xnxx जेठजी ने चोदा पूरी रात
sex story जेठजी ने चोदा पूरी रात
Jethji sex story: मेरा नमस्कार आप सभी को। एक दिन जब मैं ऑफिस से लंच टाइम में छुट्टी लेकर शॉप से अपनी पत्नी के लिए नाइटी और ब्रा पैंटी लेकर घर गया और अपनी पत्नी को दे दिया। मेरी पत्नी नेहा ने मुझसे खाना खाने को कहा। मैंने खाना खाने के बाद नेहा से कहा, “जाओ रूम में जाकर चेक करो कि फिटिंग ठीक है या नहीं। मैं अभी आता हूं और दरवाजा खुला रखना।”
नेहा ने कहा, “ठीक है।” मैं कुछ देर बाद रूम में गया। दरवाजा खुला था। जैसे ही मैं रूम में घुसा और देखा कि नेहा बिल्कुल नंगी खड़ी थी। उसका पूरा गोरा बदन कमरे की हल्की रोशनी में चमक रहा था। उसके हाथ में नई ब्रा थी। मुझे देखते ही उसने मुस्कुराते हुए कहा, “पहले दरवाजा तो बंद कर लो नहीं तो देवरानी आ जाएगी।” मैंने पूछा, “वो घर में है क्या?” नेहा ने कहा, “वो सासू मां के पास रमेश के साथ खेल रही है। आप चिंता मत करो डार्लिंग, वो नहीं आएगी।”
अरे, मैं तो दरवाजा बंद करना भूल गया। जब मैंने नेहा के हाथ से ब्रा खींचकर उसके नंगे स्तनों को दोनों हाथों से जोर से दबाना शुरू किया तो नेहा बोली, “पहले कपड़े चेक करने दो, बाद में जो इच्छा हो कर लेना। मैं थोड़े ही कहीं जाने वाली हूं।” मैंने उसे छेड़ते हुए बोला, “बाद में क्या?” वो हंसते हुए कहने लगी, “आपको हर दम मजाक सूझता है।” मैं फिर से उसके स्तनों को और जोर से दबाने लगा। मेरी उंगलियां उसके मुलायम लेकिन दृढ़ मांस में धंस रही थीं। मैंने पूछा, “बाद में क्या?” तो वो बोली, “वही जो आप रोज करते हैं।” मैंने पूछा, “वही क्या?” तो वो बोली, “जाओ मैं आपसे बात नहीं करती।”
मैंने उसकी दोनों निप्पल्स को अपनी अंगुलियों के बीच चुटकी से मसलना शुरू किया। पहले हल्के से, फिर धीरे-धीरे जोर बढ़ाते हुए। नेहा की सांसें तेज हो गईं। उसकी निप्पल्स सख्त होकर खड़ी हो गईं। मैंने कहा, “पहले बताओगी नहीं तो मैं छोड़ूंगा नहीं।” वो दर्द और खुशी के मिश्रण से तड़पने लगी। उसका बदन थोड़ा झुक गया, उसकी आंखें बंद हो गईं और वो बोली, “मुझे चोद लेना।”
अब तक वो भी पूरी तरह मूड में आ चुकी थी। उसकी चूत से थोड़ी सी गर्म नमी बहने लगी थी। मैंने पूछा, “किससे चोदना है और किसको चोदना है?” तो वो शरमाते हुए लेकिन कामुक स्वर में बोलने लगी, “आपके लंड से मेरी चूत को। बस अब मुझे चेक करने दो।” मैं भी बहुत गर्म हो गया था। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा होकर पैंट में तन गया था। मुझे अब सब्र नहीं हो रहा था। मैंने कहा, “मैं तुझे अभी चोदूंगा।” तो वो बोली, “मेरी चूत आवारा नहीं है जो कि तुम जब चाहो तब चोद दो। जरा सब्र करने में ही फायदा है।” कहते हुए उसने मुझे हल्का धक्का दे दिया।
