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जितेन्द्र एक एमएनसी में सीनियर एग्जीक्यूटिव था। उनकी उम्र 35 साल, दिखने में वो काफी स्मार्ट, लंबाई 5’9” और तंदुरुस्त शरीर वाला इंसान था। जितेन्द्र की सैलरी 2,00,000 प्रतिमाह थी। उनकी पत्नी समीक्षा भी काफी मॉडर्न औरत थी, उम्र 32 साल। वो भी एक प्राइवेट फर्म में असिस्टेंट मैनेजर की पोस्ट पर काम करती थी। समीक्षा महीने की 1,00,000 तक कमा लेती थी। Free Desi Real Sex Story
समीक्षा दिखने में बेहद सुंदर थी। दोनों की शादी के 4 साल हो गए थे पर कोई बच्चा नहीं था। घर के कामकाज के लिए उन्होंने एक नौकमीना रखी थी। नाम था उसका मीना, उम्र 30 साल, सांवला रंग, थोड़ी मोटी, बड़ी काली आँखें, उसकी छाती और गांड उभरी हुई थीं पर दिखने में ठीक-ठाक थी।
उसकी शादी नहीं हुई थी और वो पास ही के एक चॉल में अपने बूढ़े बाप के साथ रहती थी। उसका काम था घर की साफ-सफाई, खाना बनाना और कपड़े धोना। जितेन्द्र और समीक्षा के काम पर चले जाने के बाद वही घर पर रहती थी। उसके यहाँ आए हुए 3-4 महीना ही हुआ था।
मीना के लिए शुरू के एक महीने तक सब ठीक चला। बाद में उसने महसूस किया कि जितेन्द्र साहब उसकी तरफ कुछ आकर्षित हो रहे थे। उसने भी उन्हें पटाने के बारे में सोचा। जितेन्द्र और समीक्षा की सेक्स लाइफ भी कुछ खास नहीं थी। काम से थके होने के कारण उन्हें सेक्स में कोई इंटरेस्ट नहीं रहता था।
रात को देर से आते थे और सुबह जल्दी चले जाते थे। छुट्टी के दिन भी समीक्षा किसी किट्टी पार्टी या फंक्शन में मशगूल रहती थी। जितेन्द्र घर पर ही रहता था पर अकेला। वो सेक्स में दिलचस्पी रखता था। कम से कम छुट्टी के दिन वो अपनी पत्नी के साथ बिताना चाहता था पर समीक्षा उनसे दूर ही रहती थी।
एक छुट्टी के दिन जितेन्द्र काफी देर तक सो रहा था। समीक्षा सुबह ही तैयार होकर किसी मीटिंग में चली गई। रोज की तरह मीना सुबह-सुबह आ गई। पहले उसने घर की सफाई का काम शुरू किया। वो पोछा करते-करते जितेन्द्र के कमरे में जा पहुँची। जितेन्द्र लुंगी और बनियान पहना हुआ था।
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उसने लुंगी के नीचे कुछ नहीं पहना था जो कि उसकी आदत थी। इस वजह से उसका लंड खड़ा हो गया था और लुंगी से बाहर झांक रहा था। उस भाग से लुंगी अलग हो गई थी और सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था। मीना जैसे ही जितेन्द्र के कमरे में पहुँची उसकी नजर जितेन्द्र के लंड पर पड़ी जो तना हुआ था।
मीना एकदम अवाक होकर वहीं देख रही थी। काफी देर तक वो उसे निहारती रही। शायद इससे पहले उसने ऐसा कुछ देखा न था। ये देखकर वो भी धीरे-धीरे गरमाने लगी। वो साड़ी के ऊपर से अपनी चूत खुजलने लगी। थोड़ी देर के बाद उसने अपनी चूत में गीलापन महसूस किया।
वो उसे छूना चाहती थी पर घबरा रही थी कि कहीं साहब जाग न जाएँ। इतने में जितेन्द्र की आँख खुली और तब झट से मीना नीचे बैठकर पोछा करने लगी। जितेन्द्र ने पाया कि उसकी लुंगी अपनी जगह से हटी हुई थी और फिर वो उसे ठीक करते हुए उठ गया। उसने देखा तो मीना पोछा लगा रही थी।
