Sex story शादी में मिली अनजान महिला की चुदाई
sex story शादी में मिली अनजान महिला की चुदाई
मेरा नाम विक्रम है। अब ३२ का हूँ, शादीशुदा, एक बच्चा भी है। लेकिन वो रात… वो शादी वाली रात आज भी मेरे लंड में एक झनझनाहट सी पैदा कर देती है। मुझे आज भी याद है उस अनजान औरत की चूत की गर्मी, उसकी चूचियों की मुलायमाहट, और वो सिसकारियाँ जो वो मेरे कान में ले रही थी। शादी में मिली अनजान महिला की चुदाई… ये शब्द लिखते ही बदन में आग लग जाती है। मैंने कभी किसी को नहीं बताया ये सब। बीवी को तो बिलकुल नहीं। बस मन में दबाकर रखा था। आज पहली बार खोल रहा हूँ, जैसे कोई पुराना बोझ उतर रहा हो।
वो २०१८ की बात है। मेरा दोस्त रोहित की शादी थी, दिल्ली के बाहर एक बड़े फार्महाउस में। मैं अकेला गया था। कुछ महीने पहले गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप हुआ था, मन खाली-खाली सा था। शादी में खूब भीड़ थी – रिश्तेदार, दोस्त, दूर के मेहमान। मैं बार काउंटर के पास खड़ा अकेले पी रहा था। तभी नजर पड़ी उस पर। लाल साड़ी में थी, गोरी, लम्बे बाल खुल्ले, कमर पतली और गांड भरी हुई। उम्र २८-३० की लग रही थी। अकेली खड़ी थी, ग्लास हाथ में लिए, दूर बैंड बाजा सुन रही थी। लगा दुल्हन पक्ष की कोई रिश्तेदार। मैंने सोचा चल, बात कर लेता हूँ, टाइम पास हो जाएगा।
पास गया, बोला, “हाय, आप अकेली लग रही हैं। रोहित को जानती हैं?” वो मुड़ी, मुस्कुराई। आँखें बड़ी, होंठ मोटे-गुलाबी। बोली, “हाँ, दूर की मौसी लगती हूँ। आप?” मैंने अपना नाम बताया, कहा दूल्हे का कॉलेज फ्रेंड हूँ। नाम उसका रिया था। बातें शुरू हुईं। पहले शादी की भीड़ की, मौसम की, फिर पर्सनल। वो बोली कि शादी में आकर अच्छा नहीं लग रहा क्योंकि अपनी लाइफ में सब उलझा हुआ है। पति से अलग हो रही थी, तलाक का केस चल रहा था। मैंने अपना ब्रेकअप वाला किस्सा सुनाया। दस-पंद्रह मिनट में ही लगा जैसे सालों से जानते हों। उसकी हँसी में एक उदासी थी, जो मुझे खींच रही थी।
डांस फ्लोर पर लोग नाच रहे थे। वो बोली, “चलो नाचते हैं?” मैंने हाँ कह दी। हम नाचे। पहले दूर, फिर करीब आते गए। उसकी साड़ी की खुशबू नाक में घुस रही थी। उसका हाथ मेरे कंधे पर, मेरा उसकी कमर पर। उस पल मेरा दिल तेज धड़क रहा था। मेरी नजर उसके ब्लाउज में झाँक रही थी – चूचियाँ भरी हुईं, गहरी क्लीवेज। मेरा लंड पैंट में टाइट होने लगा। वो भी शायद फील कर रही थी। नजरें मिलतीं तो दोनों शर्मा जाते। वो हँसकर बोली, “विक्रम, तुम अच्छा नाचते हो।” मैंने कहा, “तेरी वजह से।” मेरे हाथ उसकी कमर पर नीचे सरक रहे थे, गांड के करीब। वो रोक नहीं रही थी।
रस्में खत्म हुईं, देर रात हो गई। ज्यादातर लोग अपने रूम्स में चले गए। हम बाहर लॉन में बैठे थे। ठंडी हवा चल रही थी। वो बोली, “नींद नहीं आ रही। चलो वॉक करें?” हम फार्महाउस के पिछले हिस्से में घूमने लगे। जगह सुनसान थी, पेड़ों के बीच अंधेरा। बातें और गहरी हो गईं। वो अपने पति की बातें करने लगी – कैसे धोखा दिया, कैसे अकेला छोड़ दिया। आँखें भर आईं उसकी। मैंने कंधा दिया। वो मेरे सीने से लग गई। उसकी चूचियाँ मेरे सीने से दब रही थीं, गर्मी महसूस हो रही थी। मैंने उसके बाल सहलाए। फिर चुप्पी। नजरें मिलीं। मैंने धीरे से उसके होंठ चूम लिए। वो चौंकी नहीं, जवाब दिया। किस गहरा होता गया। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। मेरे हाथ उसकी कमर पर, फिर गांड पर। वो सिहर रही थी।