मैं रूम से बाहर जाकर सीधा मोनिका के ऊपर गिरा। मोनिका अपने रूम में जा रही थी, मैं उसके ऊपर गिर गया। हम दोनों भाई के रूम के बीच में स्टोर रूम है, रास्ता लिविंग रूम से अंदर आना पड़ता है। मैंने रूम का दरवाजा झट से बंद कर दिया। जब मैं मोनिका के ऊपर गिरा तो वो भी गिरी और संभलकर उठी। मोनिका आंखें बंद करके “उई मां” कर रही थी। जैसे ही मैं उसे उठाने लगा तो मैंने देखा कि उसकी साड़ी का पल्लू हट गया था और उसके आधे से ज्यादा गोरे, कड़े स्तन बाहर निकल आए थे। वे सांस लेने के साथ हल्के-हल्के ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैं उन्हें देखकर सपना देखने लगा।
मोनिका ने आंखें खोलकर मुझे देखते ही कहा, “जेठजी आप…” मैंने मोनिका को छोड़ दिया और पूछा, “चोट तो नहीं आई?” तो वो बोली, “कोई बात नहीं।” मोनिका के पैर में चोट लगी थी। उसने अपना पल्लू ठीक करके बोली, “मेरे पैर में मोच आई है।” मैं बोला, “मैं तुझे अपने रूम में पहुंचाकर आता हूं।” और मैंने मोनिका का हाथ पकड़कर अपने रूम में बेड पर लिटा दिया। जैसे ही मैं मुड़ा तो देखा कि मोनिका बेड पर आंखें बंद करके लेटी है और साड़ी का पल्लू भी साइड में पड़ा है। तब मैंने मोनिका के पास गया और उसका पल्लू ठीक करके कहा, “मैं अभी नेहा को भेज देता हूं।” तो वो बोली, “ठीक है।” और एक सेक्सी स्माइल दी।
वह समझ चुकी थी कि मैं उस पर लाइन मार रहा हूं। मैं आपको मोनिका का फिगर बताता हूं। हाइट 5 फीट 8 इंच, स्तन छोटे थे लेकिन कड़े और गोरे-गोरे, बाल लंबे और कमर पतली। मैं भी स्माइल देकर वापस अपने रूम का दरवाजा जोर-जोर से खटखटाने लगा। नेहा ने दरवाजा खोलकर पूछा, “क्या है?” मैंने उसे बताया कि मोनिका को पैर में चोट लगी है, जल्दी जाकर मसाज करो। मैं बेड पर लेट गया। नींद कब लगी पता ही नहीं चला और जब उठा तो शाम हो गई थी। मैंने उठकर मुंह धोया फिर घूमने चला गया।
रात को डिनर के टाइम हम लोग बैठे थे तभी मोनिका मेरी तरफ शरमाते हुए देखने लगी। नेहा को मालूम नहीं था कि हमारे और मोनिका के बीच क्या हुआ था। मैंने धीरे से पूछा, “अब दर्द कैसा है?” तो वो शरमाते हुए बोली, “ठीक है।” ऐसे ही चार-पांच दिन निकल गए। रविवार का दिन था। दोपहर में मैं बनियान में था और नेहा को रूम में बुलाकर उसकी साड़ी खींच रहा था।
नेहा बोली, “ठहरो, मैं देखकर आती हूं। रमेश को मां जी के पास सुला कर आती हूं और देखकर आती हूं कि बाकी लोग क्या कर रहे हैं।” मैं एक बात आपको बता देता हूं कि कल मेरा छोटा भाई बिजनेस कॉन्फ्रेंस पर दिल्ली गया हुआ था और सात दिन के बाद आने वाला था। मैं बोला, “रमेश को जल्दी मोनिका के पास छोड़ कर आ जाओ, वो वहां पर खेलता रहेगा।”
तो वो रमेश को लेकर मोनिका के रूम में गई। मैं नेहा का इंतजार करने लगा। जैसे ही नेहा ने अंदर पैर रखा, मैंने नेहा की साड़ी खींचने लगा और बोला, “आज बड़ी मूड में लग रही हो।” वो बोली, “आपको सब्र तो होता नहीं, बात को आगे बढ़ाने में कोई फायदा नहीं। जो करना है जल्दी कर लो।” मैं बात को काटते हुए बोला, “क्या जल्दी करना है?” इतने में नेहा के पास गया और ब्लाउज के बटन खोलने लगा। बटन खोलने के बाद, नेहा ने ब्रा भी नहीं पहनी थी, मैं बोला, “आज तो तुम मस्त लग रही हो। देखो तुम्हारे स्तन को क्या लग रहे हैं, जैसे रसपूरी आम की तरह।” और मैं दोनों निप्पल को पकड़े हुए छेड़ने लगा। मैंने बोला, “रानी, एक बार कह दो कि क्या करना है।”