उसे थोड़ा शक सा हो गया कि कहीं मीना ने उसे नंगे हालत में देख न लिया हो। जितेन्द्र नहा-धोकर तैयार हो गया तभी उसकी पत्नी का फोन आया कि वो शाम तक ही घर लौटेगी। जितेन्द्र फिर उदास हो गया। उसने मीना को चाय बनाने के लिए कहा। थोड़ी देर में मीना चाय बनाकर लाई।
उसने जितेन्द्र के चेहरे पर उदासी देखकर पूछा “क्या हुआ साहब, उदास लग रहे हो”
जितेन्द्र ने कहा “कुछ नहीं”।
मीना समझ गई साहब की परेशानी क्या है। उसने सोचा क्यों न साहब को अपनी तरफ आकर्षित किया जाए। उनकी परेशानी क्यों न वो दूर करे। फिर वो जितेन्द्र का कुछ ज्यादा ही खयाल रखने लगी। हर रोज काम खत्म करने के बाद वो जल्दी घर चली जाती थी। लेकिन अब थोड़ी देर तक वहाँ रुकती थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
जितेन्द्र के आने के बाद, मीना उसे खाना परोसती थी और उनके खाने के बाद ही वो घर जाती थी। समीक्षा काफी देर से घर आती थी। फिर संडे का दिन आया और समीक्षा सुबह अपनी किसी सहेली के घर चली गई थी। जितेन्द्र सुबह जल्दी उठ गया था। मीना ने सोचा पिछली बार की तरह इस बार भी कुछ मौका मिल जाए तो पर उसने देखा तो जितेन्द्र उठकर पेपर पढ़ रहा था।
रोज की तरह वो झाड़ू लगाकर पोछा मारने लगी। वो घुटनों के मोड़कर अपनी चौड़ी गांड थोड़ी फैलाकर पोछा कर रही थी। उसने अपनी साड़ी घुटनों तक चढ़ा लिया था। उसने ब्लाउज थोड़ा लो कट पहना हुआ था जिससे उसके बूब्स के ऊपरी हिस्से नजर आ रहे थे। पेपर पढ़ते-पढ़ते जितेन्द्र की नजर अचानक सामने पोछा करती हुई मीना पर पड़ी।
उसने देखा मीना की साड़ी और पेटीकोट घुटनों से भी नीचे उसकी जाँघों तक सरकी हुई थी जिससे उसकी मांसल जाँघें और अंदर की पीली रंग की पैंटी हल्की सी नजर आ रही थी। थोड़ी देर तक जितेन्द्र उसे देखता रहा। तब मीना थोड़ी और झुककर सोफे के नीचे पोछा करने लगी।
इस पोजिशन में उसके बूब्स के काफी भाग नजर आ रहे थे और दोनों बूब्स के बीच का कटाव भी दिख रहा था। ये सब देखकर जितेन्द्र की हालत खराब होने लगी। उसका लंड लुंगी से बाहर आ गया। वो अपनी लंड को दबाकर रखने की कोशिश करने लगा। मीना ये सब देख रही थी। वो धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी।
मीना अपने आप को कामयाब होते हुए देख रही थी। उसने सोचा अगर जितेन्द्र को उसने अपने बस में कर लिया तो वो इस घर की मालकिन तक बन सकती है। वो फिर मालकिन बनने के सपनों में खो गई। फिर उसे अलमारी के ऊपर से कुछ सामान उतारना था। वो एक लंबी स्टूल डालकर उसके ऊपर चढ़ गई।
उसे सामान उतारकर नीचे रखना था इस काम के लिए उसने जितेन्द्र को आवाज लगाई। जितेन्द्र आ गया। मीना ने कहा “साहब आप जरा ये लेकर नीचे रख दो”। जितेन्द्र सामान पकड़ने के लिए स्टूल के करीब आया और ऊपर की ओर नजर की। उसकी नजर सीधी मीना के साड़ी के अंदर वाली पीली पैंटी पर पड़ी। वो वहीं जम गया।
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मीना ने कहा “क्या देख रहे हो साहब, ये सामान जरा पकड़ो”।
इतने में जितेन्द्र को होश आया। उसने कहा कुछ नहीं। फिर मीना कुछ उतारने के लिए अपना हाथ ऊपर किया तब जितेन्द्र ने देखा कि उसकी ब्लाउज थोड़ी फटी हुई थी और उसके हाथ के नीचे के बाल दिख रहे थे। फिर उसने अपनी नजर मीना के साड़ी के अंदर डाली और वो उसकी जाँघ और पीली पैंटी को निहार रहा था।
