मसल रही थीं, चूत में उँगली। हम दोनों साथ झड़े। गाँड फट चुकी थी, लेकिन भाभी खुश।
बोलीं, “तूने फाड़ दी गाँड… लेकिन स्वर्ग दिखा दिया… अब तू मेरा असली मर्द है… जब मन करे, चोद लेना… मैं तेरे लंड की गुलाम हूँ।”
मैंने सहारा देकर पेशाब कराया, जंडू बाम लगाया। रात खाना खाया, ब्लू फिल्म देखते हुए सोए – एक-दूसरे से लिपटकर।
आज पाँच साल बीत गए। हम अलग रहते हैं, लेकिन जब भी मन करता है, मैं उनके घर जाता हूँ और चोदता हूँ – जैसे चाहूँ, जहाँ चाहूँ। भाभी पूरी तरह मेरी हो गई हैं – उनकी चूत, गाँड और मुँह, सब मेरे लिए।