नेहा बोली, “आप तो दीवाने हो गए हो। दिन-रात आपको यही सूझता है।” मैं बोला, “यही क्या? तुम विस्तार से बताओ। तुम जानती हो कि मुझे शॉर्ट कट की भाषा नहीं आती।” नेहा बोली, “आप मेरे साथ रोज करते हो और रोज पूछते हो। तुम कितने बदतमीज हो। जाओ, मैं तुमसे बात नहीं करती।” मैंने निप्पल को जोर से मसलते हुए कहा, “रानी, जब तक नहीं कहोगी मैं नहीं छोडूंगा।” मैंने और जोर से मसलने लगा। नेहा छटपटाने लगी और बोली, “मेरी निप्पल छोड़ो, मैं बोलती हूं।” मैं बोला, “पहले बताओ फिर छोडूंगा।” वो बोली, “बताती हूं बाबा, बताती हूं।” मैं जोर से निप्पल को चुटकी में लेकर मसलने लगा और कहा, “जल्दी बोलो रानी, नहीं तो और जोर से मसलूंगा।” तो वो धीरे से बोलने लगी, “चुदाई।” मैं बोला, “अब हुई ना बात।”
नेहा को मैं गले के ऊपर किस कर रहा था और मेरे हाथ निप्पल पर फेर रहे थे। फिर मैंने लहंगे का नाडा झटके से खींचा और उसे नीचे गिरा दिया। मेरा हाथ अब उसकी चूत पर फेरने लगा। मैंने पूछा, “क्या बात है आज तो मैदान साफ नजर आ रहा है?” तो वो बोली, “आपके लिए किया है।” मैं अब नीचे जाकर मुंह चूत के ऊपर रखकर चाटने लगा। वो खड़ी-खड़ी मस्ती में आने लगी और आह्ह.. आह्ह.. की तरह आवाजें निकालने लगी। जैसे ही मैं जीभ अंदर डालता, वो और मस्त होकर बोलने लगी, “राजा जोर से… और जोर से… और जोर से।” वो बोलने लगी, “मैं आने वाली हूं, जोर से चाटो, अपनी जीभ और अंदर घुसाओ।” मैं तेजी से चाटने लगा। मेरे मुंह पर उसका गर्म, मीठा वीर्य की धार छूट गई। मैं सब पी गया और थोड़ा वीर्य मुंह में लेकर खड़ा होकर उसे किस करने लगा। उसके मुंह में डालकर पूछा, “रानी, मजा आया कि नहीं?” और वो बोली, “बहुत मजा आया।”
नेहा और मैं बेड के ऊपर आकर हम दोनों उल्टे हो गए। साठ-नौ पोजीशन में मेरा लंड नेहा के मुंह में था और नेहा की चूत मेरे मुंह पर थी। चाटते वक्त जैसे ही नजर रूम के दरवाजे के ऊपर गई, मैं चौंक गया कि नेहा ने दरवाजा लॉक लगाना भूल गई है। पर्दे के पीछे से कोई हमें देख रहा है। मैं सोचने लगा कौन हो सकता है। मैं आपको एक बात बता देता हूं कि हमारे दरवाजे के पीछे ही पर्दा लगा है और अंदर से बाहर नहीं दिखता पर परछाई गौर से देख सकते हैं।
इधर नेहा को मस्ती फिर छा रही थी और जोर से बोलने लगी कि “चाटो मेरी चूत को, खा जाओ चूत को।” और मेरा लंड मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगी थी। हम जोर से बोलने लगे थे। उधर वो, मोनिका, हमारी बातें सुन रही थी और हमारा खेल देख रही थी। मैंने कहा, “रानी अब असली खेल खेलते हैं।” तो वो बोली, “कौन सा खेल खेलना बाकी है?” मैं बोला, “क्यों तरसाती हो?” नेहा बोली, “इसलिए कहती हूं सोते हुए सांप को कभी नहीं जगाना चाहिए।” और मैं सीधा नेहा के ऊपर होकर लंड चूत के ऊपर रगड़ने लगा। नेहा बोली, “जरा सब्र करो।” वो मुझे किस करने लगी और मैं उसके स्तनों को जोर से दबाने लगा।
नेहा बोली राजा लंड को चूत के ऊपर रगड़ने से कुछ नहीं होता चूत में डालने से पता चलता है कि लंड में कितना दम है।