इतने में मीना ने सामान उतारकर जितेन्द्र को दिया। फिर उसने कहा “साहब जरा यहाँ से उतरने में मदद करोगे”। जितेन्द्र ने कहा क्यों नहीं। और मीना झुककर जितेन्द्र के कंधों को पकड़ लिया और जितेन्द्र ने उसे अपने सीने से जकड़ लिया। ऐसा करते हुए मीना के बूब्स को अपने छाती पर महसूस किया और फिर जितेन्द्र ने अपना हाथ उसके गोल-गोल गांड पर भी फेर लिया।
मीना ये सब महसूस करने पर भी अनजान बनी रही। एक दिन काम से जब जितेन्द्र घर लौटा तो उसने मीना को आवाज लगाई। मीना ने कहा “मैं नहा रही हूँ साहब। अभी आती हूँ थोड़ी देर में”। जितेन्द्र ने सोचा यही मौका है उसके नंगे बदन को देखने का। वो बाथरूम के की-होल में जाकर झांकने लगा। लेकिन उसे सिर्फ उसका पिछवाड़ा ही देखने को मिला। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इतने में मीना ने एक लाइट ब्लू कलर की पैंटी और काले रंग की ब्रा पहन ली। जितेन्द्र उसके नंगे पिछवाड़े को देखकर अपना लंड पकड़कर वहीं मुठ मारने लगा। इतने में मीना ने झट से दरवाजा खोला और देखा उसका साहब वहीं दरवाजे के पास बैठकर मुठ मार रहे थे। उसने सिर्फ ब्रा और पैंटी ही पहनी थी। उसे पता नहीं था कि साहब उससे यहाँ इस हालत में मिलेंगे। जितेन्द्र हक्का-बक्का रह गया और तुरंत वहाँ से चला गया।
मीना कपड़े पहनने के बाद वापिस आई और कहा कोई बात नहीं साहबजी मैं आपकी हालत समझती हूँ। जब आपकी बीवी ही आपकी भावनाओं का खयाल नहीं रखती तो ऐसा होना ही है। आप अगर चाहें तो मैं आपकी हर इच्छा पूरी कर सकती हूँ। मैं भी आपको पाना चाहती हूँ। जब से मैंने आपके लंड को देखा है तब से मेरी चूत बेचैन है। ये सब आप चाहें तो हम…..
जितेन्द्र ने कहा लेकिन मेरी बीवी को पता चल गया तो…
मीना ने कहा मैं तो उन्हें कुछ नहीं बताऊँगी। हमें बस थोड़ी सावधानी रखनी होगी।
ये सुनकर जितेन्द्र खुश हो गया। उसने तभी मीना को पकड़कर चूम लिया। मीना भी अपने आप को रोक नहीं पाई और वो जितेन्द्र की बाँहों में समा गई। दोनों काफी देर तक चुम्मा-चाटी करते रहे। एक दिन समीक्षा ने कहा कि वो 3-4 दिन के लिए ऑफिस के काम से बाहर जा रही है।
जितेन्द्र ने ये सुनकर अफसोस होने का नाटक करने लगा। वो मन ही मन खुश हो रहा था कि अब वो मीना के साथ आराम से जो चाहे कर सकता है। दूसरे दिन समीक्षा टूर के लिए निकल गई। जितेन्द्र घर पर ही था। थोड़ी देर के बाद मीना आ गई।
मीना ने पूछा “साहब तुम काम पर नहीं गए”।
जितेन्द्र ने कहा नहीं मीना हम 3-4 दिन छुट्टी पर हैं और तुम्हारे साथ सारा दिन बिताएँगे।
मीना ने कहा “लेकिन मेमसाब”।
जितेन्द्र ने उसे गला से लगाते हुए कहा “वो 3-4 दिन के लिए कहीं बाहर गई है। अब हम दोनों ऐश करेंगे”।
मीना ये सुनकर खुश हो गई। जितेन्द्र उसे लेकर बेडरूम में गया। उसने मीना को बेड पर लेटा दिया। और फिर धीरे-धीरे उसकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर किया।
मीना ने कहा “लगता है साहब तुम बहुत जल्दी में हो”।
जितेन्द्र ने कहा “हाँ मीना मैं कब से तुम्हारी चूत और गांड देखना चाहता था लेकिन अब मौका मिला है”।
