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Virgin Girl Sex Fun Story
मैं मुंबई का रहने वाला हूँ पर हूँ पक्का छोड़ो राम बस अब आप स्टोरी का मज़ा लीजिए। मेरा लंड फुल 8 इंच का है और 2 इंच चौड़ा और सच में बहुत हार्ड हो जाता है जैसे बहुत सेक्सी। हमारे पड़ोस के मकान में एक नई-नई फैमिली रहने को आई थी वो केवल 3 लोग ही थे एक सुचेता और उसकी मॉम और डैड। Virgin Girl Sex Fun Story
सुचेता कोई 18-20 साल की सुंदर और मस्त सी लड़की थी और अभी पढ़ रही थी। कुछ ही समय में हमारे परिवार से उनकी अच्छी जान-पहचान हो गई थी। अब तो कई बार उसकी मॉम हमारे घर भी दिन में कई बार आ जाती थी और मेरी मॉम भी उनके घर आने-जाने लगी थी।
एक दिन सुचेता की मॉम हमारे घर आई तो उस समय मैं घर पर ही था तो उसने मुझे कहा कि विक्की मेरी बेटी अकाउंट में वीक है इसलिए उसकी ट्यूशन दे दिया करो। मैं मान गया। ट्यूशन देकर मेरी भी प्रैक्टिस हो जाती थी, और सुचेता जैसी ब्यूटीफुल लड़की को पास बैठाकर मज़ा आएगा सोचा।
और सुचेता थी वेरी फेयर, शॉर्ट हाइट अराउंड 5 फीट 1-2 इंच, और उसका फ़िगर आह्ह्ह्ह 34-35 मम्मे 27-28 कमर और 35-36 गाँड आह्ह्ह और वो स्कर्ट और टॉप पहना करती थी। नेक्स्ट डे से वो पढ़ने आने लगी। मैं उसे पढ़ाता और फिर उसे देखता था। उसमें बहुत ख़ूबसूरती थी।
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अब मैं उसे पूरे ध्यान से पढ़ाता था। मुझे वो अच्छी भी लगती थी। जब वो पढ़ती थी तब मैं उसके लेग्स देखता था बहुत ही व्हाइट थे। उसकी स्कर्ट उसकी घुटनों से थोड़ी नीचे थी। एक बार मैं उसे देख रहा था कि उसने मुझसे कुछ पूछा। मेरा ध्यान टाँगों पर था मैं ध्यान नहीं दे सका।
उसने दो बार बुलाया भैया.. भैया.. मैं एक दम से देखा कहा हाँ क्या हुआ। वो बोली क्या हुआ आप क्या देख रहे हो। मैंने कहा कुछ नहीं कुछ नहीं। वो बोली कुछ तो देख रहे थे बताओ न बताओ। मैंने कहा सुचेता तुम्हारी लेग्स पर एक भी बाल नहीं है।
वो बोली मैंने साफ़ किए हैं वो कॉलेज में स्कर्ट ऊँची है ना इसलिए मैंने साफ़ किए हैं। मैंने कहा ओके। अब थोड़ा माहौल अच्छा था तो मैंने पूछा कि तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है स्कूल में। वो बोली बहुत हैं। मैंने कहा बहुत हैं। वो बोली हाँ बहुत हैं सारे लड़के मेरे फ्रेंड हैं। ओह्ह मैंने कहा वो नहीं मैं बॉयफ्रेंड का पूछ रहा था।
उसने कहा मैंने भी तो बॉयफ्रेंड का बताया। मैंने कहा मैं वो वाला बॉयफ्रेंड कह रहा था। उसने कहा वो वाला कैसे वाला। ओह मैं मन में सोचने लगा या तो ये पागल बन रही है या बनाना रही है। मैंने कहा छोड़ो पढ़ो। उसने कहा नहीं पहले आप बताओ क्या कह रहे थे।
मैंने कहा वो फ्रेंड जो तुमको प्यार करता हो। उसने कहा कि मेरी कई फ्रेंड बात करती है तो पर मुझे समझ नहीं आता। ओके मैंने कहा ठीक है छोड़ो अब पढ़ो। वो बेमन से पढ़ने लगी और मैं उसके लेग्स देखकर उसकी गोरी-गोरी जाँघों को अपने दिमाग में देखने लगा।