उसने मेरा लंड अपनी चूत के ऊपर रखा और नीचे से जोर से ऊपर की तरफ धक्का दिया। जैसे ही उसने धक्का दिया, मैंने ऊपर से जोरदार जवाबी धक्का दिया और मेरा पूरा मोटा लंड एक ही झटके में उसकी भीगी हुई चूत के अंदर चला गया। नेहा की चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर जकड़ लीं। उसकी गर्म, चिपचिपी चूत का अंदरूनी मांस मेरे लंड पर दबाव डाल रहा था। मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था। मैंने दोनों हाथों से उसके स्तनों को जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया। मेरी उंगलियां उसके निप्पल्स को नोच रही थीं। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। हम जब भी सेक्स करते हैं तो एक-दूसरे को गालियां देते हैं।
मैंने कहा, “रानी, मजा आया?” वो बोली, “चूतिया, मजा अब आएगा। देखूं तो तेरे लंड में कितनी ताकत है।” मैं बोला, “मुझे चूतिया बोलती है? ले, मेरा लंड का शॉट ले।” मैंने जोर से अपना लंड उसकी चूत के अंदर धकेलना शुरू कर दिया। मैं तेजी से चोदने लगा। हर धक्के पर उसकी चूत से पच-पच की आवाज निकल रही थी। उधर मोनिका पर्दे के पीछे खड़ी हमारा पूरा खेल देख रही थी और हर बात सुन रही थी।
नेहा को पूरी मस्ती चढ़ी हुई थी। वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी, “चोद साले… चोद मादरचोद… चोद… लंड में ताकत नहीं है क्या?” मैंने जवाब दिया, “रंडी, ले मेरे लंड का शॉट ले हरामजादी। मेरे को मादरचोद बोल रही है?” मैंने लंड को पूरी तरह बाहर निकाला और एक जोरदार झटके में फिर से पूरी गहराई तक अंदर डाल दिया। मैंने कहा, “साली चूत उछाल रही है… ले लंड को और अंदर ले।” नेहा भी उत्तेजित होकर बोलने लगी, “चोद… चोद… मेरी चूत को… क्या तेरा लंड है… मैं कभी भी इसके बगैर नहीं रह सकती… ले कुत्तिया… और अंदर ले।”
मैं जोर-जोर से चोदने लगा था। पूरे कमरे में हमारी गालियां और चोदाई की पच-पच… पच-पच की तेज आवाजें गूंज रही थीं। इतने में नेहा बोली, “चोद जल्दी से चोद हरामी… मैं आने वाली हूं।” मैंने और भी तेजी से चोदना शुरू कर दिया।
नेहा ने अपनी चूत की पिचकारी छोड़ दी। उसका पूरा बदन कांप उठा। उसकी आंखें उलट गईं और वो चीखते हुए बोली, “मजा आ गया राजा…” मैंने उसे जोर-जोर से चोदना जारी रखा और बोला, “ले मेरा लंड साली भोसड़ी की… मैं भी आ रहा हूं।” मैंने लंड को बाहर निकाला और उसके मुंह के पास रखकर कहा, “ले साली मेरा जूस पी।” नेहा ने मुंह खोल दिया। मैंने उसके मुंह में गाढ़ा, गर्म वीर्य की कई धारें छोड़ दीं। वो सब पी गई और मेरे लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया।