फिर उसने मीना के दोनों टाँगें उठाकर अपने कंधे पर रख दिया। अब उसे मीना की जाँघें दिख रही थीं। उसने देखा तो मीना ने काली रंग की पैंटी पहनी हुई थी। पैंटी भी यहाँ-वहाँ से थोड़ी फटी हुई थी। जितेन्द्र आगे बढ़कर उसकी पैंटी उतार दी।
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जितेन्द्र ने कहा “मीना तुम्हारी पैंटी तो फटी पुरानी है”।
मीना ने कहा “क्या करें साहब गरीब हूँ, फटी पुरानी से ही काम चलाना पड़ता है”।
फिर जितेन्द्र उसकी चूत के घने बालों पर हाथ सहलाने लगा। धीरे-धीरे जितेन्द्र उसकी चूत के छेद में उंगली डालने लगा और अंदर-बाहर करने लगा। मीना पानी के बिना मछली की तरह तड़पने लगी। वो चिहुँक उठी और बोली “गुदगुदी हो रही है साहब”।
जितेन्द्र ने कहा “अभी आगे और भी मजा आएगा”।
फिर वो झुककर उसकी चूत के छेद को खोलकर उसमें अपनी जीभ डालकर उसे चूमने और चाटने लगा। जितेन्द्र की नाक में उसकी चूत के बाल घुस रहे थे। मीना मस्त होती जा रही थी। इतने में जितेन्द्र ने अपना सिर उठा लिया। मीना शिकायत करती हुई नजरों से पूछा “क्या हुआ साहब। आपने क्यों रोक दिया”।
जितेन्द्र बोला “मुझे बाल वाली चूत पसंद नहीं है। तुम यहाँ से बाल क्यों नहीं निकाल देते”।
मीना बोली “मुझे ये सब कहाँ पता है साहब। आप खुद ही कर लो”।
जितेन्द्र अपना रेजर लेकर आया फिर मीना को कहा अपनी दोनों टाँगें पूरी तरह फैला दो। मीना ने ऐसा ही किया। जितेन्द्र फिर रेजर से उसके चूत के बाल शेव कर दिया। शेव करने के बाद जितेन्द्र ने उस पर अपना हाथ फेरा। अपनी जीभ से उसकी शेव किया हुआ चूत पर चूमने और चाटने लगा।
मीना को मजा आ रहा था। फिर जितेन्द्र खड़ा होकर मीना को भी खड़ा कर दिया फिर उसकी साड़ी और पेटीकोट उतार दी। नीचे से वो एकदम नंगी हो गई। अब उसके जिस्म पर सिर्फ ब्लाउज और काले रंग की ब्रा थी। जितेन्द्र ने उसे भी उतार दिया। अब मीना पूरी तरह नंगी खड़ी थी जितेन्द्र के सामने। जितेन्द्र उसे घूर रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मीना को शर्म आ रही थी। जितेन्द्र उसके पीछे जाकर उसके दोनों हाथ ऊपर उठा लिया। फिर अपने दोनों हाथ आगे लाकर मीना के बूब्स को दबाने लगा। उसके निप्पल्स को मसलने लगा। मीना के पीठ को चूम रहा था। फिर जितेन्द्र उसके गांड के नीचे बैठ गया और उसके दोनों गांड को पकड़कर फैला दिया। उसने देखा तो मीना के काले रंग के गांड के छेद दिखाई दिए।
फिर वो अपना मुँह उसकी छेद के पास लाकर अपनी जीभ उसकी गांड की छेद में डाल दी। जीभ से उसकी गांड को चाट रहा था। ये सब करने से मीना गरम होती जा रही थी। उसे लगा कि अभी वो झड़ जाएगी और एकदम ही उसकी चूत में से पानी का फव्वारा छूट पड़ा। उसका पानी उसकी जाँघों से बह रहा था। जितेन्द्र ने ये देख लिया और आगे आकर उसकी चूत और जाँघों को अपनी जीभ से साफ करने लगा।
मीना ने कहा “साहब तुम मेरे मजे लूटे जा रहे हो, मुझे भी तो अपना कुछ दिखाओ”।
जितेन्द्र ने कहा “तुम खुद ही देख लो”।
जितेन्द्र जाकर बेड पर लेट गया और मीना उसके ऊपर बैठ गई। फिर उसने जितेन्द्र की बनियान उतार दी। उसके छाती पर बाल थे। वो बालों पर हाथ फिराने लगी। उसने फिर उसकी लुंगी उतार दी। लुंगी के नीचे जितेन्द्र ने कुछ न पहना था। एकदम ही उसका लंड उछलकर मीना के सामने आ गया।