अब तो वो रोज़ ही आने लगी और हम एक-दूसरे से अब काफी घुल-मिल गए थे। मैं कभी-कभी उसके सामने अपने लंड को खुजला देता था तो वो उसे ख़ाकियों से देख लेती थी। मैं भी कभी-कभी उसके बूब्स पर अपनी आँखें फेरा देता था। अब वो कभी-कभी काफी खुले गले का टी-शर्ट पहनकर भी आ जाती थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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और टेबल पर पढ़ाई के बहाने ज़्यादा ही झुक जाती थी तो मुझे उसके बिना ब्रा के बूब्स आधे से ज़्यादा दिख जाते थे। उसके बूब्स बिल्कुल गोरे-गोरे थे। कई बार मुझे उसके बूब्स के निप्पल्स भी दिख जाते थे तब मेरे लंड में एक ज़बरदस्त हलचल मच जाती थी और अचानक ही मेरा हाथ अपने लंड पर चला जाता था और मैं उसे पैंट के ऊपर से ही मसलने लग जाता था।
वो भी मेरे लंड को मसलते हुए देख लेती थी और अपनी आँखों को मेरे लंड से तब तक नहीं हटाती थी जब तक मैं अपने लंड को मसलना बंद नहीं कर देता था। अब वो भी कभी आते-जाते मेरे सामने अपने कपड़ों के ऊपर से कई बार अपनी चूत को भी मसल लेती थी।
शायद वो ये सब जान गई थी और उसका भी मन ये सब करने का हो गया था। मगर घर में कोई इस तरह का मौक़ा नहीं मिल पा रहा था कि हम असली चुदाई का मज़ा ले सकें। जहाँ चाह वहाँ राह वाली बात एक दिन हो ही गई। टू वीक्स के बाद मेरी मॉम कज़िन की शादी में अजमेर गई और उसने दो-तीन दिन बाद वापस आना था।
मुझे तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गई थी। मॉम के साथ चलने के लिए कहा तो मैंने कहा कि मुझे 1-2 दिन कोई ज़रूरी काम है जयपुर में मैं आपके साथ नहीं जा सकता तो शाम को मॉम और डैड अजमेर चले गए। मैं नहीं गया। सैटरडे का दिन था मैं 2 बजे घर वापस आ गया।
कि बेल बजी मैंने उठकर दरवाज़ा खोला और सामने सुचेता थी उसके हाथ में बुक्स थी वो कुछ समझने आई थी। मैंने उसे बोला कि मॉम नहीं है घर पे वो बोली मुझे पता है और उसने एक नॉटी सी स्माइल दे दी। फिर मैं इससे पहले कुछ कहता वो सीधा अंदर आ गई।
उसने बोला फिर नो पढ़ाई आज सिर्फ़ एंजॉय करेंगे। और वो सोफ़ा पर बैठ गई टीवी ऑन कर सुचेता और एच.बी.ओ चैनल ऑन कर दिया। चैनल पर उस समय एक बहुत ही सेक्सी मूवी आ रही थी। मूवी अभी-अभी शुरू ही हुई थी। उसके मुँह से एंजॉय शब्द सुनते ही मैं जान गया कि वो भी आज लगता है पूरी मस्ती के मूड में ही।
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मैं भी उसके पास ही बैठ गया और मूवी देखने लगा। जैसे-जैसे मूवी आगे बढ़ती जा रही थी हम दोनों का मूड भी मस्ती के लिए बढ़ता जा रहा था। कुछ देर बाद मैंने उसके कंधे पर अपना हाथ रख दिया। उसने मेरी तरफ़ देखा और अपनी आँखें झुका ली। कुछ देर बाद वो फिर से मूवी देखने लगी मगर उसने मेरा हाथ अपने कंधे से नहीं हटाया था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर मैंने उसका एक हाथ अपने हाथ में ले लिया और सहलाने लगा। वो कुछ नहीं बोली। फिर मैंने उसके गालों को एक किस किया। किस करते ही वो मुझसे लिपट गई। मैंने भी उसे अपनी बाँहों में कसकर पकड़ लिया और अपना मुँह उसके बूब्स पर रख दिया। वो और भी ज़ोर से मुझसे लिपट गई।
फिर मैंने उसके एक बूब पर अपना हाथ रख दिया। मैं खड़ा हुआ और मैंने अपने कपड़े जल्दी-जल्दी उतार दिए। वो मेरे बदन को किसी भूखी लड़की की तरह देख रही थी और उसकी आँखों में गुलाबी डोरे तैरने लगे थे। कुछ देर बाद मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने तने हुए लंड पर रख लिया।