जब हम शांत हुए तो मैंने कपड़े पहन लिए। नेहा को किस करके मैं रूम से बाहर निकला। निकलते वक्त मैंने देखा कि मोनिका अपने रूम की तरफ भाग रही थी। मैं सोचते-सोचते पिताजी के पास जा कर टीवी देखने लगा। शाम को जब मैं पिताजी से बात कर रहा था तो मोबाइल की रिंग बज गई। मैंने नंबर देखा तो ससुराल से नेहा के भाई का फोन था। वो बोला, “हेलो जीजाजी, मैं सुंदर बोल रहा हूं।” मैं बोला, “जी बोलिए क्या बात है?” वो बोला, “जीजाजी आप नेहा से बात करवाओ।” मैं सेल नेहा को देने चला गया। नेहा को सेल देकर बाहर आ गया। कुछ देर के बाद नेहा मेरे पास आकर बोली, “जी मेरा फ्लाइट का टिकट बुक करवा दीजिए। मुझे अभी मायके जाना है और मैं सात दिन के बाद आऊंगी।” तो मैंने बोला, “क्यों क्या बात है? सब कुछ ठीक-ठाक है?” तो वो बोली, “मम्मी को हॉस्पिटल में एडमिट किया है। अपेंडिक्स का ऑपरेशन है।” मैंने बोला, “ठीक है।”
मैं अभी इसी वक्त एयरपोर्ट जाकर टिकट बुक करता हूं। तुम अपना सामान पैक करके रेडी रहना। मैं एयरपोर्ट जाकर टिकट लेकर रखता हूं। तुम मेरा सेल अपने पास रखो। मैं तुम्हें टिकट लेकर फोन करूंगा तभी तुम सामान लेकर निकल जाना। मैं एयरपोर्ट पहुंच कर पता लगाता हूं कि फ्लाइट कब की है। और टिकट मिल गया था। फ्लाइट आठ बजे की थी। जब मैंने घड़ी देखी तब छह तीस बजे थे। मैंने सेल पर फोन करके बताया कि तुम अभी घर से निकलो ताकि टाइम पर पहुंच सको। मैं एयरपोर्ट पर वेट करने लगा। तभी वापस मेरे सेल पर नेहा का फोन आया। मेरे पास दो सेलफोन हैं, एक कंपनी का दूसरा पर्सनल। वो पूछने लगी, “मैं मोनिका को भी एयरपोर्ट साथ लेकर आती हूं।” मैं बोला, “ठीक है। तुम जिसे साथ लाना है लाओ। अभी इसी वक्त निकलो।” मैंने फोन काट दिया।
मैं वेट करने लगा। करीब आधे घंटे के बाद नेहा और मोनिका ऑटो से उतरकर मेरे सेल पर फोन किया और पूछा, “आप कहां हो? हम मेन गेट पर इंतजार कर रहे हैं।”
मैं बोला, “मैं अभी आता हूं।” और नेहा के पास जाकर बोला, “ये लो टिकट और तुम जल्दी से सामान बुकिंग करके आओ। रमेश मोनिका के पास रहेगा।” नेहा सूटकेस बुकिंग करने चली गई। जब मैंने मोनिका की तरफ देखा तो मोनिका मुझे देख रही थी। तभी हमारी नजर मिली। मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।” वो शरमाकर स्माइल दे दी और इधर-उधर देखने लगी।
तभी नेहा आकर बोली, “Thank you so much,” और मुझे स्माइल देकर मोनिका को गले मिलकर रमेश को लेकर अंदर चली गई। मैं नेहा को टाटा करके वापस टैक्सी स्टैंड पर रुक गया और मोनिका से पूछा, “अभी क्या प्रोग्राम है?” वो बोली, “जी घर चलते हैं। पिताजी और माताजी इंतजार कर रहे होंगे।” मैं बोला, “आज पहली बार तुम मेरे साथ आई हो और तुमको ट्रीट नहीं दूं, ऐसा हो ही नहीं सकता।” मैंने कहा, “तुम शरमाओ नहीं।” वो बोली, “फिर कभी।” मैं फोर्स करके उसे 5 स्टार होटल में ले गया और कैंडल लाइट वाली खूबसूरत कैबिन में बैठ गए।
वेटर आकर मेनू देकर चला गया। मैंने मोनिका से पूछा, “तुम ड्रिंक करती हो?” वो बोली, “जी नहीं।” मैंने वापस पूछा, “आज तक कभी भी ड्रिंक नहीं किया? अपने पति के साथ भी नहीं?” वो शरमाते हुए बोली, “कॉलेज के टाइम पर कभी-कभी और उनके साथ सिर्फ दो बार।” मैंने फिर पूछा, “कौन सा ड्रिंक लिया था?” वो बोली, “कॉलेज टाइम पर बियर और उनके साथ विस्की।” मैंने पूछा, “आज तुम क्या लोगी?” तो वो बोली, “नहीं।” मैं फोर्स करते हुए बोला, “सिर्फ एक बार मुझे कंपनी दे दो। तुमको जो पसंद है बोलो, मैं भी वही लूंगा।” वो बोली, “प्लीज आप फोर्स मत कीजिए।” मैं झूठा गुस्सा दिखाते हुए बोला, “चलो घर चलते हैं। मैंने तुम्हें दोस्त समझा था।” तभी वो बोली, “नहीं, आप नाराज मत हो। मुझे कुछ भी चलेगा।”