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पहले तो वो घबरा गई फिर उसने अपने हाथों में भरकर उसे सहलाने लगी। सहलाने से वो एकदम तनकर खड़ा हो गया। मीना ने उसे अपने होंठों से चूमा। उसके चारों ओर चाटने लगी फिर उसे अपने मुँह में भर लिया। वो जितेन्द्र के लंड को चूसती जा रही थी। जितेन्द्र ने चिल्लाया “मीना मेरा अभी छूटने वाला है”।
मीना का ध्यान ही नहीं था। जैसे नल में से पानी निकलता है वैसे ही जितेन्द्र के लंड ने पानी छोड़ दिया और मीना उसे पीये जा रही थी। उसके मुँह के दोनों तरफ से थोड़ा-थोड़ा पानी बाहर निकल रहा था। फिर जितेन्द्र ने अपना लंड उसके मुँह से निकाल दिया। जितेन्द्र बाथरूम की ओर चल पड़ा। थोड़ी देर के बाद वो नहा-धोकर बाहर आ गए।
मीना ने कहा “क्यों साहब आपका दिल भर गया हमसे”।
जितेन्द्र ने कहा “नहीं डार्लिंग अभी तो पूरी रात बाकी है। मैं जरा बाहर जाकर आता हूँ। तुम तब तक कुछ खाने का बंदोबस्त करो।”
जितेन्द्र बाहर जाकर कुछ लेकर आया। मीना भी नहा-धोकर एक गाउन पहनी हुई थी। जितेन्द्र ने पूछा “तुमने ये समीक्षा की गाउन लेकर क्यों पहना”। मीना “साहब अभी मैं ही तो आपकी समीक्षा हूँ”। मीना ने गाउन ऊपर उठाकर बताया कि उसने समीक्षा की ब्रा और पैंटी भी पहन ली है।
जितेन्द्र ने कहा “हाँ तुम ये सब तुम चाहे तो रख लो। मैंने ये सब समीक्षा को लेकर दिया था। पर वो इसे पहनकर मेरे पास कभी नहीं आई। हमारे बीच अभी तक ऐसे कुछ नहीं हुआ जो एक पति और पत्नी के बीच होना चाहिए”।
मीना ने कहा “मैं समझती हूँ साहब। मुझे भी एक मर्द का सुख चाहिए जो आप दे सकते हैं और मैं आपको एक औरत का सुख दे सकती हूँ”।
जितेन्द्र ने पूछा “तुमने खाना बना लिया”।
मीना ने कहा “हाँ रोटी और थोड़ी सब्जी है”।
“देखो मैंने ये आइसक्रीम लाया हूँ”।
“ठीक है हम खाना खा लेते हैं” मीना ने कहा।
जितेन्द्र ने कहा पहले तुम खा लो मैं बाद में खाऊँगा।
मीना खाना खाकर जितेन्द्र के पास खाना लेकर पहुँची। जितेन्द्र ने कहा तुम अब नंगी हो जाओ और फर्श पर लेट जाओ। मीना ने अपना गाउन, ब्रा और पैंटी उतार दिया और फर्श पर लेट गई। जितेन्द्र ने कहा आज मैं तुम्हारे जिस्म के प्लेट से खाना खाऊँगा। जितेन्द्र ने रोटी मीना के पेट पर और सब्जी उसके चूत पर रख दिया और खाने लगा।
खाना खत्म करने के बाद जितेन्द्र ने आइसक्रीम निकालकर मीना के चूत पर फैला दिया और उसे चाटने लगा। मीना आहें भर रही थी वो अपने हाथों से अपने बूब्स को मसल रही थी। जितेन्द्र ने अपना लुंगी उतारकर अपने लंड पर आइसक्रीम लगा दी और मीना उसके लंड से आइसक्रीम को चूसने लगी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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जितेन्द्र मीना के ऊपर 69 पोजिशन में लेट गया और उसकी चूत से लेकर गांड की छेद तक जीभ फिराने लगा। उसकी चूत की होंठों को चूसने लगा। मीना उसके लंड को चूसती जा रही थी। ऐसा करते-करते दोनों सो गए। सुबह मीना की आँखें खुल गईं। उसे जोर की पेशाब लगी थी।