उसके नरम-नरम हाथ मेरे लंड पर उफ़्फ़। मैं मस्ती में आ गया। अब मैंने सोचा कि इसे चोद लिया जाए। मैंने कहा अब अपनी स्कर्ट उतारो। वो मेरी बातों को फॉलो करने लगी और एक हाथ से लंड को पकड़े रही और दूसरे से स्कर्ट उतार रही थी और उसने अपनी स्कर्ट नीचे कर दी। उसके ब्लू प्रिंट के पैंटी उफ़्फ़ मैंने दोनों साइड से पकड़ी और उतार दी।
उसकी चूत पर बाल नहीं थे। मैंने कहा इस पर बाल नहीं है। उसने कहा जब लेग्स के साफ़ करती थी तब ही इस पर भी साफ़ कर लेती हूँ। मुझे मज़ा आता है रेज़र इस पर लगाते हूँ। मैंने कहा यही होता है मज़ा प्यार में भी बस प्यार में ये मज़ा बहुत ज़्यादा होता है।
मैंने उसकी चूत पर हाथ फेरा वो मचल गई कहने लगी गुड़गुदी होती है। मैंने उसे लिटाया और चूत पर हाथ फेरता रहा और एक हाथ उसके मम्मे पर ले गया और मम्मे दबाने लगा। हाथ के फेरने से उसे मज़ा आ रहा था कि उसे पता नहीं चला कि मेरा एक हाथ कब उसकी टॉप में घुस गया है।
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मैं मम्मे को ब्रा पर सहला रहा था। वो बोल रही थी हाँ हाँ मज़ा आ रहा है अच्छा लग रहा है। मैंने कहा टॉप को भी उतारो। वो एक दम से टॉप को उतारा और फिर ब्रा को उतारा और लेट गई। मैं हाथ फेरते-फेरते अपना मुँह चूत पर ले गया और और अब ही हाथ फेरते-फेरते अपनी उँगलियों से उसकी चूत के लिप्स को भी हल्के-हल्के मसल देता था। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी थीं।
फिर मैंने उसके एक बूब को अपने हाथ से पकड़कर दबाना और मसलना शुरू कर दिया और एक बूब को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। वो अपनी जाँघों को कसने और फैलाने लगी थी और मेरे मुँह को अपने बूब्स पर दबाने लगी थी। मुझे उसके बूब्स को चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
फिर मैंने उसके दूसरे बूब को भी चूसना शुरू कर दिया। मेरा तना हुआ लंड उसकी मखमली चूत को ऊपर से रगड़ रहा था। उसकी चूत की फांकें थोड़ी-थोड़ी खुलने लगी थीं और चूत थोड़ी-थोड़ी गीली भी होने लगी थी। कुछ देर बूब्स को चूसने के बाद मैंने उसके बूब्स के छोटे-छोटे गुलाबी से रंग के निप्पल्स को भी अपने दाँतों से हल्के-हल्के काटने लगा और चूसने लगा।
वो अब मेरे लंड को कस-कसकर पकड़ और दबाने लगी थी। उसके दबाने से लंड और भी टाइट हो जा रहा था। अचानक वो उठी और मुझे लिटाकर मेरे लंड को अपने मुँह के पास कर के उसकी एक किस ली और लंड को अपने होंठों से दबा लिया और जिसे मैंने उसके बूब्स चूसे थे उसी तरह मेरे लंड को चूसने लगी थी।
कुछ ही देर में मैंने अपना लंड उसके मुँह से छुड़ा लिया वरना मुझे लगने लगा था कि मेरा लंड अब पानी छोड़ देगा। मैंने उसे फिर से लिटा दिया वो सीधी लेट गई और अपनी जाँघों को उसने चुदाई में फैला लिया था। मैं जान गया कि उसकी चूत अब लंड माँगने लगी थी।
मैंने भी ज़्यादा देर लगाना अच्छा नहीं समझा और नीचे झुककर उसकी चूत को चूम लिया और अपनी एक उँगली चूत में हल्के से डाल दी। वो अब कसमसाने लगी थी। फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया वो मचलने लगी। मैंने टंग उसकी चूत के लिप्स पर डाली वो और कसमसाई।
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मैंने और टंग अंदर डाली वो मज़े से पागल हो गई। अब मेरा लंड भी पूरी मस्ती में था। मैंने सोचा कि अब डाल ही दो देखी जाएगी। मैं उसके ऊपर लेट गया। अचानक मुझे ध्यान आया कि अभी कुंवारी ही और मैंने उसके सिर से तकिया निकालकर उसकी गाँड के नीचे लगा दिया जिससे उसकी चूत ऊपर की ओर उठ गई थी।