मैंने पूछा, “रिया, ये ठीक है?” वो बोली, “आज के लिए ठीक है विक्रम। बहुत टाइम हो गया किसी ने छुआ भी नहीं।” हम एक दीवार के पीछे छुप गए। मैंने उसे दीवार से सटाया, फिर किस किया। साड़ी का पल्लू सरका दिया। ब्लाउज के ऊपर से चूचियाँ दबाईं। इतनी मुलायम, इतनी भरी हुईं। निप्पल्स सख्त हो गए थे। वो सिसकारी, “आह… विक्रम…” मैंने ब्लाउज के हुक खोले, ब्रा ऊपर की। चूचियाँ बाहर आ गईं – गुलाबी निप्पल्स। मैंने मुँह में लिया, चूसा। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। मेरी पैंट में लंड पत्थर सा हो गया था। वो हाथ नीचे ले गई, लंड पर दबाया। बोली, “कितना सख्त है…”
मैं खुद को रोक नहीं पाया। हाथ उसकी साड़ी में डाला, पेटीकोट ऊपर किया। पैंटी गीली थी। मैंने उँगलियाँ अंदर डालीं – चूत पूरी तर थी, गर्म। वो कमर उछाल रही थी। “विक्रम… कर ना…” वो बोली। लेकिन बाहर था, रिस्क था। वो बोली, “मेरा रूम खाली है। चल।” हम चुपके से उसके रूम में घुसे। दरवाजा बंद किया तो वो मुझे खींचकर किस करने लगी। मैंने साड़ी पूरी उतार दी। वो सिर्फ ब्रा-पैंटी में। बॉडी कमाल की – पेट फ्लैट, जाँघें मोटी। मैंने ब्रा उतारी, चूचियाँ चूसीं, काटा। वो कराह रही थी। फिर पैंटी नीचे की। चूत पर हल्के बाल, गुलाबी। मैंने जीभ फेरी। वो तड़प उठी, पैर फैला दिए। मैं चाटता रहा, क्लिट चूसता रहा। वो झड़ गई पहली बार, पूरा बदन काँपा।
फिर उसने मेरी पैंट उतारी। लंड बाहर आया। वो बोली, “वाह… कितना मोटा है।” हाथ से सहलाया, फिर मुँह में लिया। गर्म मुँह, जीभ घुमा रही थी। मैं पागल हो रहा था। फिर वो बेड पर लेट गई, पैर फैलाए। मैं ऊपर आया। लंड को चूत पर रगड़ा। वो बोली, “डाल ना… सह नहीं जा रही।” मैंने धीरे से डाला। चूत टाइट थी, गर्म, गीली। पूरा अंदर गया। वो चीखी थोड़ी, फिर मुझे कसके पकड़ लिया। मैं धक्के मारने लगा। धीरे-धीरे, फिर तेज। उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, मैं दबाता रहा। वो बोली, “जोर से… आह… चोद मुझे…” शादी में मिली अनजान महिला की चुदाई ऐसे हो रही थी जैसे सालों की भूख निकल रही हो।
मैंने उसे घुमाया, पीछे से डाला। गांड दबाते हुए, कमर पकड़कर जोर-जोर से मारा। वो तकिए में मुँह दबाकर चिल्ला रही थी। फिर वो ऊपर आई। खुद कमर हिलाने लगी। लंड अंदर-बाहर। उसकी चूत से आवाजें आ रही थीं। आखिर में मैं उसके अंदर झड़ गया। वो भी साथ में झड़ी। हम पसीने से तर, लिपटकर लेट गए। वो बोली, “कितने टाइम बाद ऐसा लगा।” मैंने उसे किस किया।
सुबह हुई तो हम फिर शुरू हो गए। नहाने के बहाने शावर में। पानी के नीचे मैंने उसे फिर चोदा। दीवार से टिकाकर, पीछे से। उसकी गांड पर थप्पड़ मारे। वो मजा ले रही थी। ब्रेकफास्ट के बाद भी एक राउंड और। वो मेरे लंड को चूसती रही, मैं उसकी चूत चाटता रहा। शादी की विदाई तक हम रूम में ही रहे ज्यादातर।
विदाई के टाइम वो चली गई। हमने नंबर नहीं लिए। बस एक आखिरी किस। मैं घर आया तो सब नॉर्मल। लेकिन वो यादें… शादी में मिली अनजान महिला की चुदाई… आज भी लंड खड़ा कर देती हैं। कभी-कभी सोचता हूँ कि रिया कहाँ होगी, क्या किसी और के साथ होगी। गिल्ट होता है कभी, लेकिन ज्यादा सुकून। वो रात ने मुझे जिंदा फील कराया। आज लिखकर हल्का लगा। शायद ये आखिरी बार हो।