वो उठकर अपना चूत ठीक जितेन्द्र के मुँह के सामने तान दिया और फिर उसकी चूत से मूत्र की धारा बहने लगी। जितेन्द्र एकदम से अपनी आँखें खोली और पाया कि उसका मुँह पूरा गीला हो गया है और पेशाब की बू आ रही थी। तब उसने मीना को हँसते हुए देखा। वो समझ गया ये मीना की हरकत है।
वो उठकर मीना को अपने नीचे लेटा दिया और अपना लंड उसके मुँह में घुसेड़ दिया और उसके मुँह में मूत दिया। दोनों फिर हँसने लगे। मीना अपने कपड़े पहनने लगी तब जितेन्द्र ने उसके कपड़े छीन लिया और कहा तुम नंगी ही अच्छी लगती हो। मीना ने कहा “अच्छा साहब और आपने जो कपड़े पहन रखे हैं”।
जितेन्द्र ने कहा “ठीक है हम भी नंगे हो जाते हैं, हम दोनों घर में नंगे ही घूमा करेंगे”। जैसे ही मीना किचन की ओर जा रही थी जितेन्द्र ने पीछे से जाकर उसकी गांड में उंगली डाल दी। मीना एकदम उछल पड़ी। फिर जितेन्द्र ने दूसरी हाथ की उंगली उसकी चूत में डाल दी।
इस तरह वो मीना की गांड और चूत के छेद को उँगलियों से चोदने लगा। मीना को खूब मजा आ रहा था। जितेन्द्र ने अपनी दोनों उँगलियाँ निकालकर उसे अपने मुँह में रख दिया और उँगलियों को चूसने लगा। मीना ने कहा “साहब आप तो बड़े वो हैं। जाने क्या-क्या करते रहते हैं”।
जितेन्द्र ने पूछा “तुझे अच्छा लगता है ये सब”।
मीना “हाँ साहब बहुत अच्छा लगता है”।
मीना ने खाना तैयार कर दिया। तब जितेन्द्र ने आवाज लगाई “मीना इधर आकर मुझे जरा नहला दो”। मीना तुरंत बाथरूम की ओर दौड़ गई। उसने जितेन्द्र के ऊपर पानी डाला और फिर साबुन मलने लगी। वो उसके लंड को ज्यादा ही प्यार और हल्के से साफ कर रही थी। मीना ने जितेन्द्र के गांड की छेद में उंगली डाल दी और उसकी भी सफाई की। जितेन्द्र ने भी मीना की अच्छी तरह सफाई की और दोनों बाथरूम से बाहर आ गए। दोनों ने खाना खा लिया।
जितेन्द्र ने कहा “चलो मीना अब थोड़ा आराम करते हैं”।
मीना ने कहा “साहब मुझे अभी भूख लगी है”।
जितेन्द्र “क्या कह रही हो, अभी तो खाना खाया”।
मीना “आपकी जिस्म की भूख”।
जितेन्द्र “मैं समझ गया। चलो उस भूख भी मिटा देते हैं”।
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फिर जितेन्द्र उसके ऊपर आ गया और उसकी सर, गाल और कान को चूमने लगा, कभी-कभी हल्का सा काट भी लेता। जितेन्द्र दोनों हाथों से उसके बूब्स को दबाने लगा और फिर उसके निप्पल्स को चूसने लगा। धीरे-धीरे वो उसकी पेट के ऊपर चूमाचाटी करने लगा और उसकी नाभि पर जीभ से फेरने लगा।
अब वो उसकी चूत के पास आ गया। वहाँ से उसकी चूत की गंध आ रही थी। उसकी चूत में से लार बह रही थी। जितेन्द्र पहले उसके जाँघों को सहलाया, चूमा-चाटा और फिर उँगलियों से उसकी चूत को खोला। पहले वो उंगली डालकर गोल-गोल घुमाया। मीना चिहुँक उठी। उसने कहा “साहब सहन नहीं होता। आपका लंड मेरी चूत में डाल दो”।
जितेन्द्र “थोड़ा सब्र करो मीना अभी मेरे लंड को भी तैयार तुम्हें करना है”। मीना समझ गई और उसने जितेन्द्र के लंड को अपने मुँह में भरकर धीरे-धीरे चूसने लगी। थोड़ी देर में जितेन्द्र का लंड एकदम किसी डंडे के तरह खड़ा हो गया। पहले तो जितेन्द्र मीना के मुँह को खूब चोदा अपने लंड से।