चूत का गुलाबी छेद साफ़ नज़र आने लगा था। मैंने अपने लिप्स से उसके लिप्स मिलाए वो मज़े में मदहोश थी। उसकी चूत पानी छोड़ रही थी। मैंने फ्रेंच किसिंग स्टार्ट की और मुँह एक दम से अपने मुँह से बंद कर लिया। ज्यों ही मेरा लंड उसकी चूत से लगा उसने ख़ुद ही अपने हाथ से लंड को पकड़कर अपनी चूत के छेद पर रख लिया और लंड को छेद से लगाए रही।
अपने लंड का टोपा उसकी चूत पर महसूस करते ही मुझे सिहरन सी होने लगी। मैंने हल्के से लंड को छेद में दबाया तो लंड का टोपा चूत के छेद में फँसा-फँसा सा लगा। मैंने दबाव और बढ़ाया और धीरे से डालने लगा। वो ज़ोर-ज़ोर से मचलने लगी। मैंने देखा कि ये धीरे का काम नहीं है मैंने ज़ोर का झटका मारा और लंड का टोपा चूत में घुस गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
उसके मुँह से चीख निकलती पर मैंने मुँह से मुँह लगाया था तो आवाज़ रुक गई। मैंने लंड थोड़ा सा और दबाया तो लंड आधे से ज़्यादा चूत में घुस गया था। वो बुरी तरह से मचल रही थी। मैं धीरे-धीरे उसके बूब्स को अपने मुँह में डालकर चूसने लगा और धीरे-धीरे लंड को चूत में दबाने लगा। कुछ ही देर में मेरा 8 पूरा लंड उसकी कसी हुई चूत में चला गया था।
मैं लंड को उसकी चूत में डाले पड़ा रहा और उसका मुँह चूसता रहा और मम्मे ज़ोर-ज़ोर से सहलाने लगा। 10 मिनट बाद मैंने फील किया कि वो अपनी गाँड मेरे लंड के साथ धक्के दे रही है। मैं समझ गया कि उसे अब दर्द कम है और मज़ा आ रहा है। मैंने धक्के धीरे-धीरे मारना शुरू किया।
लंड को आधे से ज़्यादा बाहर निकालता और फिर पूरा लंड चूत में डाल देता था। कुछ देर बाद वो भी अपनी गाँड को ऊपर की ओर तेज़ी से उछालने लगी थी। मैं भी अब तबड़तोड़ धक्के लगाने लगा था और मुँह चोदकर मम्मे चूसता रहा और 10-12 मिनट बाद एक तूफ़ान सा आया। मैंने देखा सुचेता मछली की तरह तड़प रही। मैं समझ गया उसका डिस्चार्ज है। उसकी तड़पन से मेरी स्पीड तेज़ हो गई।
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मैं भी डिस्चार्ज पर पहुँचने लगा। फुफुह्ह्फ़ा.. सी. हाय. येस ओह्ह्ह्हो.. हिराज.. मुझे कुछ.. हो रहा है.. ओह्ह्ह येस.. ओह्ह्ही.. से.. और हम दोनों ने एक-दूसरे को कसकर पकड़ लिया था। मेरे लंड का पानी और उसकी चूत का पानी एक साथ ही निकलने लगा था। मैंने उसे कसकर अपनी बाँहों में जकड़ लिया था और उसने मुझसे भी ज़्यादा मुझे जकड़ लिया था। यहाँ तक कि मुझसे अब लंड भी अंदर-बाहर चूत में करने में परेशानी होने लगी थी। फिर हम दोनों ही निढाल हो गए थे। कुछ देर हम एक-दूसरे के ऊपर ही पड़े रहे।
फिर हम दोनों उठे और मैंने उसकी चूत को बेड शीट से ही पोंछ दिया। उसकी चूत पहली चुदाई का रस पीकर बहुत ही प्यारी और गुलाबी-गुलाबी लग रही थी। क्योंकि उसकी चूत से थोड़ा ब्लड भी निकला था। 1 घंटे बाद वो मुझे फिर से चुदाई करने को बोली तो मैं फिर से तैयार हो गया। अबकी बार जो मैंने और उसने पहले चुदाई से ज़्यादा मज़ा उठाया था। फिर हम दोनों अलग हो गए। 5 बज गए थे उसके मम्मी-पापा के आने का टाइम हो गया था। वो सोफ़ा पर आके बुक्स लेकर चली गई। मैंने बेडरूम से ब्लड वाली बेडशीट उठाई और उसे धोने लगा।
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