मैं बोला, “नहीं, अब घर ही जाएंगे।” और मैं उठने को हुआ तो वो मेरा हाथ पकड़कर स्माइल देकर बोली, “प्लीज, मुझे कुछ भी चलेगा।” मैं वापस खुश होकर उसका हाथ पकड़कर हल्का दबाते हुए बोला, “Thank you।” हाथ छुड़ाते वक्त वो बोली, “प्लीज आप उनको मत बताना कि मैंने आपके साथ पी है।” मैंने उसे प्रॉमिस करके कहा, “जी, मैं नहीं बताऊंगा। तुम चिंता मत करो।” वो स्माइल देकर बोली, “जरा जल्दी ऑर्डर दे दो।” मैंने कहा, “तुम आज पहली बार मेरे साथ आई हो, प्लीज तुम ही ऑर्डर दे दो।”
तो वो मेनू खोलकर ऑर्डर देने लगी। तभी मुझसे पूछा, “कौन सा दो? विस्की या बियर?” मैंने बोला, “विस्की ही दे दो।” तो वो विस्की का ऑर्डर देने लगी और साथ में फिंगर चिप्स व खाने का ऑर्डर भी दे दिया। हम लोग इधर-उधर की बातें करने लगे। बातों के साथ-साथ हम काफी फ्रेंकली हो रहे थे। तभी हमारी नजरें बार-बार मिलने लगीं। मैं बोलने लगा, “तुम आज बहुत सुंदर लग रही हो।” तो वो बोली, “आज आप भी बहुत स्मार्ट लग रहे हैं। आपको तो गम होना चाहिए कि जेठानी मायके गई है और आप यहां खुशी से ड्रिंक ले रहे हैं।”
इतने में वेटर विस्की और सोडा लेकर आया और दो पेग बनाकर रख दिए। मैंने वेटर से कहा, “जल्दी से चिप्स लेकर आओ।” वेटर चला गया। मैंने एक ग्लास मोनिका को देकर दूसरा हाथ में लेकर बोला, “Cheers!” और हम दोनों ने एक घूंट लिया। वो बोली, “क्या हुआ? आपने मेरी बात का जवाब नहीं दिया।” मैं बोला, “नहीं मोनिका, ऐसी बात नहीं है। एक तरफ नेहा का गम, दूसरी तरफ तुमको फर्स्ट टाइम डिनर की ट्रीट। इस खुशी और गम में तुम्हारे साथ पी रहा हूं। तुमको भी गम होना चाहिए भाई का।” और मैं दूसरा घूंट लेने लगा।
वो दूसरी सीप में ही अपना पूरा पहला पेग खाली कर गई। उसके चेहरे पर नशा चढ़ने लगा था। वो बोलने लगी, “नहीं भैया, ऐसी बात नहीं है।” मैं विस्की का दूसरा पेग बनाकर उसके हाथ में देकर बोला, “लीजिए दूसरा पेग हमारे नाम का।” तो वो बोली, “आप क्यों हमें आज इतना पिला रहे हो?” मैं बोला, “नेहा तो पूरी बोतल ही पी लेती है। फिर भी तुम तो हमारे साथ हो, कुछ नहीं होगा। बस पीती रहो।” इतने में वेटर फिंगर चिप्स और सॉस लेकर आया।
मैं धीरे-धीरे विस्की पीता रहा और अपना पहला पेग खाली कर दिया। मोनिका ने दूसरा पेग आधा ही खाली किया था। मैं दूसरा पेग बना रहा था तो मोनिका नशे में बोली, “भैया आपने तो दूसरा पेग बनाकर मुझे दिया। प्लीज आप मुझे दीजिए, मैं बनाकर दूंगी।” और दूसरा पेग बनाकर मुझे देने लगी। मैंने दूसरा पेग उसके हाथ से लेने के समय उसका हाथ पकड़कर धीरे से दबाया। वो बोली, “जी छोड़िए, क्या कर रहे हो?” मैं बोला, “सॉरी।” मैंने दूसरा पेग एक घूंट में ही खाली करके कहा, “क्या पेग बनाया है तुमने? आज दिन तक मैंने ऐसा पेग नहीं पिया।”