मीना की तो जैसे साँसें रुक गई हों ऐसी लग रही थी। जब जितेन्द्र को लगा कि वो झड़ने वाला है उसने अपने लंड को मीना की चूत के द्वार पर रख दिया और धीरे से धक्का दिया। लेकिन उसका मोटा लंड अंदर जा नहीं रहा था। तब मीना ने अपने कमर को उठा लिया और जितेन्द्र ने फिर धक्का लगाया।
इस बार लंड का मुँह मीना की चूत में घुसा। थोड़ा और धक्का देने पर आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। मीना चिल्ला उठी “ओह साहबजी मैं मर गई”। उसकी चूत बेहद टाइट थी। पहली बार चुदवा रही थी। जितेन्द्र ने कहा “कोई बात नहीं मीना पहली बार ऐसा होता है। बाद में तुम्हें मजा आएगा”।
जितेन्द्र ने धीरे से अपना लंड निकाला फिर एक जोरदार धक्का दिया। इस बार लंड पूरा घुस गया और मीना को ऐसा लगा जैसे उसकी चूत फट गई हो। उसकी चूत में से थोड़ा खून निकला। वो डर गई। जितेन्द्र “डरो मत मीना। पहली चुदाई में ऐसा होता है”। फिर जितेन्द्र अपना लंड को अंदर-बाहर करने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसकी रफ्तार बढ़ रही थी। मीना को भी अब मजा आने लगा। वो भी अपने कमर को हिलाकर पूरा सहयोग दे रही थी। उसने अपनी टाँगें V शेप में फैला दिया। मीना ने अपने चूत में लावा जैसा गरम कुछ महसूस किया। जितेन्द्र ने अपना पानी पूरा मीना के चूत में खाली कर दिया। दोनों पूरी तरह निढाल हो चुके थे। जितेन्द्र का लंड अभी भी मीना की चूत में था। उसने धीरे से अपना लंड को बाहर निकाला। अब उसका लंड सिकुड़ गया था।
जितेन्द्र “क्यों मीना तुम्हारी जिस्म की भूख कम हुई”।
मीना “हाँ साहब, बहुत मजा आया। लेकिन भूख तो बाद में लगेगी”।
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जितेन्द्र ने कहा “कोई बात नहीं। हम हमेशा तुम्हारी भूख मिटा देंगे”।
मीना “लेकिन मालकिन आ जाएगी तब हम कैसे ये सब….”
जितेन्द्र “तुम मत घबराओ। मैं उससे तलाक दे दूँगा”।
मीना “साहबजी मैं भी यही कहने वाली थी। जो बीवी अपने पति को सुख न दे सके उससे तलाक ही ले लेना चाहिए”।
जितेन्द्र “मैंने अपना बीज तुम्हारे चूत में बोया है, तलाक के बाद हम दोनों शादी कर लेंगे।”
मीना ये सुनकर बहुत खुश हो गई और वो जितेन्द्र के सर, गाल और होंठों को चूम लिया। उस दिन रात को भी उन्होंने खूब चुदाई की। दूसरे दिन सुबह जितेन्द्र ने कहा “मीना मुझे तुम्हारे गांड को भी एक बार चोदना है”। मीना “इसमें पूछना क्या है साहब। मैं तो अब पूरी आपकी हूँ। जो चाहे कर सकते हो”।
जितेन्द्र “ठीक है तुम अपना गांड मेरी तरफ करके दीवार के सहारे खड़ी हो जाओ”।
मीना खड़ी हो गई। फिर जितेन्द्र किचन से जैम और मक्खन लेकर आया और वो मीना के गांड खोलकर उसके बाहर और छेद के अंदर मक्खन और जैम लगा दिया। पहले तो अपनी जीभ से वो उसकी गांड में चिपके हुए जैम को चाटने लगा। बाद में अपना लंड मीना की गांड की छेद के पास लाया।
अपने दोनों हाथों से उसने मीना के बूब्स पकड़ लिए। पहले वो बूब्स को दबाने और मसलने लगा। जब मीना इस मजे में लीन हो गई जितेन्द्र ने अपना लंड एक धक्के में उसकी गांड में घुसा दिया। मीना दर्द के मारे चिल्ला उठी। “ओह साहबजी निकाल दो। मैं मर जाऊँगी”। लेकिन जितेन्द्र कहाँ सुनने वाला था।
वो मजे से उसकी गांड की चुदाई कर रहा था। दर्द के मारे मीना बेहोश होकर गिर गई। जितेन्द्र डर गया। उसने मीना को उठाकर बेड पर लेटा दिया। उसके चेहरे पर पानी छिड़का। थोड़ी देर में वो होश में आ गई। उसने कहा “माफ करना साहब। दर्द के मारे मैं बेहोश हो गई थी”।
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जितेन्द्र ने कहा “कोई बात नहीं”। फिर दोनों ने एक-दूसरे को नहलाया। तब जितेन्द्र को ध्यान आया कि कल समीक्षा आने वाली थी। वो सोच में डूब गया। मीना “क्या सोच रहे हो साहब”। जितेन्द्र “कल तुम्हारी मेमसाब आने वाली है”। मीना भी थोड़ी उदास हो गई। उस रात भी वो दोनों एक-दूसरे की बाँहों में गुजारे।
दोनों सुबह जल्दी उठ गए और नहा-धोकर कपड़े पहन लिए। जितेन्द्र ऑफिस चला गया। मीना घर के काम करने लगी। दोपहर में समीक्षा घर पहुँची। उसने मीना से पूछा साहब ऑफिस गए हैं क्या। मीना ने हाँ में गर्दन हिला दी। समीक्षा फिर आराम करने चली गई। शाम को जितेन्द्र वापिस घर आया।
मीना तब भी घर पर थी। समीक्षा भी घर पर ही थी। जितेन्द्र को मीना के साथ कुछ वक्त बिताना था पर समीक्षा के होने से वो डर रहा था। इतने में समीक्षा वहाँ आ गई और उसने जितेन्द्र से हाल-चाल पूछा। दोनों में थोड़ी बातचीत हुई। फिर समीक्षा ने कहा मैं नहाकर आती हूँ।
समीक्षा जैसे ही बाथरूम में गई जितेन्द्र दौड़कर मीना के पास गया और उसे गले लगा लिया। उसे पागलों की तरह चूमने लगा। फिर नीचे बैठकर उसकी साड़ी उठाकर उसकी जाँघों, गांड और चूत को बुरी तरह चाटने लगा। मीना भी आँख बंद किए हुए सिसकारियाँ भर रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
इतने में टॉवल लेने के लिए समीक्षा बाथरूम से बाहर आ गई। सिसकारियाँ सुनकर वो किचन की ओर चल पड़ी। और वहाँ उसने जो नजारा देखा उससे देखकर उसके होश उड़ गए। वो चिल्ला उठी “जितेन्द्र ये क्या हो रहा है।” जितेन्द्र और मीना आवाज सुनकर समीक्षा की तरफ देखा। वो भी स्तब्ध रह गए। समीक्षा ने कहा “इसका मतलब ये हुआ कि जब मैं तीन दिन के लिए यहाँ नहीं थी तब तुम दोनों ने खूब गुलछर्रे उड़ाए होंगे।
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उसने कहा “मीना तुम अभी इस घर से निकल जाओ”। जितेन्द्र ने कहा “मीना कहीं नहीं जाएगी। ये मेरा घर है। और जब तुम सब जान ही गई हो तो एक बात और सुन लो मैं तुमसे तलाक चाहता हूँ। मैं मीना से शादी करने जा रहा हूँ। वैसे भी हमारे शारीरिक संबंध हो चुके हैं। मेरे और तुम्हारे बीच तो पति-पत्नी जैसे कोई रिश्ता था ही नहीं”। समीक्षा ने कहा ठीक है। जो इतनी नीच हरकत कर सकता है ऐसा पति नहीं चाहिए मुझे। मैं जा रही हूँ। तुम रहो इस अनपढ़, गँवार के साथ अपनी पत्नी बनाकर।
जितेन्द्र “अनपढ़, गँवार ही सही लेकिन उसने एक पत्नी के रूप में मेरी हर जरूरत पूरी की है। मैं भी उसकी हर जरूरत पूरा करूँगा”। इस तरह समीक्षा और जितेन्द्र में तलाक हो गया। बाद में जितेन्द्र ने मीना से शादी कर ली। फिर दोनों पति-पत्नी खूब चुदाई और मजे किए। दोनों जब भी घर में होते नंगे ही घूमते। जितेन्द्र मीना के बूब्स को चूमता, उसकी गांड में उंगली डालता। चूत में चिमटी भरता। मीना भी उसकी लंड को दबाती, गांड को छूटी रहती थी।
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