तभी मैं बोला, “तुम भी तो दूसरा पेग जल्दी खाली करो, फिर हम तीसरा पेग एक साथ पिएंगे।” तो वो बोली, “नहीं भैया, मैं नहीं लूंगी।” तभी मैं बोला, “पहले खाली तो करो, बाद में देखते हैं।” मोनिका ने दूसरा पेग खाली करके ग्लास नीचे रख दिया। मैंने उसे तीसरा पेग बनाकर दिया। वो बोली, “मेरे लिए नहीं बनाओगी?” तो वो बोली, “प्लीज आप ज्यादा मत पीजिए।” मैं बोला, “लास्ट पेग डियर।” तो वो बोली, “ठीक है।” मैंने अपना ग्लास लेकर तीसरा पेग बनाकर बोला, “लीजिए।” मैं बोला, “Cheers!” तो वो बोली, “मैं नहीं पियूंगी।” तो मैं उठा और मोनिका के पास जाकर बोला, “प्लीज।” मैंने ग्लास उठाकर उसके होंठों पर रखकर कहा, “मुंह खोलो।” तो वो बोली, “दे दीजिए, मैं खुद पियूंगी।”
“नहीं, आज मैं खुद तुम्हें पिलाऊंगा।” तो वो बोली, “नहीं।” मैं जबरदस्ती उसे पिलाने लगा। एक घूंट पिलाने के बाद मैंने “सॉरी” बोला और उसके पास ही बैठकर चिप्स खाने लगा। वो नाराज होकर बोली, “आपसे ये उम्मीद नहीं थी।” मैं बोला, “सॉरी, मुझे माफ कर दो।” तो वो बोली, “ठीक है।” मैंने पूछा, “तुम मुझे नहीं पिलाओगी?” तो वो बोली, “जी नहीं।” मैं उसे फोर्स करने लगा, “प्लीज एक बार पिला दो।” तो वो बोली, “ठीक है।” और वो शरमाते हुए ग्लास लेकर मेरे होंठों के पास आकर बोली, “लीजिए।” मैं मुंह खोलकर उसका हाथ पकड़कर एक ही झटके में पूरा घूंट पी लिया। बोला, “Thank you डियर।” तो वो बोली, “आप बड़े बदमाश हो।” मैं बोला, “तुम भी कुछ कम नहीं हो।”
मैंने फिर से उसको कहा, “तुम भी तो तीसरा पेग खाली करो।” और मैं फिर से पेग बनाने लगा। वो मेरा हाथ पकड़कर बोली, “प्लीज मत पीजिए।” मैं बोला, “कुछ नहीं होगा।” तो वो बोली, “जी घर जाना है और वो भी टैक्सी में। गेट भी बंद कर दिया होगा। देर बहुत हो गई है।” मैं उसका हाथ पकड़कर किस करके बोला, “चिंता मत करो। मैं दूसरी चाबी लेकर आया हूं… और तुम सीधी अपने कमरे में चली जाना।”
तभी वो भी नशे में थी और वो हाथ छुड़ाने का प्रयास नहीं कर रही थी। मैंने उसके हाथ को पकड़कर एक और गहरी किस की और बोला, “तुम्हारे हाथ बहुत सॉफ्ट हैं… दिल करता है कि चाटता ही रहूं।” तो वो हाथ छुड़ाते हुए बोली, “मैं नहीं पियूंगी।” मैं बोला, “मुझे ही कुछ करना होगा।” तभी मैंने चौथा पेग खाली करके कहा, “डियर, तुम खाली एक पेग पियो, मैं भी एक पेग पीता हूं और बाद में खाना खाकर घर चले जाएंगे।”
उसे अब पूरा नशा छा गया था। उसकी आंखें लाल हो गई थीं और चेहरा गुलाबी चमक रहा था। मैं भी उसे छेड़ने लगा। मैंने कहा, “तुम कितनी अच्छी हो,” और उसके हाथ को धीरे-धीरे सहलाने लगा। मेरी उंगलियां उसके नरम हाथ पर फिसल रही थीं। तभी वो बोली, “भैया, मुझे आज आपने घायल ही कर दिया है।” मुझे अब पूरा विश्वास हो गया था कि रास्ता साफ हो गया है। मैंने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपने पास खींच लिया और कहा, “तुम आज कितनी सुंदर लग रही हो।” मेरा हाथ उसकी कमर पर फेरने लगा। वो छुड़ाने का प्रयास करने लगी।
तभी मैंने एक घूंट विस्की पी और मुंह रखकर उसके होंठों पर गहरी किस कर दी। साथ में मैंने उसके मुंह में विस्की डालने लगा। वो बोली, “क्या कर रहे हो आप?” मैं बोला, “कुछ नहीं डियर, मैं ज़रा तुम्हारे होंठों की विस्की पी रहा था।” इतने में उसने भी विस्की मुंह में लेकर मुझे किस की और मेरे मुंह में डाल दी। मैं खुशी से सब पी गया। तभी मैंने एक पेग और बनाया। बोला, “मैं तुझे ऐसे ही पिलाऊंगा।” तो वो बोली, “मैं भी आपको ऐसे ही पिलाऊंगी।” मैंने पेग बनाकर उसे दिया। वो ग्लास लेकर विस्की मुंह में लेकर मेरे मुंह पर रखकर विस्की और किसिंग दोनों एक साथ होने लगे।
ऐसे ही कभी वो मुझे किस करती, कभी मैं उसे किस करता। हम दोनों के मुंह में विस्की का स्वाद घुल रहा था। खाना खाकर बिल देकर मैं उठा। उसे बोला, “चलो अब।” तो उठने को हुई तो वो लड़खड़ाने लगी। मैं भी नशे में था। तभी मैंने उसे हाथ पकड़कर उसकी बाहों में हाथ डालकर उठाया। मैंने उसे किस दी और होटल वाले से कहा, “हमें टैक्सी चाहिए।” होटल की टैक्सी लेकर हम घर आ गए।
रास्ते में वो बोले जा रही थी, “प्लीज आप किसी को मत बताना कि मैंने आपके साथ पी है।” मैं भी पूरी मस्ती में उसे बोलता, “नहीं बताऊंगा,” और धीरे-धीरे उसके स्तनों को दबाने लगता। कभी उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगता। जैसे ही वो आंखें बंद करने लगी, तभी हमारा घर आ गया। मैंने दरवाजा खोला और उसे आवाज दी, “मोनिका घर आ गया है, चलो अंदर।” तो वो नशे में लंगड़ाती हुई बोली, “जी मुझे पकड़िए।” मैंने टैक्सी ड्राइवर को पैसे दिए और उसे गेट के अंदर लाकर गेट बंद कर दिया। उसे बाहों में उठाकर सीधे ही मैंने उसका रूम का दरवाजा खोलकर उसे बेड पर रखने लगा। तो वो बोली, “भैया मैं कहां हूं?” मैं बोला, “तुम अपने कमरे में हो।” मैंने बेड पर रखकर उसे किस करने लगा।
तभी वो बोली, “भैया क्या कर रहे हो?” मैं बोला, “प्लीज एक बार और।” और मैं दुबारा किस करने लगा। साथ में ही उसके स्तनों को धीरे-धीरे दबाने लगा। मैंने कहा, “डियर कल मिलेंगे।” तो वो बोली, “भैया प्लीज मेरा एक काम कर दो।” मैं बोला, “क्या है?” तो वो बोली, “मुझे अलमारी तक ले चलो।” मैंने उसको बाहों में उठाकर अलमारी तक ले आया। अलमारी खोलकर बोला, “लीजिए अलमारी खुली है। क्या चाहिए ले लो।” तो वो बोली, “आप बड़े शैतान हो।” और वो अलमारी से नाईटी लेकर बोली, “प्लीज आप बाहर जाएं।” मैंने उसको किस करके बाहर आया और अंदर से देखने लगा।
वो नशे में साड़ी एक झटके में उतार दी और ब्लाउज के बटन खोल रही थी। तभी मैंने अंदर जाकर उसके पीछे से ब्रा का हुक खोल दिया और दोनों स्तनों को पकड़कर जोर से दबाने लगा। मैं उन्हें चूसने लगा और बोलने लगा, “डार्लिंग लाओ, मैं तुझे पहना देता हूं। क्यों इतना कष्ट ले रही हो?” वो बोली, “छोड़िए ना मुझे।” मैंने उसके सामने जाकर उसे किस करके एक स्तन को चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा। तो नशे में वो बोलने लगी, “नहीं भैया, आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते। आप मेरे बड़े भाई के समान हैं… भैया छोड़ो मुझे… किसी को पता चलेगा तो मेरा क्या होगा…”
